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मेडिकल कॉलेज में नहीं रेडियोलॉजिस्ट, मरीज परेशान
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बहराइच। महाराजा सुहेलदेव मेडिकल कॉलेज के निर्माण में करोड़ों रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन रेडियोलॉजी विभाग में इन दिनों अल्ट्रासाउंड की सुविधा मरीजों को नहीं मिल पा रही है। महिला अस्पताल में जहां रेडियोलॉजिस्ट ही नहीं है वहीं पुरुष अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट लंबे समय से छुट्टी पर चल रहे हैं। ऐसे में गरीब मरीजों के निजी पैथोलॉजी में जाकर सैकड़ों रुपये खर्च करना पड़ रहा है। नेता से लेकर अधिकारी तक इस समस्या का समाधान नहीं करा पा रहे हैं। अस्पताल की तरफ से एक दिन में 70 से 80 मरीजों को अल्ट्रासाउंड परीक्षण के लिए लिखा जा रहा है, जिसका पूरा फायदा निजी पैथोलॉजी वाले उठा रहे हैं।
महिला अस्पताल में तैनात रहे रेडियोलॉजिस्ट डॉ. के कुमार का स्थानांतरण तीन माह पहले चित्रकूट कर दिया गया था। इसके बाद से यहां पर गर्भवती महिलाओं को निजी पैथोलॉजी में जाकर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। इस पद के रिक्त हो जाने के बाद से आज तक यहां एक भी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी। एक आंकड़े के मुताबिक यहां पर प्रतिदिन 40 से 45 महिला मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा जा रहा है।
वहीं पुरुष अस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट वीके बैन 25 अक्तूबर से छुट्टी पर हैं। बताया जा रहा है कि वह बीमार हैं। ऐसी स्थिति में अस्पताल प्रशासन ने किसी वैकल्पिक रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था नहीं कर रखी है। यहां पर भी 30 से 35 मरीजों का अल्ट्रासाउंड परीक्षण प्रतिदिन लिखा जा रहा है। अस्पताल में व्यवस्था नहीं होने के कारण मजबूर होकर मरीज बाहर से जांच करवाने के लिए मजबूर हैं। बाहर से रिपोर्ट लाकर वह डॉक्टरों से दवा लिखवा रहे हैं। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. ओपी पांडेय ने बताया कि डॉ. वीके वैन संभवत: 12 नवंबर को ज्वॉइन कर सकते हैं। रही बात महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तो शासन को इस समस्या के बारे में अवगत कराया जा चुका है। जल्द ही कुछ निदान संभव है।
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महिला अस्पताल में तैनात रहे रेडियोलॉजिस्ट डॉ. के कुमार का स्थानांतरण तीन माह पहले चित्रकूट कर दिया गया था। इसके बाद से यहां पर गर्भवती महिलाओं को निजी पैथोलॉजी में जाकर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। इस पद के रिक्त हो जाने के बाद से आज तक यहां एक भी रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती नहीं हो सकी। एक आंकड़े के मुताबिक यहां पर प्रतिदिन 40 से 45 महिला मरीजों को अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा जा रहा है।
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वहीं पुरुष अस्पताल में तैनात रेडियोलॉजिस्ट वीके बैन 25 अक्तूबर से छुट्टी पर हैं। बताया जा रहा है कि वह बीमार हैं। ऐसी स्थिति में अस्पताल प्रशासन ने किसी वैकल्पिक रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था नहीं कर रखी है। यहां पर भी 30 से 35 मरीजों का अल्ट्रासाउंड परीक्षण प्रतिदिन लिखा जा रहा है। अस्पताल में व्यवस्था नहीं होने के कारण मजबूर होकर मरीज बाहर से जांच करवाने के लिए मजबूर हैं। बाहर से रिपोर्ट लाकर वह डॉक्टरों से दवा लिखवा रहे हैं। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. ओपी पांडेय ने बताया कि डॉ. वीके वैन संभवत: 12 नवंबर को ज्वॉइन कर सकते हैं। रही बात महिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट की तो शासन को इस समस्या के बारे में अवगत कराया जा चुका है। जल्द ही कुछ निदान संभव है।
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