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दवा दुकानों पर ताले, एक करोड़ का कारोबार ठप
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 14 Oct 2015 10:16 PM IST
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बहराइच। फार्मासिस्ट की अनिवार्यता व ऑनलाइन दवा कारोबार की प्रस्तावित योजना के विरोध में बुधवार को दवा कारोबारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। शहर से लेकर कस्बों तक 1700 दवा दुकानें बंद रहीं। इससे पूरे जिले में एक करोड़ रुपये के दवा कारोबार पर असर पड़ा है।
वहीं, मरीजों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने पीएम मोदी, खाद्य एवं औषधि महकमे के कमिश्नर व सीएम अखिलेश यादव को ज्ञापन भेजा है।
फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने इस हड़ताल का विरोध करते हुए कारोबारियों पर जनता को गुमराह करने का आरोप मढ़ा है। हालांकि, इस दौरान जिला अस्पताल और प्राइवेट अस्पतालों में दवा मुहैया होने से थोड़ी राहत जरूर मिली।
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गौरतलब है कि जिले में दवा की कुल 1700 दुकानें हैं। इनमें 1100 फुटकर और 600 थोक विक्रेता हैं। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर दवा कारोबारियों ने बुधवार को बंदी का एलान किया था।
इस क्रम में बुधवार को शहर मुख्यालय समेत तहसील व कस्बों में स्थित फुटकर व थोक दवा की दुकानें बंद रहीं। शहर के अस्पताल चौराहा, पानी टंकी चौराहा, छावनी बाजार व कैसरगंज, महसी, पयागपुर, मिहींपुरवा आदि ग्रामीण क्षेत्रों में भी हड़ताल का असर दिखा।
सुबह शहर के कारोबारी छावनी बाजार में इकट्ठा हुए। यहां से केंद्र सरकार के खिलाफ कारोबारियों ने जुलूस निकाला। यह जुलूस अग्रसेन चौक, डिगिहा तिराहा, अस्पताल चौराहा, पानी टंकी चौराहा होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचा। यहां कारोबारियों ने फार्मासिस्ट की अनिवार्यता को समाप्त किए जाने व ई फार्मेसी के विरोध में नारे लगाए।
मीडिया प्रभारी नितिन बंसल ने कहा कि ऑनलाइन फार्मेसी का विचार, स्वीकार नहीं है। ऑनलाइन व्यवस्था से नशाखोरी बढ़ेगी, वहीं मरीजों के स्वास्थ्य व दवा की गुणवत्ता से खिलवाड़ की भी संभावना बढ़ जाएगी।
जिलाध्यक्ष शीतल प्रसाद अग्रवाल ने मरीजों को हुई परेशानी पर खेद प्रकट करते हुए बताया कि हड़ताल से बहराइच शहर में करीब करीब 40 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
वहीं, पूरे जिले में एक करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। अंत में डीएम के माध्यम से पीएम मोदी, ड्रग कमिश्नर हर्षदीप आमले व सीएम अखिलेश यादव को ज्ञापन भेजा गया। प्रदर्शन के दौरान कैलाश नाथ गोयल, हरचरण सिंह, अख्तर अली मेकरानी, राजेश गोयल, अभिनव गुप्ता, ओंकारनाथ गुप्ता, रोशन अग्रवाल, नितिन बंसलसमेत कई दवा व्यापारी मौजूद थे।
बंदी का असर नानपारा, महसी, कैसरगंज, नवाबगंज, जरवल, रिसिया, रुपईडीहा, मिहींपुरवा, नवाबगंज कस्बो समेत पूरे जिले में दिखा। उर्रा में अलीशेर खान की अगुवाई में दवा व्यवसायियों ने जुलूस निकाला। उनके साथ फिरोज खान, शैलेंद्र श्रीवास्तव, बुद्घीलाल मौर्य आदि मौजूद रहे।
हड़ताल से भटकते रहे मरीज
इकौना निवासी शिवाकांत तिवारी ने कहा कि हड़ताल की सूचना नहीं थी। सोचा था कि निजी चिकित्सक से इलाज कराऊंगा लेकिन मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण जिला अस्पताल आना पड़ा है।
