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अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह का आयोजन
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बहराइच के सेनानी भवन सभागार में आयोजित गोष्ठी व सम्मान समारोह में मौजूद कवि।
- फोटो : BAHRAICH
बहराइच। राष्ट्रीय कवि संगम संस्था के तत्वावधान में हिंदी दिवस पखवाड़ा के तहत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी सभागार में अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें नेपाल व जिले के कवियों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर हिंदी को आगे ले जाने पर जोर दिया।
हिंदी पखवाड़ा के तहत अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह का आयोजन वरिष्ठ साहित्यकार शिव कुमार सिंह रैकवार की अध्यक्षता में हुआ। मुख्य अतिथि शिवकुमार व्यास प्रभारी पूर्वी उत्तर प्रदेश व विशिष्ट अतिथि डॉ. देवेंद्र उपाध्याय रहे। मंच का संचालन कवि राघवेंद्रनाथ त्रिपाठी ने किया।
कार्यक्रम में कवि देशराज सिंह आजाद ने पढ़ा, त्याग व बलिदान की कहानी गर पढ़ना, सीमाओं पे खून के निशान जाके पढ़ लो। कवि शिवकुमार व्यास ने पढ़ा, आजादी मिल गई किंतु आंगन में थी दीवार मिली, हिंदू-मुस्लिम के हाथों में तनी हुई तलवार मिली।
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कवि पीके प्रचंड ने पढ़ा, बिना हिंदी के अब मेरी कलम चलती नहीं, हमारी लेखनी संडे को भी रविवार लिखती है। सम्मेलन में नेपाल से आए कवि विष्णुलाल कुमाल ने देश में हो रहे हिंदी के विकास व हिंदी भाषा साहित्य पर विस्तृत चर्चा की।
इस मौके पर अवधी संस्कृत प्रतिष्ठान केंद्रीय कार्य समिति नेपालगंज बांके के अध्यक्ष विष्णु लाल कुमाल, जहीरुल हक जीनू, संतोषी सिंह, अल्पना वैश्य, कृष्णा पांडेय, घनश्याम, राघवेंद्र त्रिपाठी, छोटेलाल माटी, रईस सिद्दीकी, तिलकराम अजनबी, तमन्ना बहराइची, नीलम, रश्मि प्रभाकर, महेश्वरबक्श सिंह, प्रमोद वर्मा साधक आदि को सम्मानित किया गया।
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हिंदी पखवाड़ा के तहत अंतरराष्ट्रीय कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह का आयोजन वरिष्ठ साहित्यकार शिव कुमार सिंह रैकवार की अध्यक्षता में हुआ। मुख्य अतिथि शिवकुमार व्यास प्रभारी पूर्वी उत्तर प्रदेश व विशिष्ट अतिथि डॉ. देवेंद्र उपाध्याय रहे। मंच का संचालन कवि राघवेंद्रनाथ त्रिपाठी ने किया।
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कार्यक्रम में कवि देशराज सिंह आजाद ने पढ़ा, त्याग व बलिदान की कहानी गर पढ़ना, सीमाओं पे खून के निशान जाके पढ़ लो। कवि शिवकुमार व्यास ने पढ़ा, आजादी मिल गई किंतु आंगन में थी दीवार मिली, हिंदू-मुस्लिम के हाथों में तनी हुई तलवार मिली।
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कवि पीके प्रचंड ने पढ़ा, बिना हिंदी के अब मेरी कलम चलती नहीं, हमारी लेखनी संडे को भी रविवार लिखती है। सम्मेलन में नेपाल से आए कवि विष्णुलाल कुमाल ने देश में हो रहे हिंदी के विकास व हिंदी भाषा साहित्य पर विस्तृत चर्चा की।
इस मौके पर अवधी संस्कृत प्रतिष्ठान केंद्रीय कार्य समिति नेपालगंज बांके के अध्यक्ष विष्णु लाल कुमाल, जहीरुल हक जीनू, संतोषी सिंह, अल्पना वैश्य, कृष्णा पांडेय, घनश्याम, राघवेंद्र त्रिपाठी, छोटेलाल माटी, रईस सिद्दीकी, तिलकराम अजनबी, तमन्ना बहराइची, नीलम, रश्मि प्रभाकर, महेश्वरबक्श सिंह, प्रमोद वर्मा साधक आदि को सम्मानित किया गया।