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किसानों का हितैषी हो विधायक
अमर उजाला/बहराइच
Updated Sun, 12 Feb 2017 11:53 PM IST
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अमर उजाला के कार्यक्रम में जुटे किसान
- फोटो : अमर उजाला
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अमर उजाला के वोटर अड्डा में किसानों ने बेबाकी से नेता कैसा हो मुद्दे पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उपेक्षा व बदहाली के दर्द से कराह रहे किसानों ने कहा कि जिनके दम पर प्रत्याशी चुनाव जीतकर सदन पहुंचता है, वही चुनाव जीतने के बाद जनता को भुला देता है और जनता पांच साल तक पछताती है। ऐसे में यदि इस बार चूक गए तो फिर पांच साल तक पछताना पड़ेगा। वर्तमान में काश्तकार शांत जरूर हैं, लेकिन अधिकारों के प्रति पहले से ज्यादा सजग हैं।
सभी ने एक स्वर में कहा कि जिस प्रत्याशी या पार्टी के एजेंडे में भूमि अधिग्रहण, किसानों की हो रही निरंतर आत्महत्या, खाद, बीज, बिजली, पानी और गन्ना भुगतान की समस्या के निराकरण की बात होगी, किसानों का वोट उसी को मिलेगा। प्रत्याशी का ईमानदार, कर्मठ व सर्वसुलभ होना भी जरूरी है।
कैसरगंज में शनिवार को स्टेट बैंक के पास अपराजिता सामाजिक समिति के परिसर में वोटर अड्डा में किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विधानसभा चुनाव में नेता चयन को लेकर बेबाकी से अपना पक्ष रखा। इस दौरान क्षेत्र के विकास के साथ खाद, बिजली, पानी, सिंचाई, सड़क, शिक्षा व स्वास्थ्य की बदहाली पर आवाज प्रमुखता से उठाई गई। सभी ने किसान हित में कठोर नीति लागू करने की वकालत की।
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बोले कि जिस तरह से सरकारें किसानों की उपज का दाम निर्धारित करती हैं, वह गलत है। दाम निर्धारण में किसानों की सहमति लेनी चाहिए। नेता ऐसा हो जो किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम दिलाए। गन्ना बकाया भुगतान का मुद्दा भी कार्यक्रम में उठाया गया। सभी ने कहा कि प्रदेश व केंद्र सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है। सभी राजनीतिक दल समृद्ध यूपी की तस्वीर बनाने के लिए किसानों की आर्थिक सेहत सुधारने की बात कहते है, लेकिन यूपी की सत्ता हासिल होने के बाद मुद्दे सत्ता के गलियारों में मौन हो जाते हैं।
पिछले चुनाव में भी प्रत्याशियों ने जोर-शोर से किसानों की समस्याओं को निपटाने के लिए खूब वादे किए, लेकिन जीतने के बाद भूल गए। किसानों को राजनीतिक दलों ने हमेशा वोट कार्ड के रूप में इस्तेमाल किया है, लेकिन अब यह नहीं चलने वाला। सभी ने एक स्वर में कहा कि सदन को जाने वाले नेता के चुनाव में समाज के हर वर्ग के साथ किसानों व मजदूरों को भी आगे आना होगा, ताकि वोटिंग प्रतिशत बढ़ सके।
सभी का मानना है कि प्रत्याशी शिक्षित हो, उसे क्षेत्र की समस्याओं के प्रति गहरी समझ हो, संवेदनशील होना अनिवार्य है। जनता व सरकार के बीच पुल का काम करे। सदन के कार्यों की जानकारी रखता हो। कुछ ने कहा कि नेताओं के लोकलुभावन वादों को नकार जर्जर सड़कों, ध्वस्त बिजली व्यवस्था समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे पर वोट किया जाए।
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सभी ने एक स्वर में कहा कि जिस प्रत्याशी या पार्टी के एजेंडे में भूमि अधिग्रहण, किसानों की हो रही निरंतर आत्महत्या, खाद, बीज, बिजली, पानी और गन्ना भुगतान की समस्या के निराकरण की बात होगी, किसानों का वोट उसी को मिलेगा। प्रत्याशी का ईमानदार, कर्मठ व सर्वसुलभ होना भी जरूरी है।
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कैसरगंज में शनिवार को स्टेट बैंक के पास अपराजिता सामाजिक समिति के परिसर में वोटर अड्डा में किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। विधानसभा चुनाव में नेता चयन को लेकर बेबाकी से अपना पक्ष रखा। इस दौरान क्षेत्र के विकास के साथ खाद, बिजली, पानी, सिंचाई, सड़क, शिक्षा व स्वास्थ्य की बदहाली पर आवाज प्रमुखता से उठाई गई। सभी ने किसान हित में कठोर नीति लागू करने की वकालत की।
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बोले कि जिस तरह से सरकारें किसानों की उपज का दाम निर्धारित करती हैं, वह गलत है। दाम निर्धारण में किसानों की सहमति लेनी चाहिए। नेता ऐसा हो जो किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम दिलाए। गन्ना बकाया भुगतान का मुद्दा भी कार्यक्रम में उठाया गया। सभी ने कहा कि प्रदेश व केंद्र सरकार किसानों की समस्याओं के प्रति गंभीर नहीं है। सभी राजनीतिक दल समृद्ध यूपी की तस्वीर बनाने के लिए किसानों की आर्थिक सेहत सुधारने की बात कहते है, लेकिन यूपी की सत्ता हासिल होने के बाद मुद्दे सत्ता के गलियारों में मौन हो जाते हैं।
पिछले चुनाव में भी प्रत्याशियों ने जोर-शोर से किसानों की समस्याओं को निपटाने के लिए खूब वादे किए, लेकिन जीतने के बाद भूल गए। किसानों को राजनीतिक दलों ने हमेशा वोट कार्ड के रूप में इस्तेमाल किया है, लेकिन अब यह नहीं चलने वाला। सभी ने एक स्वर में कहा कि सदन को जाने वाले नेता के चुनाव में समाज के हर वर्ग के साथ किसानों व मजदूरों को भी आगे आना होगा, ताकि वोटिंग प्रतिशत बढ़ सके।
सभी का मानना है कि प्रत्याशी शिक्षित हो, उसे क्षेत्र की समस्याओं के प्रति गहरी समझ हो, संवेदनशील होना अनिवार्य है। जनता व सरकार के बीच पुल का काम करे। सदन के कार्यों की जानकारी रखता हो। कुछ ने कहा कि नेताओं के लोकलुभावन वादों को नकार जर्जर सड़कों, ध्वस्त बिजली व्यवस्था समेत अन्य बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे पर वोट किया जाए।