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Bahraich News: मुफलिसी की कैद से मानवता ने दिलाई आजादी
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बहराइच। छह वर्ष की सजा पूरी कर चुके एक निर्धन बंदी के लिए आखिरकार सोमवार को आजादी का रास्ता खुल गया। महज 22 हजार रुपये के जुर्माने की रकम जमा न कर पाने के कारण वह जेल से रिहा नहीं हो पा रहा था। मामला कारागार अधीक्षक के संज्ञान में आने पर उनके व्यक्तिगत प्रयास से अपराधनिक समिति ने आगे बढ़कर पूरी धनराशि न्यायालय में जमा कराई। रसीद मिलने के बाद बंदी को सोमवार को जिला कारागार से रिहा कर दिया गया।
जिला कारागार में निरुद्ध थाना पयागपुर के कल्लूपुरवा निवासी हनुमान प्रसाद चौरसिया को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-द्वितीय) ने धारा 308, 323, 324 और 325 आईपीसी के एक मामले में छह वर्ष के सश्रम कारावास तथा 22 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। न्यायालय ने अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में 70 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतने का भी आदेश दिया था।
बंदी आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर होने के कारण जुर्माने की राशि जमा नहीं कर सका। परिणामस्वरूप छह वर्ष की सजा पूरी होने के बावजूद उसकी रिहाई संभव नहीं हो पा रही थी। यह जानकारी मिलने पर जिला कारागार अधीक्षक राजीव कुमार सिंह ने मानवीय पहल करते हुए 29 जून को अपराधनिक समिति के पदाधिकारियों से संपर्क कर पूरे मामले से अवगत कराया।
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समिति ने तत्परता दिखाते हुए 22 हजार रुपये की धनराशि न्यायालय में जमा कराई। जुर्माने की रसीद कारागार प्रशासन को उपलब्ध होने के बाद बंदी की रिहाई की सभी औपचारिकताएं पूरी कर उसे सोमवार को जेल से मुक्त कर दिया गया।
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जिला कारागार में निरुद्ध थाना पयागपुर के कल्लूपुरवा निवासी हनुमान प्रसाद चौरसिया को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफटीसी-द्वितीय) ने धारा 308, 323, 324 और 325 आईपीसी के एक मामले में छह वर्ष के सश्रम कारावास तथा 22 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। न्यायालय ने अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में 70 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतने का भी आदेश दिया था।
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बंदी आर्थिक रूप से अत्यंत कमजोर होने के कारण जुर्माने की राशि जमा नहीं कर सका। परिणामस्वरूप छह वर्ष की सजा पूरी होने के बावजूद उसकी रिहाई संभव नहीं हो पा रही थी। यह जानकारी मिलने पर जिला कारागार अधीक्षक राजीव कुमार सिंह ने मानवीय पहल करते हुए 29 जून को अपराधनिक समिति के पदाधिकारियों से संपर्क कर पूरे मामले से अवगत कराया।
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समिति ने तत्परता दिखाते हुए 22 हजार रुपये की धनराशि न्यायालय में जमा कराई। जुर्माने की रसीद कारागार प्रशासन को उपलब्ध होने के बाद बंदी की रिहाई की सभी औपचारिकताएं पूरी कर उसे सोमवार को जेल से मुक्त कर दिया गया।