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घाघरा में कट गया कोरिनपुरवा
अमर उजाला/बहराइच
Updated Thu, 20 Jul 2017 11:34 PM IST
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कटान करती नदी
- फोटो : अमर उजाला
घाघरा नदी के जलस्तर में बुधवार की रात से फिर कमी शुरू हो गई। पानी कम होने के साथ ही कटान तेज हो गई है। नदी ने कटान करते हुए गुरुवार को गोलागंज ग्राम पंचायत के कोरिनपुरवा गांव को लील लिया। गांव में बचे हुए चार मकान भी नदी में समाहित हो गए। इसके अलावा 40 बीघा कृषि योग्य भूमि भी नदी में कट गई। ग्रामीणों ने कटान की सूचना उपजिलाधिकारी को दी, लेकिन कोई भी राजस्वकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा। वहीं कटान तेज होने से तटीय क्षेत्र के लोगों में दहशत है।
घाघरा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है। केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर गुरुवार को 105.866 मीटर मापा गया। मापक ने बताया कि नदी का पानी रात से एक सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से कम हो रहा है। इसके चलते नदी खतरे के निशान 106.07 से 21 सेंटीमीटर नीचे पहुंच चुकी है। जलस्तर में कमी के साथ ही महसी क्षेत्र में कटान तेज हो गई है।
गोलागंज ग्राम पंचायत के मजरा कोरिनपुरवा में कटान के चलते सिर्फ टेढ़े, जगजोत, चतुरी और सोहनलाल के मकान बचे थे। नदी की लहरों ने कटान करते हुए गुरुवार भोर में चारों ग्रामीणों के मकानों को लील लिया। इसके साथ ही कोरिनपुरवा गांव का अस्तित्व खत्म हो गया। इस गांव में 12 मकान थे। शेष मकान पहले ही नदी में समा चुके हैं। अब नदी के निशाने पर प्रधानपुरवा गांव आ गया है, जिसके चलते इस गांव के ग्रामीण अपने पक्के मकानों पर हथौड़ी चला रहे हैं।
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मकान की ईंटें उजाड़कर गृहस्थी के साथ सभी पलायन कर रहे हैं। अफरा-तफरी की स्थिति है। लेकिन राहत और बचाव के उपाय पूरी तरह नाकाफी हैं। कोरिनपुरवा का अस्तित्व खत्म होने के साथ ही गोलागंज, चुरईपुरवा, कहारनपुरवा और प्रधानपुरवा गांव के निकट खेती योग्य जमीनें भी तेजी से कट रही हैं। रात से अब तक 40 बीघा खेत नदी में समाहित हुआ है।
अपर जिलाधिकारी एसके राय ने गुरुवार को नाव से घाघरा नदी के मुहाने पर बसे गांव का भ्रमण किया और कटान की स्थिति देखी। अपर जिलाधिकारी ने कहा कि नदी का जलस्तर तेजी से कम हो रहा है, जिसके चलते कटान हो रही है। जिन लोगों के मकान और खेत नदी में समाहित हो रहे हैं। उन सभी का ब्यौरा क्षेत्रीय लेखपालाें से तलब किया गया है। कटान पीड़ित ग्रामीणों को बसाने के इंतजाम हो रहे हैं। वहीं, कटान रोकने के लिए पुन: सरयू ड्रेनेज खंड के अभियंताओं को पत्र लिखा गया है।
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घाघरा नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का दौर चल रहा है। केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक सुशील कुमार शुक्ला ने बताया कि एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जलस्तर गुरुवार को 105.866 मीटर मापा गया। मापक ने बताया कि नदी का पानी रात से एक सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से कम हो रहा है। इसके चलते नदी खतरे के निशान 106.07 से 21 सेंटीमीटर नीचे पहुंच चुकी है। जलस्तर में कमी के साथ ही महसी क्षेत्र में कटान तेज हो गई है।
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गोलागंज ग्राम पंचायत के मजरा कोरिनपुरवा में कटान के चलते सिर्फ टेढ़े, जगजोत, चतुरी और सोहनलाल के मकान बचे थे। नदी की लहरों ने कटान करते हुए गुरुवार भोर में चारों ग्रामीणों के मकानों को लील लिया। इसके साथ ही कोरिनपुरवा गांव का अस्तित्व खत्म हो गया। इस गांव में 12 मकान थे। शेष मकान पहले ही नदी में समा चुके हैं। अब नदी के निशाने पर प्रधानपुरवा गांव आ गया है, जिसके चलते इस गांव के ग्रामीण अपने पक्के मकानों पर हथौड़ी चला रहे हैं।
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मकान की ईंटें उजाड़कर गृहस्थी के साथ सभी पलायन कर रहे हैं। अफरा-तफरी की स्थिति है। लेकिन राहत और बचाव के उपाय पूरी तरह नाकाफी हैं। कोरिनपुरवा का अस्तित्व खत्म होने के साथ ही गोलागंज, चुरईपुरवा, कहारनपुरवा और प्रधानपुरवा गांव के निकट खेती योग्य जमीनें भी तेजी से कट रही हैं। रात से अब तक 40 बीघा खेत नदी में समाहित हुआ है।
अपर जिलाधिकारी एसके राय ने गुरुवार को नाव से घाघरा नदी के मुहाने पर बसे गांव का भ्रमण किया और कटान की स्थिति देखी। अपर जिलाधिकारी ने कहा कि नदी का जलस्तर तेजी से कम हो रहा है, जिसके चलते कटान हो रही है। जिन लोगों के मकान और खेत नदी में समाहित हो रहे हैं। उन सभी का ब्यौरा क्षेत्रीय लेखपालाें से तलब किया गया है। कटान पीड़ित ग्रामीणों को बसाने के इंतजाम हो रहे हैं। वहीं, कटान रोकने के लिए पुन: सरयू ड्रेनेज खंड के अभियंताओं को पत्र लिखा गया है।