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Bahraich News: नेपाल तक नेटवर्क बढ़ाने की जुगत में थे बर्खास्त पुलिसकर्मी
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पुलिस की गिरफ्त में आए बर्खास्त सिपाही।
बहराइच। पुलिस की वर्दी, लाल-नीली बत्ती लगी गाड़ी और फर्जी सरकारी नंबर प्लेट के रौब के सहारे दुकानदारों को धमकाकर वसूली करने वाले दो पूर्व पुलिसकर्मी पिछले करीब छह माह से बहराइच में सक्रिय थे। पुलिस के मुताबिक दोनों जिला मुख्यालय के आसपास के ग्रामीण इलाकों में लगातार वसूली कर रहे थे और नेपाल सीमा तक अपना नेटवर्क फैलाने की कोशिश में थे। शिकायतें मिलने के बाद पुलिस ने उनकी गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की और शुक्रवार को उन्हें दबोच लिया।
पकड़े गए आरोपियों में बर्खास्त पुलिसकर्मी समर बहादुर सिंह वर्ष 2019 में पीएसी से जबरन सेवानिवृत्त किया गया था, जबकि दूसरा श्रीप्रकाश द्विवेदी उर्फ प्रकाश दुबे बर्खास्त सिपाही है। दोनों कथित तौर पर पुलिस की दारोगा की वर्दी पहनकर लाल-नीली बत्ती लगी रेनॉल्ट ट्राइबर कार में घूमते थे। गाड़ी पर फर्जी नंबर प्लेट यूपी 32 बीजी 6267 लगी थी। ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानदारों को धमकाने के साथ अपना नेटवर्क बनाने का काम कर रहे थे।
पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि दोनों आरोपी करीब छह माह से अलग-अलग इलाकों में सक्रिय थे। कुछ दिनों तक एक जिले में गतिविधियां करने के बाद दूसरे जिले में चले जाने की बात दोनों ने बताई है। बहराइच में भी दोनों पिछले करीब एक सप्ताह से डेरा डाले हुए थे। पुलिस को उनकी गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद निगरानी बढ़ाई गई और दोनों पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
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गोपनीय रखी थी कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि कार्रवाई को गोपनीय रखा गया, ताकि आरोपियों को पुलिस की तैयारी की भनक न लग सके। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अन्य जिलों में अपनी गतिविधियों और कुछ सहयोगियों के बारे में जानकारी दी है। इनमें कुछ लोग सीमा क्षेत्र में सक्रिय बताए जा रहे उनके नाम भी सामने आए हैं। पुलिस अब इन लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। एसपी ने बताया कि दोनों आरोपियों ने बहराइच के अलावा अन्य जिलों को भी निशाना बनाने की बात बताई है।
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पकड़े गए आरोपियों में बर्खास्त पुलिसकर्मी समर बहादुर सिंह वर्ष 2019 में पीएसी से जबरन सेवानिवृत्त किया गया था, जबकि दूसरा श्रीप्रकाश द्विवेदी उर्फ प्रकाश दुबे बर्खास्त सिपाही है। दोनों कथित तौर पर पुलिस की दारोगा की वर्दी पहनकर लाल-नीली बत्ती लगी रेनॉल्ट ट्राइबर कार में घूमते थे। गाड़ी पर फर्जी नंबर प्लेट यूपी 32 बीजी 6267 लगी थी। ग्रामीण क्षेत्रों में दुकानदारों को धमकाने के साथ अपना नेटवर्क बनाने का काम कर रहे थे।
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पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि दोनों आरोपी करीब छह माह से अलग-अलग इलाकों में सक्रिय थे। कुछ दिनों तक एक जिले में गतिविधियां करने के बाद दूसरे जिले में चले जाने की बात दोनों ने बताई है। बहराइच में भी दोनों पिछले करीब एक सप्ताह से डेरा डाले हुए थे। पुलिस को उनकी गतिविधियों की जानकारी मिलने के बाद निगरानी बढ़ाई गई और दोनों पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
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गोपनीय रखी थी कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि कार्रवाई को गोपनीय रखा गया, ताकि आरोपियों को पुलिस की तैयारी की भनक न लग सके। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने अन्य जिलों में अपनी गतिविधियों और कुछ सहयोगियों के बारे में जानकारी दी है। इनमें कुछ लोग सीमा क्षेत्र में सक्रिय बताए जा रहे उनके नाम भी सामने आए हैं। पुलिस अब इन लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। एसपी ने बताया कि दोनों आरोपियों ने बहराइच के अलावा अन्य जिलों को भी निशाना बनाने की बात बताई है।