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आईपीएल व पारले मिल को सात करोड़ का पैकेज
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Sat, 11 Jul 2015 10:48 PM IST
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बहराइच। शुगर इंडस्ट्री पर केंद्र व प्रदेश सरकार दोनों मेहरबान हैं। बहराइच की आईपीएल व पारले शुगर मिल को सात करोड़ का पैकेज थमाया है।
वो इसलिए क्योंकि दोनों मिलों ने 15 जुलाई के भीतर समस्त बकाया चुकता कर दिया है। शासन ने मिल प्रबंधक व जिला गन्ना अधिकारी के संयुुक्त बैंक खाते में धनराशि भेज दी है।
लेकिन अफसोस किसान आज भी अपने गन्ने का दाम पाने के लिए तरस रहा है। साफ जाहिर है कि चीनी उद्योग को संकट में बताकर रियायत पाने का खेल खेला जा रहा है।
प्रदेश सरकार ने आईपीएल व पारले परसेंडी मिल को 8.60 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रतिपूर्ति राशि का तोहफा दिया है।
बहराइच सिंभावली शुगर मिल चिलवरिया, इंडियन पोटॉश लिमिटेड शुगर मिल जरवलरोड, पारलेजी मिल परसेंडी व श्रावस्ती सहकारी मिल नानपारा हैं।
वर्ष 2014-15 पेराई सत्र में गन्ना किसान लागत बढ़ने की दुहाई देते हुए गन्ने का दाम 340 रुपये किए जाने की मांग कर रहे थे लेकिन किसानों की हितैषी कहलाने वाली प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2012-13 का ही गन्ना मूल्य 280 रुपये प्रति क्विंटल बरकरार रखा।
जबकि, मिल प्रबंधन को बकाया मूल्य के भुगतान में सहूलियत दिया कि वे 260 रुपये प्रथम किस्त व 20 रुपये का अंतर मूल्य बाद में भुगतान करें। इसके बाद भी मिलों ने खूब खेल किया।
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पेराई सत्र समाप्त हो गया लेकिन जिले की सभी मिलों ने अभी तक भुगतान नहीं किया है। आज भी करीब सिंभावली शुगर मिल चिलवरिया व श्रावस्ती सहकारी मिल नानपारा 93 करोड़ 48 लाख रुपये बकाया है।
जबकि किसान सट्टा नीति के अनुसार 14 दिनों के भीतर बकाया भुगतान पाने के अधिकारी थे।
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वो इसलिए क्योंकि दोनों मिलों ने 15 जुलाई के भीतर समस्त बकाया चुकता कर दिया है। शासन ने मिल प्रबंधक व जिला गन्ना अधिकारी के संयुुक्त बैंक खाते में धनराशि भेज दी है।
लेकिन अफसोस किसान आज भी अपने गन्ने का दाम पाने के लिए तरस रहा है। साफ जाहिर है कि चीनी उद्योग को संकट में बताकर रियायत पाने का खेल खेला जा रहा है।
प्रदेश सरकार ने आईपीएल व पारले परसेंडी मिल को 8.60 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रतिपूर्ति राशि का तोहफा दिया है।
बहराइच सिंभावली शुगर मिल चिलवरिया, इंडियन पोटॉश लिमिटेड शुगर मिल जरवलरोड, पारलेजी मिल परसेंडी व श्रावस्ती सहकारी मिल नानपारा हैं।
वर्ष 2014-15 पेराई सत्र में गन्ना किसान लागत बढ़ने की दुहाई देते हुए गन्ने का दाम 340 रुपये किए जाने की मांग कर रहे थे लेकिन किसानों की हितैषी कहलाने वाली प्रदेश सरकार ने पेराई सत्र 2012-13 का ही गन्ना मूल्य 280 रुपये प्रति क्विंटल बरकरार रखा।
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जबकि, मिल प्रबंधन को बकाया मूल्य के भुगतान में सहूलियत दिया कि वे 260 रुपये प्रथम किस्त व 20 रुपये का अंतर मूल्य बाद में भुगतान करें। इसके बाद भी मिलों ने खूब खेल किया।
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पेराई सत्र समाप्त हो गया लेकिन जिले की सभी मिलों ने अभी तक भुगतान नहीं किया है। आज भी करीब सिंभावली शुगर मिल चिलवरिया व श्रावस्ती सहकारी मिल नानपारा 93 करोड़ 48 लाख रुपये बकाया है।
जबकि किसान सट्टा नीति के अनुसार 14 दिनों के भीतर बकाया भुगतान पाने के अधिकारी थे।