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दो शावकों के साथ गांव के पास घूम रहा तेंदुआ

Sun, 12 Feb 2017 11:34 PM IST
अमर उजाला/बहराइच
अमर उजाला/बहराइच Updated Sun, 12 Feb 2017 11:34 PM IST
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Leopard wandering near the village with two cubs
कांबिंग करती वन विभाग की टीम - फोटो : अमर उजाला
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मोतीपुर रेंज अंतर्गत दौलतपुर गांव के आसपास पांच दिनों से दहाड़ से लोगों की नींद हराम है। वन विभाग की टीम ने 24 घंटे कांबिग की तो पता चला कि मादा तेंदुआ दो शावकों के साथ गांव के पास खेतों में है। मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों ने पदचिन्ह का बारीकी से अध्ययन किया तो पद चिन्ह मादा तेंदुए के साथ दो शावकों के भी मिले। वन विभाग ने ग्रामीणों को सजग रहने के साथ सुरक्षा और बढ़ा दी है। 
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के मोतीपुर रेंज अंतर्गत दौलतपुर महेशपुरवा गांव और जंगल के बीच गन्ने, अरहर, मक्का आदि के खेत हैं। इन खेतों में पांच दिन से तेंदुआ दहाड़ रहा है। दो दिन पूर्व ग्रामीणों का तेंदुए से आमना-सामना भी हुआ। गांव के लोग बाल-बाल बचे।
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शनिवार से वन विभाग की टीमें कांबिंग कर रही हैं। इसी बीच रविवार सुबह तेंदुआ अपने एक शावक के साथ सुबह खेत में ग्रामीणों को दिखायी पड़ा। इस पर सूचना कांबिंग टीम को दी गई। वन क्षेत्राधिकारी खुर्शीद आलम टीम के साथ मौके पर पहुंचे तो पदचिन्हों का अध्ययन करने पर पता चला कि मादा तेंदुआ एक नहीं दो शावकों के साथ गांव और जंगल के बीच खेत में भटक रही है।
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वन विभाग और ग्रामीणों का शोर सुनकर तेंदुए के खेत में छिपने का अनुमान लगाया गया। कुछ दूर तक खेतों में कांबिंग भी की गई। लेकिन पुन: मादा तेंदुआ और शावक नहीं दिखे। वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि टीमों को नियमित गश्त जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। वन दरोगा परिक्रमादीन, वन्यजीव रक्षक मुकुटमणि पांडेय, त्रिवेणी, रामकुमार के साथ पीआरडी जवान गश्त कर रहे हैं।

24 घंटे इंतजार किया जाएगा। इसके बाद पिंजरा लगाकर तेंदुआ और उसके शावकों को पकड़ने की कोशिश होगी। उधर, तेंदुआ और उसके शावकों को जंगल की ओर भेजने के लिए गश्ती वनकर्मियों की टीम निरंतर हांका लगाते हुए गोले पटाखे दाग रही है। 


वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि मादा तेंदुए के साथ जो शावकों के पदचिन्ह मिले हैं। उससे अनुमान है कि शावकों की उम्र पांच से छह माह के आसपास है। उनकी सुरक्षा के लिए मादा तेंदुआ खेत से बाहर निकल रही है। ऐसे में ग्रामीणों को सजगता बरतने की जरूरत है। वहीं, डीएफओ जीपी सिंह ने बताया कि बाघ और तेंदुआ अक्सर अपने शावकाें की सुरक्षा के लिए ही हमलावर होते हैं।
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