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कतर्निया के ही होकर रह गए नेपाली गजराज और गैंडे

Mon, 28 Mar 2016 11:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 28 Mar 2016 11:19 PM IST
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elephant and rhino are living in Katarniya
हाथी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र और नेपाल के रॉयल बर्दिया नेशनल पार्क के बीच नेपाली सीमा में खाता कॉरीडोर का जंगल आबादी में तब्दील होने से नेपाल से आने वाले गजराज और गैंडों को आवागमन में दिक्कत हो रही है। ऐसे में उन्हें कतर्नियाघाट सेंक्चुरी रास आ रहा है।
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यहां 12 हाथी और 4 गैंडों का कुनबा कतर्नियाघाट में ट्रांस गेरुआ इलाके में आधे दशक से प्रवास कर रहा है। नेपाल में स्थित रॉयल बर्दिया नेशनल पार्क और बांके वन क्षेत्र में विचरण करने वाले बाघ, हाथी, गैंडा व अन्य दुर्लभ वन्यजीव अक्सर कतर्नियाघाट और रॉयल बर्दिया नेशनल पार्क के बीच स्थित खाता कॉरीडोर जंगल के रास्ते आवागमन करते हैं।
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लेकिन बीते आधे दशक में जंगल का दोहन बड़े पैमाने पर बढ़ा। इसके चलते 18 किलोमीटर में फैला खाता कॉरीडोर का जंगल भारत-नेपाल सीमा के कोठियाघाट से नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क तक लगभग 11 किलोमीटर की दूरी में मैदानी इलाके में तब्दील हो गया है। लोगों ने घर भी बना लिये हैं।
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इसके चलते दोनों देशों के सेंक्चुरी क्षेत्र में वन्यजीवों को आवागमन में काफी परेशानी होने लगी। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि कतर्निया कॉरीडोर के साथ ही छेदिया कॉरीडोर भी है।


यह कॉरीडोर कौड़ियाला नदी से सटा हुआ है। इस रास्ते से भी दुर्लभ वन्यजीव कतर्नियाघाट पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें नदी के कछार का काफी इलाका तय करना पड़ता है।  कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी आशीष तिवारी ने बताया कि नेपाल से आने वाले गैंडों के समूह में एक गैंडे में रेडियो कालर लगा हुआ है।
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