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बुखार व डायरिया से पांच बच्चों की मौत
अमर उजाला/बहराइच
Updated Sun, 26 Mar 2017 11:34 PM IST
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जिला अस्पताल में भर्तीं बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
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तराई में मौसम परिवर्तन के बीच बुखार व डायरिया का कहर शुरू हो गया है। रविवार को इलाज के दौरान बुखार व डायरिया से पीड़ित पांच मासूमों की मौत हो गई। इनमें चार मरीज जिला अस्पताल में भर्ती थे। वहीं, जिला अस्पताल में विभिन्न संक्रामक रोगों से पीड़ित 20 और मरीज भर्ती हुए हैं। इनमें चार की हालत नाजुक बताई जा रही है।
तराई में मौसम पल-पल बदल रहा है। गर्मी बढ़ने लगी है। सूरज की तपिश के बीच संक्रामक रोगों का प्रकोप भी शुरू हो गया है। स्थिति यह है कि बीते दिनों की अपेक्षा प्रतिदिन रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। सबसे अधिक डायरिया और बुखार कहर बरपाने लगा है।
फखरपुर क्षेत्र के अकबरपुर गांव निवासी अंकुश (2) पुत्र राधेश्याम को दो दिन पूर्व बुखार के साथ उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। परिवारीजनों ने गांवों में इलाज कराया, लेकिन लाभ न होने पर शनिवार को जिला अस्पताल में भर्ती किया। यहां पर इलाज के दौरान रविवार को सुबह अंकुश ने दम तोड़ दिया।
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वहीं, हरदी के पचदेवरी गांव निवासी रंजीत (ढाई) पुत्र राजेंद्र व नानपारा के मेहरबान नगर निवासी वैष्णवी (5) पुत्री भोला को भी बुखार और उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। परिवारीजनों ने जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड आईसीयू में भर्ती कराया था, लेकिन इलाज के दौरान रविवार को दोपहर में दोनों मासूमों ने दम तोड़ दिया।
उधर, दरगाह क्षेत्र के गुलाम अलीपुरा निवासी रियासत खान की पत्नी बिट्टी ने बेटी को जन्म दिया। लेकिन जन्म के कुछ देर बाद उसकी हालत बिगड़ गई। चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू हुआ, लेकिन कुछ देर बाद मासूम ने दम तोड़ दिया।
वहीं, महसी के बंधा निवासी तुलसी की एक वर्षीय बेटी को भी उल्टी-दस्त की शिकायत पर स्थानीय चिकित्सकों के यहां पहुंचाया गया। इलाज के दौरान हालत बिगड़ने पर निजी चिकित्सक ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही मासूम की मौत हो गई। उधर, जिला अस्पताल में विभिन्न संक्रामक रोगों से ग्रसित और 20 रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें शुभम (3), रजिया (2), शिवांशु (6) और प्रदीप (एक) की हालत गंभीर बताई जा रही है।
इंसेट
डायरिया व बुखार के लक्षण-
- बुखार के साथ बदहजमी की शिकायत होना।
- भूख न लगना, मिचली आना।
- मिचली के साथ पतली दस्त की शिकायत होना।
-कभी-कभी उल्टी दस्त की एक साथ समस्या होना
इंसेट
बचाव के उपाय
- डायरिया होने की दशा में शिकंजी का घोल निरंतर पिलाएं।
- डायरिया के साथ बुखार होने पर माथे पर पानी की भीगी पट्टी रखें।
- तली-भुनी चीजों से पूरी तरह परहेज करें।
- बासी खाना या नाश्ते का प्रयोग न करें।
- योग्य चिकित्सक से इलाज कराएं
कोट
काफी गंभीर हालत में आए थे रोगी
