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Bahraich News: रिसिया सीएचसी अधीक्षक पर उत्पीड़न का आरोप
Sat, 30 Aug 2025 01:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sat, 30 Aug 2025 01:48 AM IST
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बहराइच कलेक्ट्रेट में ज्ञापन देने आईं रिसिया सीएचसी की स्वास्यकर्मी। - स्रोत : स्वास्यकर्मी
बहराइच। सीएचसी अधीक्षक पर स्वास्थ्य पर्यवेक्षक और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं। शुक्रवार को डीएम को पत्र सैंपकर आर्थिक व मानसिक शोषण करने की बात कही है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि हर नसबंदी शिविर में महिला-पुरुष स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है। लक्ष्य पूरा न होने पर 10-10 हजार रुपये वसूले जाते हैं। रुपये न देने पर वेतन रोकने और डांट-फटकार कर अपमानित करने की धमकी दी जाती है।
पत्र के जरिये यह भी आरोप लगाया है कि कर्मचारी जब अवकाश लेते हैं, तो अधीक्षक रुपये की मांग करते हैं। एक महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक को बेटी की शादी के लिए छुट्टी चाहिए थी, तो पांच हजार रुपये वसूले गए। आरोप है कि छुट्टी की अर्जी तक फाड़ दी जाती है और कर्मचारियों को अपशब्द कहकर धमकाया जाता है।
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महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों का कहना है कि अधीक्षक मीटिंग के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। कई मामलों में महिलाओं से रुपये वसूलने के साक्ष्य तक डीएम को सौंपे हैं। पत्र सौंपने वालों में मधु, परवीन फातिमा, प्रिया, शालिनी, लाली वर्मा, चांदनी, विशाल, कुमारी सुनीता, साधना, पूनम, आरती सिंह, दीपू व चित्रा आदि मौजूद रही।
पूर्व में भी हो चुकी हैं शिकायतें
पीड़ित महिला स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि इससे पहले भी अधीक्षक पर महिला स्वास्थ्य कर्मियों से अभद्रता और रुपये लेकर समझौता कराने के आरोप लग चुके हैं। कुछ प्रकरण पोर्टल और राष्ट्रीय महिला आयोग तक पहुंचे, लेकिन बाद में दबाव व रुपये के बल पर मामले रफा-दफा करा दिए गए।
सभी आरोप हैं निराधार
सीएचसी रिसिया के अधीक्षक प्रत्यूष सिंह से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं, वही शिकायत करते हैं। फील्ड में जाने की बात कहने पर कर्मचारी दबाव बनाते हैं। इस पर कई लोगों का वेतन रोका गया है। इसी को लेकर आरोप लगा रहे हैं।
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शिकायतकर्ताओं का कहना है कि हर नसबंदी शिविर में महिला-पुरुष स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों पर अनावश्यक दबाव बनाया जाता है। लक्ष्य पूरा न होने पर 10-10 हजार रुपये वसूले जाते हैं। रुपये न देने पर वेतन रोकने और डांट-फटकार कर अपमानित करने की धमकी दी जाती है।
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पत्र के जरिये यह भी आरोप लगाया है कि कर्मचारी जब अवकाश लेते हैं, तो अधीक्षक रुपये की मांग करते हैं। एक महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षक को बेटी की शादी के लिए छुट्टी चाहिए थी, तो पांच हजार रुपये वसूले गए। आरोप है कि छुट्टी की अर्जी तक फाड़ दी जाती है और कर्मचारियों को अपशब्द कहकर धमकाया जाता है।
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महिला स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों का कहना है कि अधीक्षक मीटिंग के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं। कई मामलों में महिलाओं से रुपये वसूलने के साक्ष्य तक डीएम को सौंपे हैं। पत्र सौंपने वालों में मधु, परवीन फातिमा, प्रिया, शालिनी, लाली वर्मा, चांदनी, विशाल, कुमारी सुनीता, साधना, पूनम, आरती सिंह, दीपू व चित्रा आदि मौजूद रही।
पूर्व में भी हो चुकी हैं शिकायतें
पीड़ित महिला स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि इससे पहले भी अधीक्षक पर महिला स्वास्थ्य कर्मियों से अभद्रता और रुपये लेकर समझौता कराने के आरोप लग चुके हैं। कुछ प्रकरण पोर्टल और राष्ट्रीय महिला आयोग तक पहुंचे, लेकिन बाद में दबाव व रुपये के बल पर मामले रफा-दफा करा दिए गए।
सभी आरोप हैं निराधार
सीएचसी रिसिया के अधीक्षक प्रत्यूष सिंह से जब इस मामले में बात की गई तो उन्होंने कहा कि जो कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाते हैं, वही शिकायत करते हैं। फील्ड में जाने की बात कहने पर कर्मचारी दबाव बनाते हैं। इस पर कई लोगों का वेतन रोका गया है। इसी को लेकर आरोप लगा रहे हैं।