{"_id":"6ab17b2dddf227da4a055e16","slug":"havoc-caused-by-riverbank-erosion-in-bansgarhi-30-bighas-of-land-swallowed-by-the-saryu-bahraich-news-c-98-1-bhr1024-157205-2026-09-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bahraich News: बांसगढ़ी में कटान का कहर, 30 बीघा जमीन सरयू में समाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bahraich News: बांसगढ़ी में कटान का कहर, 30 बीघा जमीन सरयू में समाई
विज्ञापन
महसी के बांसगढ़ी में कटान कर रही सरयू नदी।
बहराइच। सरयू नदी का जलस्तर तेजी से घटने के साथ अब कटान का कहर बढ़ गया है। महसी तहसील के बांसगढ़ी गांव के पास रविवार शाम से कटान बढ़ने के कारण बीते 24 घंटे में आठ किसानों की करीब 30 बीघा कृषि योग्य जमीन नदी में समा गई। इसमें करीब 12 बीघा में धान की फसल खड़ी थी, जो नदी की धारा में समाहित हो गई। अचानक कटान बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
एल्गिन ब्रिज पर सोमवार शाम चार बजे सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 77 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया। नदी में पानी का डिस्चार्ज भी घटकर 1.31 लाख क्यूसेक रह गया। जलस्तर कम होने से बाढ़ का खतरा कम हुआ है, लेकिन कटान ने किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है।
बांसगढ़ी गांव में जगदंबा, रामप्रताप, कन्हैया, तीरथ समेत आठ किसानों की जमीन कटान की चपेट में है। ग्रामीणों के अनुसार पहले रुक-रुक कर कटान हो रही थी, लेकिन अब बांसगढ़ी के पास नदी की धार तेजी से जमीन काट रही है। उनका कहना है कि कटान रोकने के लिए अभी तक कोई ठोस उपाय नहीं किया गया है। उधर मिहींपुरवा के संपतपुरवा, धर्मपुर रेतिया और रामपुर रेतिया गांवों में भी रुक-रुककर कृषि भूमि नदी में समाहित हो रही है।
विज्ञापन
कटान की सूचना मिलने पर तहसीलदार विपिन चौरसिया ने लेखपाल आनंद अवस्थी को मौके पर भेजा। लेखपाल ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की और कटान की स्थिति देखी। तहसीलदार ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
एल्गिन ब्रिज पर सोमवार शाम चार बजे सरयू का जलस्तर खतरे के निशान से 77 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया। नदी में पानी का डिस्चार्ज भी घटकर 1.31 लाख क्यूसेक रह गया। जलस्तर कम होने से बाढ़ का खतरा कम हुआ है, लेकिन कटान ने किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है।
विज्ञापन
बांसगढ़ी गांव में जगदंबा, रामप्रताप, कन्हैया, तीरथ समेत आठ किसानों की जमीन कटान की चपेट में है। ग्रामीणों के अनुसार पहले रुक-रुक कर कटान हो रही थी, लेकिन अब बांसगढ़ी के पास नदी की धार तेजी से जमीन काट रही है। उनका कहना है कि कटान रोकने के लिए अभी तक कोई ठोस उपाय नहीं किया गया है। उधर मिहींपुरवा के संपतपुरवा, धर्मपुर रेतिया और रामपुर रेतिया गांवों में भी रुक-रुककर कृषि भूमि नदी में समाहित हो रही है।
विज्ञापन
कटान की सूचना मिलने पर तहसीलदार विपिन चौरसिया ने लेखपाल आनंद अवस्थी को मौके पर भेजा। लेखपाल ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की और कटान की स्थिति देखी। तहसीलदार ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर प्रभावित ग्रामीणों को मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।