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एक बीघा में 217 क्विंटल गन्ने की पैदावार कर रेशम ने बनाया रिकॉर्ड
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 13 May 2016 10:31 PM IST
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तराई में गन्ने का रिकॉर्ड उत्पादन करने वाले किसान रेशम सिंह।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बहराइच। थक कर न बैठ ऐ मंजिल के मुसाफिर, मंजिल भी मिलेगी और जीने का मजा भी आएगा... इन पंक्तियाें को सच कर दिखाया है कारीकोट गांव निवासी गन्ना किसान रेशम सिंह ने।
कुछ अलग करने के जुनून व वैज्ञानिक विधि से की गई गन्ने की खेती ने रेशम सिंह को तराई के किसानों का रोल मॉडल बना दिया है। रेशम सिंह ने एक बीघा में 217 क्विंटल गन्ना पैदा किया है।
यह तराई में नया कीर्तिमान है। इस जज्बे को गन्ना विभाग ने भी सलाम किया है। गन्ना उपायुक्त ने रेशम सिंह को प्रदेश स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किए जाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है।
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मिहींपुरवा विकासखंड के कारीकोट गांव निवासी रेशम सिंह सजग किसान हैं। आर्मी से रिटायर रेशम सिंह ने पेराई सत्र 2015-16 के अक्तूबर में ट्रैंच विधि से दो हेक्टेअर भूमि पर शरदकालीन गन्ने की बोआई की थी। उन्होंने सी शून्य 238 प्रजाति अपनाई थी।
इसके बाद विधि के हिसाब से गन्ने में खाद, पानी दिया। जनवरी में जब गन्ने की फसल तैयार हुई तो उनकी बांछे खिल गई। आमतौर पर गन्ने की लंबाई छह से सात फुट होती और प्रति बीघा उत्पादन 40 से 50 क्विंटल प्राप्त होता है लेकिन रेशम सिंह के खेत से पैदा गन्ने की लंबाई 14 फुट थी और प्रति बीघा 217 क्विंटल गन्ने की पैदावार हासिल हुई।
रेशम सिंह का कहना है कि यदि वैज्ञानिक विधि से मेहनत व नई सोच के साथ कम भूमि पर भी खेती की जाए तो अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है। गन्ना विभाग ने रेशम सिंह को तराई में सबसे अधिक गन्ने की उपज प्राप्त करने वाले किसानों की श्रेणी में रखा है।
रेशम सिंह के मेहनत की प्रशंसा पूरे मंडल में है। उप गन्ना आयुक्त अमर सिंह ने गन्ना किसान रेशम सिंह को प्रदेश स्तर पर पुरस्कृत करने के लिए मुख्य प्रसार अधिकारी गन्ना कार्यालय को प्रस्ताव भेज दिया है। उम्मीद है कि जल्द ही प्रदेश सरकार गन्ना किसान रेशम सिंह को पुरस्कृत करेगी।
गन्ने के साथ राजमा सहफसली
रेशम सिंह ने गन्ने के साथ राजमा की पैदावार भी हासिल की है। उन्होंने गन्ने के साथ सहफसली के रूप में राजमा की खेती अपनाई थी। उन्हें 4 क्विंटल प्रति हेक्टेअर राजमा पैदा कर अपनी आर्थिक स्थिति में अतिरिक्त वृद्धि की है।
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कुछ अलग करने के जुनून व वैज्ञानिक विधि से की गई गन्ने की खेती ने रेशम सिंह को तराई के किसानों का रोल मॉडल बना दिया है। रेशम सिंह ने एक बीघा में 217 क्विंटल गन्ना पैदा किया है।
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यह तराई में नया कीर्तिमान है। इस जज्बे को गन्ना विभाग ने भी सलाम किया है। गन्ना उपायुक्त ने रेशम सिंह को प्रदेश स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किए जाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है।
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मिहींपुरवा विकासखंड के कारीकोट गांव निवासी रेशम सिंह सजग किसान हैं। आर्मी से रिटायर रेशम सिंह ने पेराई सत्र 2015-16 के अक्तूबर में ट्रैंच विधि से दो हेक्टेअर भूमि पर शरदकालीन गन्ने की बोआई की थी। उन्होंने सी शून्य 238 प्रजाति अपनाई थी।
इसके बाद विधि के हिसाब से गन्ने में खाद, पानी दिया। जनवरी में जब गन्ने की फसल तैयार हुई तो उनकी बांछे खिल गई। आमतौर पर गन्ने की लंबाई छह से सात फुट होती और प्रति बीघा उत्पादन 40 से 50 क्विंटल प्राप्त होता है लेकिन रेशम सिंह के खेत से पैदा गन्ने की लंबाई 14 फुट थी और प्रति बीघा 217 क्विंटल गन्ने की पैदावार हासिल हुई।
रेशम सिंह का कहना है कि यदि वैज्ञानिक विधि से मेहनत व नई सोच के साथ कम भूमि पर भी खेती की जाए तो अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है। गन्ना विभाग ने रेशम सिंह को तराई में सबसे अधिक गन्ने की उपज प्राप्त करने वाले किसानों की श्रेणी में रखा है।
रेशम सिंह के मेहनत की प्रशंसा पूरे मंडल में है। उप गन्ना आयुक्त अमर सिंह ने गन्ना किसान रेशम सिंह को प्रदेश स्तर पर पुरस्कृत करने के लिए मुख्य प्रसार अधिकारी गन्ना कार्यालय को प्रस्ताव भेज दिया है। उम्मीद है कि जल्द ही प्रदेश सरकार गन्ना किसान रेशम सिंह को पुरस्कृत करेगी।
गन्ने के साथ राजमा सहफसली
रेशम सिंह ने गन्ने के साथ राजमा की पैदावार भी हासिल की है। उन्होंने गन्ने के साथ सहफसली के रूप में राजमा की खेती अपनाई थी। उन्हें 4 क्विंटल प्रति हेक्टेअर राजमा पैदा कर अपनी आर्थिक स्थिति में अतिरिक्त वृद्धि की है।