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Bahraich News: टकराव रोकने की पहल...हाथी आया तो बजेगा सायरन, चमकेगी एलईडी
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हाथी के हमले रोकने के लिए एनाइडर डिवाइस का किया जा रहा ट्रायल।
बिछिया। कतर्नियाघाट में हाथियों के गांवों और खेतों में घुसने से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए वन विभाग ने तकनीक का सहारा लिया है। कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग में पहली बार एनाइडर (एनीमन इंस्ट्रूजन डिटेक्शन एंड रिपेल सिस्टम) डिवाइस का ट्रायल शुरू किया गया है। सुजौली रेंज के बनकटी गांव में हाथियों के आवागमन वाले रास्ते पर इसे लगाया गया है। हाथी के 30 मीटर के दायरे में आते ही डिवाइस सक्रिय होकर तेज सायरन बजाएगा और हाई पावर एलईडी चमकेगी। इससे हाथी को रास्ता बदलने और ग्रामीणों को समय रहते सतर्क होने में मदद मिलेगी।
कतर्नियाघाट में हाथियों के कारण हर साल फसलों और मकानों को नुकसान होता है। कई बार ग्रामीण भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। वन विभाग की ओर से गज मित्र दल और निगरानी समेत कई उपाय किए जाते हैं, लेकिन रात में हाथियों की निगरानी चुनौती बनी रहती है। इसी को देखते हुए सबसे अधिक फसल नुकसान वाले बनकटी गांव को पहले चरण में ट्रायल के लिए चुना गया है। सुजौली के वन क्षेत्राधिकारी नीरज श्रीवास्तव ने गज मित्रों की टीम को डिवाइस सौंपकर इसका संचालन शुरू कराया।
सौर ऊर्जा से चलेगा उपकरण
एनाइडर डिवाइस सौर ऊर्जा से संचालित और स्वचालित है। इसे गांव के बाहर हाथियों के कॉरिडोर में छह से सात फीट ऊंचे लोहे के खंभे पर लगाया जाता है। प्रत्येक गांव में हाथियों के आवागमन वाले तीन से चार स्थान चिह्नित कर ऐसे उपकरण लगाने की योजना है। डिवाइस में इंफ्रारेड और सेस्मिक सेंसर लगे हैं, जिन्हें हाथी के आकार और वजन के अनुसार सेट किया गया है। हाथी के करीब आते ही सेंसर सक्रिय होकर सायरन और एलईडी को चालू कर देंगे।
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रात में पहरेदार की तरह करेगा काम
वन क्षेत्राधिकारी नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि हाथी-मानव द्वंद्व की करीब 80 प्रतिशत घटनाएं सूर्यास्त के बाद होती हैं। दिन में निगरानी आसान रहती है, लेकिन रात में चुनौती बढ़ जाती है। एनाइडर डिवाइस इस कमी को दूर करने में मदद करेगा। ट्रायल के परिणाम के आधार पर इसे अन्य संवेदनशील गांवों में भी लगाने पर विचार किया जाएगा।
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कतर्नियाघाट में हाथियों के कारण हर साल फसलों और मकानों को नुकसान होता है। कई बार ग्रामीण भी इसकी चपेट में आ जाते हैं। वन विभाग की ओर से गज मित्र दल और निगरानी समेत कई उपाय किए जाते हैं, लेकिन रात में हाथियों की निगरानी चुनौती बनी रहती है। इसी को देखते हुए सबसे अधिक फसल नुकसान वाले बनकटी गांव को पहले चरण में ट्रायल के लिए चुना गया है। सुजौली के वन क्षेत्राधिकारी नीरज श्रीवास्तव ने गज मित्रों की टीम को डिवाइस सौंपकर इसका संचालन शुरू कराया।
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सौर ऊर्जा से चलेगा उपकरण
एनाइडर डिवाइस सौर ऊर्जा से संचालित और स्वचालित है। इसे गांव के बाहर हाथियों के कॉरिडोर में छह से सात फीट ऊंचे लोहे के खंभे पर लगाया जाता है। प्रत्येक गांव में हाथियों के आवागमन वाले तीन से चार स्थान चिह्नित कर ऐसे उपकरण लगाने की योजना है। डिवाइस में इंफ्रारेड और सेस्मिक सेंसर लगे हैं, जिन्हें हाथी के आकार और वजन के अनुसार सेट किया गया है। हाथी के करीब आते ही सेंसर सक्रिय होकर सायरन और एलईडी को चालू कर देंगे।
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रात में पहरेदार की तरह करेगा काम
वन क्षेत्राधिकारी नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि हाथी-मानव द्वंद्व की करीब 80 प्रतिशत घटनाएं सूर्यास्त के बाद होती हैं। दिन में निगरानी आसान रहती है, लेकिन रात में चुनौती बढ़ जाती है। एनाइडर डिवाइस इस कमी को दूर करने में मदद करेगा। ट्रायल के परिणाम के आधार पर इसे अन्य संवेदनशील गांवों में भी लगाने पर विचार किया जाएगा।