बुखार और डायरिया से ग्रसित जिन रोगियों की जिला अस्पताल में मौत हुई है। उन सभी का इलाज परिवारीजनों ने स्थानीय स्तर पर पहले चिकित्सकों से करवाया। हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया। सभी की स्थिति काफी गंभीर थी। बेहतर इलाज कर जिंदगी बचाने की कोशिश की गई। लेकिन पहले ही हालत इतनी गंभीर हो चुकी थी कि सुधार नहीं हुआ।
डॉ. डीके सिंह, मुख्य चिकित्साधीक्षक
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तराई में मौसम पल-पल बदल रहा है। गर्मी बढ़ने लगी है। सूरज की तपिश के बीच संक्रामक रोगों का प्रकोप भी शुरू हो गया है। स्थिति यह है कि बीते दिनों की अपेक्षा प्रतिदिन रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। सबसे अधिक डायरिया और बुखार कहर बरपाने लगा है।
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फखरपुर क्षेत्र के अकबरपुर गांव निवासी अंकुश (2) पुत्र राधेश्याम को दो दिन पूर्व बुखार के साथ उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। परिवारीजनों ने गांवों में इलाज कराया, लेकिन लाभ न होने पर शनिवार को जिला अस्पताल में भर्ती किया। यहां पर इलाज के दौरान रविवार को सुबह अंकुश ने दम तोड़ दिया।
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वहीं, हरदी के पचदेवरी गांव निवासी रंजीत (ढाई) पुत्र राजेंद्र व नानपारा के मेहरबान नगर निवासी वैष्णवी (5) पुत्री भोला को भी बुखार और उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। परिवारीजनों ने जिला अस्पताल के चिल्ड्रेन वार्ड आईसीयू में भर्ती कराया था, लेकिन इलाज के दौरान रविवार को दोपहर में दोनों मासूमों ने दम तोड़ दिया।
उधर, दरगाह क्षेत्र के गुलाम अलीपुरा निवासी रियासत खान की पत्नी बिट्टी ने बेटी को जन्म दिया। लेकिन जन्म के कुछ देर बाद उसकी हालत बिगड़ गई। चिल्ड्रेन वार्ड में भर्ती कर इलाज शुरू हुआ, लेकिन कुछ देर बाद मासूम ने दम तोड़ दिया।
वहीं, महसी के बंधा निवासी तुलसी की एक वर्षीय बेटी को भी उल्टी-दस्त की शिकायत पर स्थानीय चिकित्सकों के यहां पहुंचाया गया। इलाज के दौरान हालत बिगड़ने पर निजी चिकित्सक ने जिला अस्पताल रेफर कर दिया, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही मासूम की मौत हो गई। उधर, जिला अस्पताल में विभिन्न संक्रामक रोगों से ग्रसित और 20 रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें शुभम (3), रजिया (2), शिवांशु (6) और प्रदीप (एक) की हालत गंभीर बताई जा रही है।
इंसेट
डायरिया व बुखार के लक्षण-
- बुखार के साथ बदहजमी की शिकायत होना।
- भूख न लगना, मिचली आना।
- मिचली के साथ पतली दस्त की शिकायत होना।
-कभी-कभी उल्टी दस्त की एक साथ समस्या होना
इंसेट
बचाव के उपाय
- डायरिया होने की दशा में शिकंजी का घोल निरंतर पिलाएं।
- डायरिया के साथ बुखार होने पर माथे पर पानी की भीगी पट्टी रखें।
- तली-भुनी चीजों से पूरी तरह परहेज करें।
- बासी खाना या नाश्ते का प्रयोग न करें।
- योग्य चिकित्सक से इलाज कराएं
कोट
काफी गंभीर हालत में आए थे रोगी
बुखार और डायरिया से ग्रसित जिन रोगियों की जिला अस्पताल में मौत हुई है। उन सभी का इलाज परिवारीजनों ने स्थानीय स्तर पर पहले चिकित्सकों से करवाया। हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया। सभी की स्थिति काफी गंभीर थी। बेहतर इलाज कर जिंदगी बचाने की कोशिश की गई। लेकिन पहले ही हालत इतनी गंभीर हो चुकी थी कि सुधार नहीं हुआ।
डॉ. डीके सिंह, मुख्य चिकित्साधीक्षक