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चुनावी हिंसा में हो चुकी एक की मौत
Updated Sun, 11 Oct 2015 10:26 PM IST
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लोकसभा, विधानसभा के बाद अब पंचायत चुनाव में बढ़ी बाहुबलियों की दखलंदाजी ने अमन पसंद लोगों के साथ पुलिस-प्रशासन की परेशानी में इजाफा कर दिया है। कैसरगंज में खूनी संघर्ष की घटना सामने है। इसके पूर्व भी तीन स्थानों पर मारपीट हुई थी। मतदान के दिन भी सात स्थानों पर मतदाताओं को अपने पक्ष में रिझाने के लिए प्रत्याशी और उनके समर्थकों में हाथापाई हुई। तीन स्थानों पर पथराव की घटनाएं हुईं।
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इन मामलों में केस दर्ज नहीं हुए लेकिन प्रत्याशी और उनके समर्थकों की यह उग्रता पुलिस प्रशासन के लिए मुश्किल का सबब जरूर बनी। जिले में चार चरणों में पंचायत चुनाव हो रहे है। प्रथम चरण की शुरुआत 28 सितंबर से हुई थी। नामांकन प्रक्रिया के साथ ही चुनाव मैदान में ताल ठोंक रहे प्रत्याशी और उनके समर्थक अपने विपक्षियों को सबक सिखाने में लग गए हैं।
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पुलिस ने चुनावी संघर्ष पर अंकुश के लिए 32 हजार 904 लोगों को अमनचैन में खलल डालने के मामले में पाबंद भी किया। इसके बावजूद कैसरगंज के रसूलाबाद गांव में तीन अक्तूबर को चुनाव लड़ रहे दो पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए थे। जमकर असलहों का प्रदर्शन हुआ था।
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फायरिंग में गुल्ले सिंह नामक ग्रामीण की मौत हो गई थी। जबकि दोनों पक्ष के 11 लोग घायल हुए थे। इसके पूर्व रामगांव और हुजूरपुर क्षेत्र में चुनावी रंजिश में तीन स्थानों पर मारपीट हुई थी। लाठी-डंडे चले थे। पुलिस ने उसे पुरानी रंजिश बताकर किनारा कस लिया था।
इसका नतीजा यह हुआ कि प्रथम चरण के मतदान के दिन रामगांव थाना क्षेत्र के सरपतहा में दो पक्षों में पथराव हुआ। रमपुरवा में जिला पंचायत सदस्य के दो पक्षों में हाथापाई के दौरान पुलिस ने लाठियां भांजी। तीन लोग घायल हुए। गोपचंदपुर में दो पक्षों में झड़प हुई थी।
तिवारीपुरवा में प्रत्याशी समर्थकों में झड़प के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग किया था। इसमें सात लोगों को चोटें आईं थी। शिवपुर के टिकानपुरवा में जिला पंचायत सदस्य के समर्थकों के बीच पथराव होने से छह लोग घायल हुए थे। यह मामले पुलिस डायरी में दर्ज नहीं हुए लेकिन पुलिस प्रशासन हलाकान जरूर रहा।