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Bahraich News: 50 साल पुरानी यादें ताजा करेगी सरयू, फिर तैरते पुल से होगा आवागमन
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सरयू नदी पर बने संजय सेतु की होगी मरम्मत।
- फोटो : सरयू नदी पर बने संजय सेतु की होगी मरम्मत।
बहराइच। सरयू नदी इतिहास को दोहराने जा रही है। आधुनिक दौर में जहां लोग चौड़े पक्के पुलों और तेज रफ्तार यातायात के आदी हो चुके हैं, वहीं अब सरयू पर बनने वाला पीपे का पुल लोगों को करीब 50 साल पहले की उन यादों में ले जाएगा, जब राजधानी लखनऊ का सफर तैरते पुल के सहारे तय होता था।
संजय सेतु की मरम्मत के चलते लगभग दो माह के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर सरयू नदी पर पीपे का पुल बनाए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर एन प्रकाश के अनुसार, संजय सेतु में तकनीकी खामियों और जॉइंटर ढीले होने की समस्या के चलते मेजर रिपेयर की आवश्यकता बताई गई है। मरम्मत कार्य के दौरान यातायात पूरी तरह बंद न हो, इसके लिए प्रशासन और संबंधित विभागों ने पीपे के पुल को अस्थायी समाधान के रूप में चुना है। इस मामले में नौ करोड़ की प्रोजेक्ट रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। यह वही व्यवस्था है, जो करीब पांच दशक पहले तक इस क्षेत्र में आम थी।
पीपे का पुल बनने से जहां यातायात सुचारु रखने में मदद मिलेगी, वहीं प्रशासन के सामने सुरक्षा और प्रबंधन की बड़ी चुनौती भी होगी। भारी वाहनों की आवाजाही सीमित रखने, नदी के जलस्तर पर निगरानी व 24 घंटे कर्मियों की तैनाती पर विचार किया जा रहा है।
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संजय सेतु की मरम्मत के चलते लगभग दो माह के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर सरयू नदी पर पीपे का पुल बनाए जाने की तैयारी शुरू हो गई है। एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर एन प्रकाश के अनुसार, संजय सेतु में तकनीकी खामियों और जॉइंटर ढीले होने की समस्या के चलते मेजर रिपेयर की आवश्यकता बताई गई है। मरम्मत कार्य के दौरान यातायात पूरी तरह बंद न हो, इसके लिए प्रशासन और संबंधित विभागों ने पीपे के पुल को अस्थायी समाधान के रूप में चुना है। इस मामले में नौ करोड़ की प्रोजेक्ट रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। यह वही व्यवस्था है, जो करीब पांच दशक पहले तक इस क्षेत्र में आम थी।
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पीपे का पुल बनने से जहां यातायात सुचारु रखने में मदद मिलेगी, वहीं प्रशासन के सामने सुरक्षा और प्रबंधन की बड़ी चुनौती भी होगी। भारी वाहनों की आवाजाही सीमित रखने, नदी के जलस्तर पर निगरानी व 24 घंटे कर्मियों की तैनाती पर विचार किया जा रहा है।
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