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किसान को मृत दिखाकर जमीन की वरासत कराई

Sun, 03 Jan 2021 10:44 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jan 2021 10:44 PM IST
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fraud
बहराइच। नयापुरवा गांव निवासी एक किसान को कुछ लोगों ने लेखपाल से सांठगांठ कर अभिलेखों में मृत दिखा दिया। इसके बाद दूसरे लोगों को उसका बेटा बनाकर उनके नाम जमीन की वरासत दर्ज करा दी। बाद में जमीन को तीन लाख रुपये में बेच दिया गया। जालसाजी का पता चलने पर किसान ने कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया। कोर्ट के आदेश पर लेखपाल व अधिवक्ता समेत छह लोगों के खिलाफ कोतवाली नानपारा में मुकदमा दर्ज किया गया है।
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मोतीपुर थाना अंतर्गत ग्राम नयापुरवा परवानी गौढ़ी निवासी बहोरी लाल वर्मा की जमीन गांव में ही है। उसकी लगभग 855 वर्ग फुट जमीन पर मिहींपुरवा निवासी मदन बिहारी की नजर थी। पीड़ित का आरोप है कि मदन बिहारी ने लेखपाल शंभु कुमार और अधिवक्ता मदन कुमार के साथ मिलकर अभिलेखों में उसे मृत दिखा दिया।
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फिर 16 जुलाई 2016 को मदन बिहारी ने स्वयं व अपने भाई भरतलाल को बहोरी लाल वर्मा का बेटा बताकर जमीन की वरासत करा ली। बाद में पुरैना रघुनाथपुर निवासी रामविलास के नाम पर तीन लाख रुपये में कोतवाली नानपारा के रजिस्ट्री कार्यालय में जमीन का बैनामा भी कर दिया।
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वरासत की जानकारी होने पर बहोरी लाल वर्मा ने अधिकारियों को शिकायती पत्र दिया। जिसके आधार पर तहसीलदार नानपारा ने वर्ष 2019 में वरासत को निरस्त कर दिया। जबकि इसके पहले ही जमीन का बैनामा कर दिया गया था। इसकी जानकारी होने पर बहोरी लाल ने अधिकारियों को फिर शिकायती पत्र दिया। मगर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस पर उसने कोर्ट में प्रार्थनापत्र दिया।
सीजेएम नवनीत कुमार भारती के आदेश पर कोतवाली नानपारा की पुलिस ने लेखपाल शंभु कुमार, अधिवक्ता मदन कुमार, मदन बिहारी, रामविलास, श्रीलाल गौतम व परशुराम के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया है। प्रभारी निरीक्षक हर्षवर्धन सिंह ने बताया कि केस दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है।
बहोरी लाल वर्मा की जमीन का जालसाजी कर बैनामा कराया गया था। वर्ष 2016 में ही वरासत हो गई थी। जिसके बाद से वह लगातार अधिकारियों के चक्कर लगा रहा था। मृत दिखाए जाने के बाद खुद को जिंदा साबित करने के लिए बहोरी लाल चार साल तक जद्दोजहद करता रहा। इसके बाद उसे कोर्ट के आदेश पर न्याय मिल सका।

कोतवाली में दी गई तहरीर में बहोरी लाल ने बताया है कि उसे वरासत की जानकारी बाद में हो गई थी। मगर जमीन के बैनामा के बारे में कोई सूचना नहीं थी। इसकी जानकारी उसे वर्ष 2020 में हुई। जब वह अभिलेख व बैनामा की नकल लेकर आरोपियों के पास पहुंचा, तो उसे जान-माल की धमकी देते हुए भगा दिया गया।
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