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डीएफओ बहराइच के खिलाफ आरसी जारी
अमर उजाला/बहराइच
Updated Tue, 07 Feb 2017 10:42 PM IST
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भवनियापुर तिकुरी गांव निवासी तत्कालीन निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की वर्ष 2013 में श्रावस्ती में हुए सड़क हादसे में मौत हो गई थी। यह हादसा डीएफओ बहराइच की सरकारी जीप से हुआ था। इस मामले में निदेशक की पत्नी ने वाराणसी न्यायालय में वाद दायर किया था।
न्यायालय ने क्षतिपूर्ति का भुगतान करने का आदेश दिया, लेकिन डीएफओ कार्यालय की ओर से भुगतान नहीं किया गया। ऐसे में अब ब्याज सहित 44 लाख 14 हजार 126 रुपये वसूली के लिए डीएफओ बहराइच के नाम अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश वाराणसी ने आरसी जारी की है। डीएम बहराइच को पत्र भेजकर वसूली कराने के निर्देश दिए हैं।
रुपईडीहा थाना क्षेत्र के भवनियापुर तिकुरी गांव निवासी वरुण सिंह बिसेन ने डीएम अभय को पत्र देकर कहा है कि उनके पिता राजपाल सिंह वाराणसी के केडीपीजी कॉलेज सेवापुरी में प्रोफेसर के पद पर तैनात थे। सेवाकाल में ही तत्कालीन परिवहन मंत्री जगदंबिका पाल ने 1998 में उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में निदेशक के पद पर तैनाती दी थी। 18 अप्रैल 2013 को राजपाल कार्य के सिलसिले में श्रावस्ती गए थे। वहां पर प्रभागीय वनाधिकारी वन प्रभाग पूर्वी बहराइच की राजकीय जीप ने टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना में राजपाल की मौत हो गई थी।
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मामला कोतवाली भिनगा में दर्ज हुआ। इस मामले में वरुण की मां गीता सिंह ने अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश कक्ष संख्या प्रथम वाराणसी के न्यायालय पर मोटर दुर्घटना के तहत केस दायर किया और क्षतिपूर्ति की मांग की।
न्यायालय ने बीती 30 अगस्त को डीएफओ बहराइच को क्षतिपूर्ति के रूप में 35 लाख 60 हजार 520 रुपये भुगतान का आदेश दिया, लेकिन डीएफओ बहराइच चुप्पी साधे रहे। इस पर गीता ने पुन: कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया।
न्यायालय ने सुनवाई करते हुए बीते सोमवार को क्षतिपूर्ति की राशि में 8.53 लाख ब्याज को जोड़कर 44 लाख 14 हजार 126 रुपये भुगतान करने का निर्देश दिया है। इस मामले में राजस्व वसूली की तर्ज पर डीएफओ बहराइच से वसूली करने के लिए डीएम को वसूली पत्र भेजा है। उधर, राजपाल के पुत्र वरुण सिंह ने बताया कि शासन की ओर से उनके पिता को निदेशक के पद पर मनोनीत किया गया था। जबकि उनकी मूल तैनाती केडीपीजी कॉलेज में थी। दुर्घटना जब हुई, उसके छह माह बाद उनका रिटायरमेंट था।
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न्यायालय ने क्षतिपूर्ति का भुगतान करने का आदेश दिया, लेकिन डीएफओ कार्यालय की ओर से भुगतान नहीं किया गया। ऐसे में अब ब्याज सहित 44 लाख 14 हजार 126 रुपये वसूली के लिए डीएफओ बहराइच के नाम अपर जिला जज/विशेष न्यायाधीश वाराणसी ने आरसी जारी की है। डीएम बहराइच को पत्र भेजकर वसूली कराने के निर्देश दिए हैं।
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रुपईडीहा थाना क्षेत्र के भवनियापुर तिकुरी गांव निवासी वरुण सिंह बिसेन ने डीएम अभय को पत्र देकर कहा है कि उनके पिता राजपाल सिंह वाराणसी के केडीपीजी कॉलेज सेवापुरी में प्रोफेसर के पद पर तैनात थे। सेवाकाल में ही तत्कालीन परिवहन मंत्री जगदंबिका पाल ने 1998 में उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में निदेशक के पद पर तैनाती दी थी। 18 अप्रैल 2013 को राजपाल कार्य के सिलसिले में श्रावस्ती गए थे। वहां पर प्रभागीय वनाधिकारी वन प्रभाग पूर्वी बहराइच की राजकीय जीप ने टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना में राजपाल की मौत हो गई थी।
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मामला कोतवाली भिनगा में दर्ज हुआ। इस मामले में वरुण की मां गीता सिंह ने अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश कक्ष संख्या प्रथम वाराणसी के न्यायालय पर मोटर दुर्घटना के तहत केस दायर किया और क्षतिपूर्ति की मांग की।
न्यायालय ने बीती 30 अगस्त को डीएफओ बहराइच को क्षतिपूर्ति के रूप में 35 लाख 60 हजार 520 रुपये भुगतान का आदेश दिया, लेकिन डीएफओ बहराइच चुप्पी साधे रहे। इस पर गीता ने पुन: कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया।
न्यायालय ने सुनवाई करते हुए बीते सोमवार को क्षतिपूर्ति की राशि में 8.53 लाख ब्याज को जोड़कर 44 लाख 14 हजार 126 रुपये भुगतान करने का निर्देश दिया है। इस मामले में राजस्व वसूली की तर्ज पर डीएफओ बहराइच से वसूली करने के लिए डीएम को वसूली पत्र भेजा है। उधर, राजपाल के पुत्र वरुण सिंह ने बताया कि शासन की ओर से उनके पिता को निदेशक के पद पर मनोनीत किया गया था। जबकि उनकी मूल तैनाती केडीपीजी कॉलेज में थी। दुर्घटना जब हुई, उसके छह माह बाद उनका रिटायरमेंट था।