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Bahraich News: तीन घंटे तक थाने में रामगोपाल को पीटा, परिजनों को गाली दे भगाया
Sat, 28 Feb 2026 12:13 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sat, 28 Feb 2026 12:13 AM IST
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रामगांव थाने में पुलिस की पिटाई से हुई मौत के बाद बिलखते परिजन। -संवाद
बहराइच। पुलिस हिरासत में रामगोपाल की मौत ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया है। रामगोपाल के परिजनों का आरोप है कि उन्हें यह तक नहीं बताया गया कि आखिर किस मामले में गिरफ्तारी की गई है।
भतीजे आयुष श्रीवास्तव ने रोते हुए बताया कि परिवार के लोग जब जानकारी लेने थाने पहुंचे, तो उनसे अभद्रता की गई। दिव्यांग बड़े भाई को थानाध्यक्ष ने गाली देकर भगा दिया। अन्य परिजनों को लाठी लेकर दौड़ा लिया।
आयुष के अनुसार चाचा रामगोपाल को एक कमरे में बंदकर पीटा जा रहा था। कमरे के अंदर से उनकी चीख सुनाई दे रही थी। रात करीब नौ बजे पुलिस उनका शव घर के बाहर फेंक कर भाग गई। हमें न्याय चाहिए। पुलिस ने वसूली के लिए चाचा को मार डाला।
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कोतवाली देहात पुलिस करेगी विवेचना : सीओ पवन कुमार ने बताया कि मामले की निष्पक्ष विवेचना के लिए जांच थाना रामगांव से हटाकर कोतवाली देहात को स्थानांतरित कर दी गई है। इसमें जो भी दोषी होगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा। जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी शामिल किया जाएगा।
दो मुकदमे, कई सवाल : एक ओर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, दूसरी ओर आरोपी की थाने में हत्या। इन दोनों पहलुओं ने मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। पुलिस अधिकारी भी इन सवालों का जवाब देने से कतरा रहे हैं। वहीं, दोनों पक्ष के लोगों ने भी चुप्पी साध रखी है। कुछ ग्रामीण इसे रामगोपाल से मुकदमे के नाम पर वसूली से भी जोड़कर देख रहे हैं।
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तो सीसीटीवी से खुलेगा पुलिस की ज्यादती का राज
एडवोकेट विजय मिश्र के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि पुलिस थानों के मुख्य गेट, प्रवेश-निकास, लॉकअप, कॉरिडोर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। उनका डेटा सुरक्षित रखा जाए। ऐसे में अब देखना अहम होगा कि रामगांव थाने में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं या नहीं। अगर कैमरे लगे होंगे तो सारा मामला सामने आ जाएगा। कैमरे नहीं लगे होंगे तो यह कोर्ट की अवमानना का मामला बनेगा।
विजय मिश्र ने बताया कि अभी 20 फरवरी को ही इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव से कहा है कि वे राज्य के पुलिस थानों में सीसीटीवी सिस्टम के काम न करने की खुद जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें।
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...तो रामगोपाल की गिरफ्तारी के बाद दुष्कर्म की रिपोर्ट
रामगांव पुलिस ने रामगोपाल की मौत के मामले में किस तरह खेल खेला है, इसका अंदाजा पुलिस की कार्यशैली से लग रहा है। परिजनों के मुताबिक पुलिस ने रामगोपाल को 6:00 बजे के आसपास मेडिकल स्टोर से उठाया, इसके बाद थाने ले जाकर पूछताछ के बहाने पीटती रही। देर रात मौत के बाद शव को घर के सामने छोड़ दिया। पुलिस ने रामगोपाल पर जिस बालिका के पिता द्वारा दुष्कर्म का आरोप लगाने की बात कही है, उस मामले में बृहस्पतिवार रात 9:38 पर रिपोर्ट दर्ज की गई है, ऐसे में पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस ने खुद को बचाने के लिए रामगोपाल को दुष्कर्म का आरोपी भी बना दिया।
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डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम, हुई वीडियोग्राफी
डीएम अक्षय त्रिपाठी के निर्देश पर गठित दो डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच शव का पोस्टमार्टम किया। पैनल में डॉ. भानु प्रसाद जायसवाल और डॉ. राम किशोर राठौर शामिल रहे। इस दौरान मजिस्ट्रेट भी मौजूद रहे। हालांकि अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या आया है, इसका खुलासा नहीं हो सका है। परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी खेल की आशंका है। भतीजे ने कहा कि आरोपी पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी छेड़छाड़ की आशंका है। पुलिस कुछ भी कर सकती है।
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कौन देगा इन सवालों के जवाब ?
-दुष्कर्म की घटना 22 को हुई फिर 26 को तहरीर क्यों दी गई ?
-क्या रामगोपाल को ब्लैकमेल किया जा रहा था?
-क्या स्थानीय पुलिस भी ब्लैकमेलिंग में शामिल थी?
-क्या पीड़िता की मेडिकल जांच कराई गई?
-बिना कारण बताए रामगोपाल को क्यों गिरफ्तार किया गया?
-परिजनों को भी कारण न बताकर थाने से क्यों खदेड़ा गया?
-अगर तबीयत ही बिगड़ी तो रामगोपाल को अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया?
-उनका शव क्यों घर के बाहर फेंक कर भागे पुलिसकर्मी?
