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लॉकडाउन के फैसले से व्यापारियों व समाज सेवियोें में आक्रोश
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बहराइच। उद्योग व्यापार मंडल की ओर से जिला प्रशासन को दिए गए प्रस्ताव के बाद लगी मुहर पर शहर में नौ दिन का लॉकडाउन होने से व्यापारियों व समाज सेवियों में आक्रोश व्याप्त है। लोगों ने व्यापार मंडल के इस फैसले पर नाराजगी जाहिर करते आक्रोश व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि बिना छोटे दुकानदारों के दर्द को समझे व बिना राय लिए व्यापार मंडल ने अपना प्रस्ताव बनाकर जिला प्रशासन से पास करा लिया। यह बिल्कुल तानाशाही रवैया है। शहर में हुए नौ दिन के लॉकडाउन का सभी ने विरोध कर दुकान खोलने व प्रस्ताव वापस लेने की मांग की है।
सरकार का आदेश मान्य, किसी अन्य का नहीं
शहर में नौ दिन का होने वाला लॉकडाउन सरकार का निर्णय है तो मान्य है, लेकिन अगर यह किसी अन्य का निर्णय है तो बिल्कुल मान्य नहीं है, क्योंकि इस निर्णय से छोटे व्यापारियों की कमर टूट जाएगी। उनके आगे वैसे ही दो रोटी का संकट है और शहर में लॉकडाउन करने के बाद स्थिति और बिगड़ जाएगी। समस्या को लेकर डीएम को पत्र भी लिखा है।
- हरजीव अग्रवाल, जिलाध्यक्ष, उद्योग व्यापार संगठन
तो क्या मिलें भी बंद रहेंगी
व्यापार मंडल की ओर से कोरोना को देखते हुए लॉकडाउन का फैसला लिया गया है। यह बिल्कुल तानाशाही वाला फैसला है। इसमें किसी भी छोटे दुकानदारों से कोई राय नहीं ली गई है। छोटी दुकानों को बंद कराने का तो फैसला ले लिया है तो क्या मिलें भी बंद रहेंगी। जहां पर 15 से 50 मजदूर काम करते है। अगर बंद नहीं होंगी तो स्थिति आंदोलन की हो जाएगी। जिला प्रशासन को भी अनुमति देने से पहले एक बार विचार अवश्य करना चाहिए था।
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विमल टेकड़ीवाल, समाजसेवी
दुश्वारियों का जंजाल बन सकता है फैसला
बढ़ रहे कोरोना को देखते हुए अगर यह फैसला लिया गया है तो पूरे जिले में यह नियम लागू किया जाए। सरकारी व गैर सरकारी कार्यालय भी बंद कराए जाएं। केवल दुकान व छोटे प्रतिष्ठान बंद करने से कोरोना पर विजय मिलने वाली नहीं है। इस तरह के फैसले दुश्वारियों के जंजाल बन सकते हैं। व्यापार मंडल व जिला प्रशासन को एक बार फिर से सोच कर फैसला लेना चाहिए।
देवेंद्र उपाध्याय, समाजसेवी
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सरकार का आदेश मान्य, किसी अन्य का नहीं
शहर में नौ दिन का होने वाला लॉकडाउन सरकार का निर्णय है तो मान्य है, लेकिन अगर यह किसी अन्य का निर्णय है तो बिल्कुल मान्य नहीं है, क्योंकि इस निर्णय से छोटे व्यापारियों की कमर टूट जाएगी। उनके आगे वैसे ही दो रोटी का संकट है और शहर में लॉकडाउन करने के बाद स्थिति और बिगड़ जाएगी। समस्या को लेकर डीएम को पत्र भी लिखा है।
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- हरजीव अग्रवाल, जिलाध्यक्ष, उद्योग व्यापार संगठन
तो क्या मिलें भी बंद रहेंगी
व्यापार मंडल की ओर से कोरोना को देखते हुए लॉकडाउन का फैसला लिया गया है। यह बिल्कुल तानाशाही वाला फैसला है। इसमें किसी भी छोटे दुकानदारों से कोई राय नहीं ली गई है। छोटी दुकानों को बंद कराने का तो फैसला ले लिया है तो क्या मिलें भी बंद रहेंगी। जहां पर 15 से 50 मजदूर काम करते है। अगर बंद नहीं होंगी तो स्थिति आंदोलन की हो जाएगी। जिला प्रशासन को भी अनुमति देने से पहले एक बार विचार अवश्य करना चाहिए था।
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विमल टेकड़ीवाल, समाजसेवी
दुश्वारियों का जंजाल बन सकता है फैसला
बढ़ रहे कोरोना को देखते हुए अगर यह फैसला लिया गया है तो पूरे जिले में यह नियम लागू किया जाए। सरकारी व गैर सरकारी कार्यालय भी बंद कराए जाएं। केवल दुकान व छोटे प्रतिष्ठान बंद करने से कोरोना पर विजय मिलने वाली नहीं है। इस तरह के फैसले दुश्वारियों के जंजाल बन सकते हैं। व्यापार मंडल व जिला प्रशासन को एक बार फिर से सोच कर फैसला लेना चाहिए।
देवेंद्र उपाध्याय, समाजसेवी