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कटान तेज, नदी मेें समाए छह मकान
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महसी तहसील के टिकुरी आरसीसी मार्ग पर कटान करती घाघरा नदी।
- फोटो : BAHRAICH
महसी (बहराइच)। बढ़ रहे जलस्तर के साथ घाघरा (सरयू) नदी ने कटान भी तेज कर दी है। कटान तेज होने से टिकुरी गांव में छह ग्रामीणों के मकान नदी में समा गए। साथ ही गांव में पानी को रोकने वाला सीसी रोड भी कटान की जद में आ गया है। वहीं तीन वर्ष पूर्व मकान का निर्माण करवाने वाले ग्रामीण अपने हाथों से ही अपने आशियाने तोड़ रहे हैं। गृहस्थी ले जाने के लिए उनके पास संसाधन नहीं हैं। सोमवार को अपर जिलाधिकारी व एसडीएम ने कटान का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए।
महसी तहसील में स्थित घाघरा नदी ने कटान तेज कर दी है। कटान के चलते तहसील क्षेत्र के टिकुरी गांव निवासी छैलू, कृष्णालाल, हरेराम और मंशा, राखन, विश्राम के मकान नदी मेें समा गए। इससे ग्रामीणों में हड़कंप मचा है। वहीं तीन साल पूर्व बने पक्के मकान को संतोषी यादव व मुंशीराम अपने हाथों से अपना ही मकान तोड़ रहे हैं। दोनों नदी के तट पर बैठे रो रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि मजदूरी करने के बाद धीरे-धीरे मकान का निर्माण कराया था। घाघरा नदी की धारा में एक चौथाई भाग समाहित हो गया है।
मजबूरी में ईंट बचाने के लिए मकान तोड़ रहे हैं। संतोषी ने बताया कि मेरे पास संसाधन भी नहीं है कि ईंटा व अन्य सामान को सुरक्षित स्थान की ओर ले जाएं। परिवार को रिश्तेदार के यहां छोड़ आए हैं। वहीं नदी की विनाश लीला जारी है। टिकुरी के नईबस्ती में 100 परिवार से अधिक लोग निवास करते हैं। टिकुरी में बना सीसी रोड भी नदी की धारा से कट रही है। यह मार्ग तेज धारा रोकने का काम करती है। इस सड़क से पानी टकराकर बैक रोलिंग करता है। लेकिन तेज कटान के कारण लोगों में भय व्याप्त है।
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सोमवार को कटान का जायजा लेने अपर जिलाधिकारी जयचंद्र पांडेय, एसडीएम एसएन त्रिपाठी और तहसीलदार राजेश वर्मा निरीक्षण करने पहुंचे। कटान पीड़ितों से वार्ता की। क्षेत्र का जायजा लेते हुए मदद का आश्वासन दिया। लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने के निर्देश दिए। एडीएम ने बताया कि विस्थापितों को पुन: स्थापित करने के लिए पिपरा पिपरी ग्राम पंचायत में भूमि चिन्हित की गई है। वहीं बसाया जाएगा।
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महसी तहसील में स्थित घाघरा नदी ने कटान तेज कर दी है। कटान के चलते तहसील क्षेत्र के टिकुरी गांव निवासी छैलू, कृष्णालाल, हरेराम और मंशा, राखन, विश्राम के मकान नदी मेें समा गए। इससे ग्रामीणों में हड़कंप मचा है। वहीं तीन साल पूर्व बने पक्के मकान को संतोषी यादव व मुंशीराम अपने हाथों से अपना ही मकान तोड़ रहे हैं। दोनों नदी के तट पर बैठे रो रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि मजदूरी करने के बाद धीरे-धीरे मकान का निर्माण कराया था। घाघरा नदी की धारा में एक चौथाई भाग समाहित हो गया है।
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मजबूरी में ईंट बचाने के लिए मकान तोड़ रहे हैं। संतोषी ने बताया कि मेरे पास संसाधन भी नहीं है कि ईंटा व अन्य सामान को सुरक्षित स्थान की ओर ले जाएं। परिवार को रिश्तेदार के यहां छोड़ आए हैं। वहीं नदी की विनाश लीला जारी है। टिकुरी के नईबस्ती में 100 परिवार से अधिक लोग निवास करते हैं। टिकुरी में बना सीसी रोड भी नदी की धारा से कट रही है। यह मार्ग तेज धारा रोकने का काम करती है। इस सड़क से पानी टकराकर बैक रोलिंग करता है। लेकिन तेज कटान के कारण लोगों में भय व्याप्त है।
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सोमवार को कटान का जायजा लेने अपर जिलाधिकारी जयचंद्र पांडेय, एसडीएम एसएन त्रिपाठी और तहसीलदार राजेश वर्मा निरीक्षण करने पहुंचे। कटान पीड़ितों से वार्ता की। क्षेत्र का जायजा लेते हुए मदद का आश्वासन दिया। लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने के निर्देश दिए। एडीएम ने बताया कि विस्थापितों को पुन: स्थापित करने के लिए पिपरा पिपरी ग्राम पंचायत में भूमि चिन्हित की गई है। वहीं बसाया जाएगा।