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...और यह है असलियत
भतीजे आयुष ने बताया कि चाचा रामगोपाल के मेडिकल स्टोर पर बुधवार को एक व्यक्ति ने आकर कई महंगी दवाएं उधार में मांगी, चाचा के इन्कार करने पर उसने काफी देर तक अपशब्दों का प्रयोग किया। देख लेने की धमकी देते हुए चला गया। बृहस्पतिवार शाम को पुलिस उन्हें जबरन पकड़कर ले गई। हत्या के बाद पुलिसकर्मी शव घर के बाहर फेंक कर भाग गए।
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भतीजे आयुष श्रीवास्तव ने रोते हुए बताया कि परिवार के लोग जब जानकारी लेने थाने पहुंचे, तो उनसे अभद्रता की गई। दिव्यांग बड़े भाई को थानाध्यक्ष ने गाली देकर भगा दिया। अन्य परिजनों को लाठी लेकर दौड़ा लिया।
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आयुष के अनुसार चाचा रामगोपाल को एक कमरे में बंदकर पीटा जा रहा था। कमरे के अंदर से उनकी चीख सुनाई दे रही थी। रात करीब नौ बजे पुलिस उनका शव घर के बाहर फेंक कर भाग गई। हमें न्याय चाहिए। पुलिस ने वसूली के लिए चाचा को मार डाला।
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कोतवाली देहात पुलिस करेगी विवेचना : सीओ पवन कुमार ने बताया कि मामले की निष्पक्ष विवेचना के लिए जांच थाना रामगांव से हटाकर कोतवाली देहात को स्थानांतरित कर दी गई है। इसमें जो भी दोषी होगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा। जांच में पोस्टमार्टम रिपोर्ट को भी शामिल किया जाएगा।
दो मुकदमे, कई सवाल : एक ओर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप, दूसरी ओर आरोपी की थाने में हत्या। इन दोनों पहलुओं ने मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है। पुलिस अधिकारी भी इन सवालों का जवाब देने से कतरा रहे हैं। वहीं, दोनों पक्ष के लोगों ने भी चुप्पी साध रखी है। कुछ ग्रामीण इसे रामगोपाल से मुकदमे के नाम पर वसूली से भी जोड़कर देख रहे हैं।
तो सीसीटीवी से खुलेगा पुलिस की ज्यादती का राज
एडवोकेट विजय मिश्र के अनुसार सुप्रीम कोर्ट का निर्देश है कि पुलिस थानों के मुख्य गेट, प्रवेश-निकास, लॉकअप, कॉरिडोर में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। उनका डेटा सुरक्षित रखा जाए। ऐसे में अब देखना अहम होगा कि रामगांव थाने में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं या नहीं। अगर कैमरे लगे होंगे तो सारा मामला सामने आ जाएगा। कैमरे नहीं लगे होंगे तो यह कोर्ट की अवमानना का मामला बनेगा।
विजय मिश्र ने बताया कि अभी 20 फरवरी को ही इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव से कहा है कि वे राज्य के पुलिस थानों में सीसीटीवी सिस्टम के काम न करने की खुद जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें।
...तो रामगोपाल की गिरफ्तारी के बाद दुष्कर्म की रिपोर्ट
रामगांव पुलिस ने रामगोपाल की मौत के मामले में किस तरह खेल खेला है, इसका अंदाजा पुलिस की कार्यशैली से लग रहा है। परिजनों के मुताबिक पुलिस ने रामगोपाल को 6:00 बजे के आसपास मेडिकल स्टोर से उठाया, इसके बाद थाने ले जाकर पूछताछ के बहाने पीटती रही। देर रात मौत के बाद शव को घर के सामने छोड़ दिया। पुलिस ने रामगोपाल पर जिस बालिका के पिता द्वारा दुष्कर्म का आरोप लगाने की बात कही है, उस मामले में बृहस्पतिवार रात 9:38 पर रिपोर्ट दर्ज की गई है, ऐसे में पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस ने खुद को बचाने के लिए रामगोपाल को दुष्कर्म का आरोपी भी बना दिया।
डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम, हुई वीडियोग्राफी
डीएम अक्षय त्रिपाठी के निर्देश पर गठित दो डॉक्टरों के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच शव का पोस्टमार्टम किया। पैनल में डॉ. भानु प्रसाद जायसवाल और डॉ. राम किशोर राठौर शामिल रहे। इस दौरान मजिस्ट्रेट भी मौजूद रहे। हालांकि अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या आया है, इसका खुलासा नहीं हो सका है। परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी खेल की आशंका है। भतीजे ने कहा कि आरोपी पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट से भी छेड़छाड़ की आशंका है। पुलिस कुछ भी कर सकती है।
कौन देगा इन सवालों के जवाब ?
-दुष्कर्म की घटना 22 को हुई फिर 26 को तहरीर क्यों दी गई ?
-क्या रामगोपाल को ब्लैकमेल किया जा रहा था?
-क्या स्थानीय पुलिस भी ब्लैकमेलिंग में शामिल थी?
-क्या पीड़िता की मेडिकल जांच कराई गई?
-बिना कारण बताए रामगोपाल को क्यों गिरफ्तार किया गया?
-परिजनों को भी कारण न बताकर थाने से क्यों खदेड़ा गया?
-अगर तबीयत ही बिगड़ी तो रामगोपाल को अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया?
-उनका शव क्यों घर के बाहर फेंक कर भागे पुलिसकर्मी?
...और यह है असलियत
भतीजे आयुष ने बताया कि चाचा रामगोपाल के मेडिकल स्टोर पर बुधवार को एक व्यक्ति ने आकर कई महंगी दवाएं उधार में मांगी, चाचा के इन्कार करने पर उसने काफी देर तक अपशब्दों का प्रयोग किया। देख लेने की धमकी देते हुए चला गया। बृहस्पतिवार शाम को पुलिस उन्हें जबरन पकड़कर ले गई। हत्या के बाद पुलिसकर्मी शव घर के बाहर फेंक कर भाग गए।