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Bahraich News: बच्चे के लिए तेंदुए से भिड़ गई मां पर नहीं बचा सकी जान

Wed, 09 Sep 2026 12:34 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 09 Sep 2026 12:34 AM IST
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Mother fought a leopard to save her child but could not save its life.
तेंदुए के हमले में जान गंवाने वाला मासूम व गमजदा परिवार।
बिछिया। कतर्नियाघाट रेंज की बड़खड़िया ग्राम पंचायत के आनंदनगर गांव में सोमवार रात तेंदुए के हमले में नौ साल के बालक राजवीर की मौत से गांव में गम और खौफ का माहौल है। देररात करीब 9:30 बजे मां के साथ हैंडपंप पर पानी पीने निकले मासूम पर तेंदुआ झपटा था। बेटे को बचाने के लिए मां ने करीब दो मिनट तक तेंदुए से संघर्ष कर अपने लाल को तो छुड़ा लिया, लेकिन उसकी जान नहीं बचा सकी।
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गांव निवासी कंसीला की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। पति की करीब तीन साल पहले पेड़ से गिरकर मौत हो गई थी। वह पांच छोटे बच्चों के साथ घर रह रही थी। परिवार का पेट पालने के लिए वह मजदूरी करती है। आर्थिक तंगी के कारण सोमवार रात घर में खाना नहीं बना था। शाम को मजदूरी कर लौटी कंसीला बच्चों के लिए बाजार से तीन समोसे ले आई थी। पांचों बच्चे आपस में समोसे के बंटवारे को लेकर जिद कर रहे थे। मां ने किसी तरह तीनों समोसे आधे-आधे बांटकर बच्चों को दिए। राजवीर समोसा खाकर आंगन में लगे हैंडपंप पर मां के साथ पानी पीने पहुंचा। इसी दौरान अंधेरे में छिपे तेंदुए ने उस पर झपट्टा मार दिया। कंसीला शोर मचाते हुए तेंदुए से भिड़ गई। करीब दो मिनट के संघर्ष के बाद उसने राजवीर को तेंदुए से छुड़ा लिया, लेकिन वह गंभीर रूप से जख्मी हो गया था।
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एंबुलेंस को फोन नहीं लगा तो पड़ोसी कार से लेकर दौड़ा
बच्चे के गले और गर्दन से खून बहता देख पड़ोसी समाजसेवी महिपाल यादव और अन्य ग्रामीण मदद के लिए पहुंचे। एंबुलेंस को फोन किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद महिपाल अपनी कार से राजवीर को लेकर पीएचसी सुजौली पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया, लेकिन राजवीर की जान नहीं बचाई जा सकी।
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एक रात पहले बकरी को बनाया था निवाला
ग्रामीणों के मुताबिक, तेंदुए की गांव में आवाजाही लगातार बनी हुई थी। घटना से एक दिन पहले रविवार रात तेंदुआ पड़ोसी बलबीर के घर में घुसकर एक बकरी का शिकार कर चुका था। इसके बाद वह सोमवार रात फिर आबादी के बीच पहुंच गया और उसने राजवीर पर हमला कर दिया।
बिजली रहती तो शायद बच जाता बच्चा
घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। उनका कहना है कि बिजली गुल होने के कारण पूरा गांव अंधेरे में डूबा था। अगर उस समय रोशनी होती तो आंगन में छिपे तेंदुए का पता चल सकता था और शायद राजवीर की जान बच जाती। ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए रात में बिजली कटौती का विरोध किया। वन विभाग से तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाने तथा प्रभावित स्थानों पर सोलर लाइट लगाने की मांग की।

मां को दी 10 हजार रुपये की सहायता
डीएफओ अपूर्व दीक्षित ने बताया कि मंगलवार सुबह गांव पहुंचे वन क्षेत्राधिकारी आशीष गौड़ ने मृतक की मां कंसीला को आर्थिक सहायता के रूप में 10 हजार रुपये दिए हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की सुरक्षा और सतर्कता के लिए वन विभाग की टीम गांव में तैनात की गई है, पिंजरा लगाने की तैयारी की जा रही है।

तेंदुए के हमले में जान गंवाने वाला मासूम व गमजदा परिवार।

तेंदुए के हमले में जान गंवाने वाला मासूम व गमजदा परिवार।

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