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उर्रा में लगेगा दुग्ध प्लांट
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मिहींपुरवा के उर्रा में दुग्ध प्लांट की स्थापना के लिए सर्वे कर रहे अधिकारी।
- फोटो : BAHRAICH
उर्रा (बहराइच)। जंगली इलाकों में श्वेत क्रांति लाने के उद्देश्य से उर्रा बाजार में दुग्ध प्लांट की स्थापना की जाएगी। इसके लिए अधिकारियों की टीम ने कस्बे का दौरा कर स्थान का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से वार्ता की। इसके बाद सर्वे रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है।
दुग्ध प्लांट की स्थापना होने से क्षेत्र के 10 गांवों के किसानों व पशुपालकों को फायदा होगा। अधिकारियों के मुताबिक लगभग 10 सोसायटी का गठन किया जाएगा। क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के मौके भी पैदा होंगे। युवा क्षेत्र में मिल्क पार्लर की स्थापना कर दुग्ध निर्मित उत्पादों की बिक्री कर व्यवसाय भी कर सकेंगे।
मिहींपुरवा विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत उर्रा की आबादी लगभग 14 हजार है। गांव कस्बे के रूप में विकसित है, लेकिन व्यवस्थाएं नहीं हैं। यहां पर दूध के लिए लोगों को दूसरे शहर व कस्बों का चक्कर लगाना पड़ता है। इस पर बाजार निवासी एडवोकेट रवि अग्रवाल ने शासन को पत्र भेजकर गांव में दुग्ध प्लांट की स्थापना की मांग की थी।
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शासन के निर्देश पर दुग्ध विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू कर दी है। दुग्ध विकास अधिकारी नाथू सिंह ने बताया कि दुग्धशाला विकास विभाग गोंडा के जीएम एस जयश्रीलाल, विष्णु कुमार, रामजीत, क्षेत्र पर्यवेक्षक गुरुप्रताप, बाबादीन, हरिकेश की अगुवाई में टीम ने उर्रा गांव पहुंचकर क्षेत्र का सर्वे किया है।
दुग्ध विकास अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों की टीम ने सर्वे रिपोर्ट शासन को भेज दी है। कस्बा होने के कारण यहां पर दुग्ध प्लांट की स्थापना की जाएगी। इससे लोगों को दुग्ध के साथ उससे निर्मित वस्तुओं की खरीदारी में आसानी होगी। साथ ही प्लांट की स्थापना से लगभग 10 गांव के किसानों व पशुपालकों को लाभ होगा। इससे क्षेत्र के मधवापुर, अमृतपुर पुरैना, हरखापुर, सेमरी घटही, गंगापुर, सेमरीमलमला, कठौतिया, कुट्टी, दुर्गागौढ़ी, पचासा समेत 10 गांवों के किसानों को लाभ होगा।
एक सोसायटी पर खर्च होंगे 69 हजार रुपये
जिला दुग्ध विकास अधिकारी ने बताया कि प्लांट की स्थापना से चार से 10 सोसायटी का गठन किया जाएगा। यह ग्रामीण परिवेश के लिए किया जाएगा। एक सोसायटी पर 69 हजार रुपये खर्च आएगा। सोसायटी का गठन होने से दूध बिक्री व कलेक्शन में इसके सदस्यों को लाभ होगा।
क्षेत्र के पशुपालक एक जगह दे सकेंगे दूध
जिला दुग्ध विकास अधिकारी ने बताया कि दुग्ध प्लांट की स्थापना से क्षेत्र के पशुपालकों का दूध एक साथ खरीदा जा सकेगा। इसके बाद उन्हें बाजार दर पर भुगतान कराया जाएगा। इससे पशुपालक व किसान दूध बेचकर जीविकोपार्जन कर सकते हैं। अन्य लोगों को भी रोजगार से जोड़ सकेंगे।
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दुग्ध प्लांट की स्थापना होने से क्षेत्र के 10 गांवों के किसानों व पशुपालकों को फायदा होगा। अधिकारियों के मुताबिक लगभग 10 सोसायटी का गठन किया जाएगा। क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के मौके भी पैदा होंगे। युवा क्षेत्र में मिल्क पार्लर की स्थापना कर दुग्ध निर्मित उत्पादों की बिक्री कर व्यवसाय भी कर सकेंगे।
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मिहींपुरवा विकास खंड अंतर्गत ग्राम पंचायत उर्रा की आबादी लगभग 14 हजार है। गांव कस्बे के रूप में विकसित है, लेकिन व्यवस्थाएं नहीं हैं। यहां पर दूध के लिए लोगों को दूसरे शहर व कस्बों का चक्कर लगाना पड़ता है। इस पर बाजार निवासी एडवोकेट रवि अग्रवाल ने शासन को पत्र भेजकर गांव में दुग्ध प्लांट की स्थापना की मांग की थी।
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शासन के निर्देश पर दुग्ध विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू कर दी है। दुग्ध विकास अधिकारी नाथू सिंह ने बताया कि दुग्धशाला विकास विभाग गोंडा के जीएम एस जयश्रीलाल, विष्णु कुमार, रामजीत, क्षेत्र पर्यवेक्षक गुरुप्रताप, बाबादीन, हरिकेश की अगुवाई में टीम ने उर्रा गांव पहुंचकर क्षेत्र का सर्वे किया है।
दुग्ध विकास अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों की टीम ने सर्वे रिपोर्ट शासन को भेज दी है। कस्बा होने के कारण यहां पर दुग्ध प्लांट की स्थापना की जाएगी। इससे लोगों को दुग्ध के साथ उससे निर्मित वस्तुओं की खरीदारी में आसानी होगी। साथ ही प्लांट की स्थापना से लगभग 10 गांव के किसानों व पशुपालकों को लाभ होगा। इससे क्षेत्र के मधवापुर, अमृतपुर पुरैना, हरखापुर, सेमरी घटही, गंगापुर, सेमरीमलमला, कठौतिया, कुट्टी, दुर्गागौढ़ी, पचासा समेत 10 गांवों के किसानों को लाभ होगा।
एक सोसायटी पर खर्च होंगे 69 हजार रुपये
जिला दुग्ध विकास अधिकारी ने बताया कि प्लांट की स्थापना से चार से 10 सोसायटी का गठन किया जाएगा। यह ग्रामीण परिवेश के लिए किया जाएगा। एक सोसायटी पर 69 हजार रुपये खर्च आएगा। सोसायटी का गठन होने से दूध बिक्री व कलेक्शन में इसके सदस्यों को लाभ होगा।
क्षेत्र के पशुपालक एक जगह दे सकेंगे दूध
जिला दुग्ध विकास अधिकारी ने बताया कि दुग्ध प्लांट की स्थापना से क्षेत्र के पशुपालकों का दूध एक साथ खरीदा जा सकेगा। इसके बाद उन्हें बाजार दर पर भुगतान कराया जाएगा। इससे पशुपालक व किसान दूध बेचकर जीविकोपार्जन कर सकते हैं। अन्य लोगों को भी रोजगार से जोड़ सकेंगे।