धौली गांव निवासी पवन ने कहा कि दवा न मिलने के कारण कठिनाई हुई है। सरकारी दवाओं पर भरोसा जताना पड़ा है। दरगाह निवासी नीरज पटवा ने कहा कि मेडिकल स्टोर बंद होने से दवा नहीं मिली है। अब गुरुवार को दवा खरीदूंगा। काजी कटरा निवासी शुभम ने बताया कि इलाज के लिए अस्पताल आना पड़ा है।
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वहीं, मरीजों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने पीएम मोदी, खाद्य एवं औषधि महकमे के कमिश्नर व सीएम अखिलेश यादव को ज्ञापन भेजा है।
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फार्मासिस्ट एसोसिएशन ने इस हड़ताल का विरोध करते हुए कारोबारियों पर जनता को गुमराह करने का आरोप मढ़ा है। हालांकि, इस दौरान जिला अस्पताल और प्राइवेट अस्पतालों में दवा मुहैया होने से थोड़ी राहत जरूर मिली।
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गौरतलब है कि जिले में दवा की कुल 1700 दुकानें हैं। इनमें 1100 फुटकर और 600 थोक विक्रेता हैं। केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन उत्तर प्रदेश के आह्वान पर दवा कारोबारियों ने बुधवार को बंदी का एलान किया था।
इस क्रम में बुधवार को शहर मुख्यालय समेत तहसील व कस्बों में स्थित फुटकर व थोक दवा की दुकानें बंद रहीं। शहर के अस्पताल चौराहा, पानी टंकी चौराहा, छावनी बाजार व कैसरगंज, महसी, पयागपुर, मिहींपुरवा आदि ग्रामीण क्षेत्रों में भी हड़ताल का असर दिखा।
सुबह शहर के कारोबारी छावनी बाजार में इकट्ठा हुए। यहां से केंद्र सरकार के खिलाफ कारोबारियों ने जुलूस निकाला। यह जुलूस अग्रसेन चौक, डिगिहा तिराहा, अस्पताल चौराहा, पानी टंकी चौराहा होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचा। यहां कारोबारियों ने फार्मासिस्ट की अनिवार्यता को समाप्त किए जाने व ई फार्मेसी के विरोध में नारे लगाए।
मीडिया प्रभारी नितिन बंसल ने कहा कि ऑनलाइन फार्मेसी का विचार, स्वीकार नहीं है। ऑनलाइन व्यवस्था से नशाखोरी बढ़ेगी, वहीं मरीजों के स्वास्थ्य व दवा की गुणवत्ता से खिलवाड़ की भी संभावना बढ़ जाएगी।
जिलाध्यक्ष शीतल प्रसाद अग्रवाल ने मरीजों को हुई परेशानी पर खेद प्रकट करते हुए बताया कि हड़ताल से बहराइच शहर में करीब करीब 40 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
वहीं, पूरे जिले में एक करोड़ का कारोबार प्रभावित हुआ है। अंत में डीएम के माध्यम से पीएम मोदी, ड्रग कमिश्नर हर्षदीप आमले व सीएम अखिलेश यादव को ज्ञापन भेजा गया। प्रदर्शन के दौरान कैलाश नाथ गोयल, हरचरण सिंह, अख्तर अली मेकरानी, राजेश गोयल, अभिनव गुप्ता, ओंकारनाथ गुप्ता, रोशन अग्रवाल, नितिन बंसलसमेत कई दवा व्यापारी मौजूद थे।
बंदी का असर नानपारा, महसी, कैसरगंज, नवाबगंज, जरवल, रिसिया, रुपईडीहा, मिहींपुरवा, नवाबगंज कस्बो समेत पूरे जिले में दिखा। उर्रा में अलीशेर खान की अगुवाई में दवा व्यवसायियों ने जुलूस निकाला। उनके साथ फिरोज खान, शैलेंद्र श्रीवास्तव, बुद्घीलाल मौर्य आदि मौजूद रहे।
हड़ताल से भटकते रहे मरीज
इकौना निवासी शिवाकांत तिवारी ने कहा कि हड़ताल की सूचना नहीं थी। सोचा था कि निजी चिकित्सक से इलाज कराऊंगा लेकिन मेडिकल स्टोर बंद होने के कारण जिला अस्पताल आना पड़ा है।
धौली गांव निवासी पवन ने कहा कि दवा न मिलने के कारण कठिनाई हुई है। सरकारी दवाओं पर भरोसा जताना पड़ा है। दरगाह निवासी नीरज पटवा ने कहा कि मेडिकल स्टोर बंद होने से दवा नहीं मिली है। अब गुरुवार को दवा खरीदूंगा। काजी कटरा निवासी शुभम ने बताया कि इलाज के लिए अस्पताल आना पड़ा है।