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राखी की मजबूत डोर से टूटी मजहब की दीवार
बहराइच / अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 29 Aug 2015 11:08 PM IST
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रक्षाबंधन पर्व पर 31 साल पूर्व स्नेह, समर्पण व निष्ठा की अटूट माला इस कदर पिरोई गई कि मजबह की सभी दरों-दीवारें टूट गईं और निजामुद्दीन व राम संवारी ने समाज में सांप्रदायिक सौहार्द व एकता की मिसाल कायम की।
उम्र के अंतिम पड़ाव में पहुंच चुकी रामसंवारी प्रत्येक रक्षाबंधन पर्व पर भाई निजामुद्दीन के कलाई पर राखी बांधने जरूर पहुंचती हैं। नगर के बाजदारीपुरा मोहल्ला निवासी निजामुद्दीन अख्तर पूर्व संक्रामक रोग अधिकारी हैं। वह कहते हैं कि रक्षाबंधन पर्व प्रेम, समर्पण, निष्ठा व संकल्प के जरिए हृदयों को बांधने का एक पाक पर्व है।
31 साल पहले कैसरगंज स्वास्थ्य केंद्र में तैनाती के दौरान घटित उस वाकये को याद कर कहते हैं कि स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात कैसरगंज निवासी महिला कार्यकर्त्री रामसंवारी सिंह ने रक्षाबंधन पर्व पर पत्नी रुकसना परवीन को भाभी व मुझे भाई के रूप में अपनाने के लिए रक्षा सूत्र बांधने का आग्रह किया।
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रामसंवारी के समर्पण, निष्ठा व लगाव को देखकर बस उसी दौरान दोनों धर्मों की मजहबी दीवारें धराशायी हो गईं। वह कहते हैं कि तब से शुरू हुआ यह पवित्र रिश्ता आज भी कायम है। वैवाहिक समारोह हो या अन्य मांगलिक कार्यक्रम, सभी में रामसंवारी सिंह बड़ी बहन का फर्ज निभाती हैं।
दोनों परिवारों के बीच खुदा ने अटूट रिश्ता कायम कर दिया है। आज भांजे विनय कुमार सिंह व भांजी पूनम सिंह और बेटे जियाउद्दीन खान व अजहरूद्दीन खान 31 साल पहले शुरू हुए नए रिश्ते की डोर को और मजबूत करने में जुटे हुए हैं।
रामसंवारी सिंह आज उम्र के अंतिम पड़ाव पर हैं। वह कहती हैं कि नौकरी के दौरान वे निजामुद्दीन के भीतर अपने भाई का अक्स देखती थीं। कहती हैं कि रक्षाबंधन पर्व के दिन चाहे जितनी बाधाएं आए भाई निजामुद्दीन के कलाई पर रेशम की अटूट डोर बांधने जरूर घर पहुंचती हूं।
निजामुद्दीन अख्तर हिंदू-मुसलिम के बीच चौड़ी होती खाई को लेकर बेहद चिंतित हैं, कहते हैं कि सभी धर्मों के व्यक्तियों को संकीर्ण मानसिकता त्यागकर सभी तीज-त्योहारों में इस तरह घुल जाना चाहिए, जैसे पानी पर लिखा गया कोई नाम। सभी धर्मों के लोगों को समाज में आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करनी चाहिए।
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उम्र के अंतिम पड़ाव में पहुंच चुकी रामसंवारी प्रत्येक रक्षाबंधन पर्व पर भाई निजामुद्दीन के कलाई पर राखी बांधने जरूर पहुंचती हैं। नगर के बाजदारीपुरा मोहल्ला निवासी निजामुद्दीन अख्तर पूर्व संक्रामक रोग अधिकारी हैं। वह कहते हैं कि रक्षाबंधन पर्व प्रेम, समर्पण, निष्ठा व संकल्प के जरिए हृदयों को बांधने का एक पाक पर्व है।
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31 साल पहले कैसरगंज स्वास्थ्य केंद्र में तैनाती के दौरान घटित उस वाकये को याद कर कहते हैं कि स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात कैसरगंज निवासी महिला कार्यकर्त्री रामसंवारी सिंह ने रक्षाबंधन पर्व पर पत्नी रुकसना परवीन को भाभी व मुझे भाई के रूप में अपनाने के लिए रक्षा सूत्र बांधने का आग्रह किया।
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रामसंवारी के समर्पण, निष्ठा व लगाव को देखकर बस उसी दौरान दोनों धर्मों की मजहबी दीवारें धराशायी हो गईं। वह कहते हैं कि तब से शुरू हुआ यह पवित्र रिश्ता आज भी कायम है। वैवाहिक समारोह हो या अन्य मांगलिक कार्यक्रम, सभी में रामसंवारी सिंह बड़ी बहन का फर्ज निभाती हैं।
दोनों परिवारों के बीच खुदा ने अटूट रिश्ता कायम कर दिया है। आज भांजे विनय कुमार सिंह व भांजी पूनम सिंह और बेटे जियाउद्दीन खान व अजहरूद्दीन खान 31 साल पहले शुरू हुए नए रिश्ते की डोर को और मजबूत करने में जुटे हुए हैं।
रामसंवारी सिंह आज उम्र के अंतिम पड़ाव पर हैं। वह कहती हैं कि नौकरी के दौरान वे निजामुद्दीन के भीतर अपने भाई का अक्स देखती थीं। कहती हैं कि रक्षाबंधन पर्व के दिन चाहे जितनी बाधाएं आए भाई निजामुद्दीन के कलाई पर रेशम की अटूट डोर बांधने जरूर घर पहुंचती हूं।
निजामुद्दीन अख्तर हिंदू-मुसलिम के बीच चौड़ी होती खाई को लेकर बेहद चिंतित हैं, कहते हैं कि सभी धर्मों के व्यक्तियों को संकीर्ण मानसिकता त्यागकर सभी तीज-त्योहारों में इस तरह घुल जाना चाहिए, जैसे पानी पर लिखा गया कोई नाम। सभी धर्मों के लोगों को समाज में आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करनी चाहिए।