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सूख गई गेरुआ नदी, जलीय जीवों पर संकट

Thu, 20 Apr 2017 10:33 PM IST
अमर उजाला/बहराइच
अमर उजाला/बहराइच Updated Thu, 20 Apr 2017 10:33 PM IST
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Dryed garuda river, crisis on aquatic organisms
सूखी गेरुअा नदी - फोटो : अमर उजाला
कतर्नियाघाट से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी फिर सूख गई है। जिसके चलते कतर्नियाघाट आने वाले पर्यटकों को बोटिंग के लिए निराश होना पड़ेगा। साथ ही नदी के सूखने से दुर्लभ जलीय जीवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है। घड़ियालों के अंडों की सुरक्षा के लिए भी अब वनकर्मियों को कड़ी मशक्कत करनी होगी। 
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर नेपाल की दो नदियां गेरुआ व कौड़ियाला बहती हैं। सिल्ट जमा होने से नदी काफी छिछली हो गई है, जिसके चलते आधे दशक से अप्रैल से जून के मध्य गेरुआ नदी रेत में तब्दील हो जाती है। इस बार भी वही स्थिति चार दिनों से उत्पन्न हो गई है। गेरुआ नदी का पानी दुर्लभ घड़ियाल, मगरमच्छ व गैंगेटिक डाल्फिन के लिए मुफीद माना जाता है।
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यहां पर एक दशक में इन जलीय जीवों का कुनबा बड़े पैमाने पर फला फूला है। लेकिन अब नदी का पानी सूखने के चलते यह जलीय जीव अपना अस्तित्व बरकरार रख पाएंगे, इस पर सवाल उठ रहे हैं। इतना ही नहीं कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र के कतर्नियाघाट रेंज से होकर बहने वाली गेरुआ नदी ही जंगल में घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए एक मात्र बोटिंग का सहारा हैं। लेकिन नदी के सूखने से अब मई और जून में गर्मी की छुट्टी में आने वाले पर्यटकों को बोटिंग से वंचित होना पड़ेगा।
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जून के अंत में नेपाल के पहाड़ों पर वर्षा होने के बाद ही अब पुन: गेरुआ नदी में पानी आएगा। लेकिन 15 जून से कतर्निया में पर्यटकों की आमद पर सीजनल प्रतिबंध भी लग जाएगा। ऐसे में अब नवंबर में ही कतर्निया घाट जब खुलेगा, तब पर्यटक बोटिंग का लुत्फ उठा सकेंगे।  


इंसेट 
इन जलीय जीवों का होता है वास
- घड़ियाल - 250
- मगरमच्छ - 300
- डाल्फिन - 46

कोट 
सुरक्षा के हैं व्यापक इंतजाम
प्राकृतिक असंतुलन का असर नदी पर दिख रहा है, जिससे पानी सूखने की स्थिति आती है। पानी सूखने पर दुर्लभ जलीय जीव घाघरा व नेपाली क्षेत्र में नदी के गहरे स्थलों की ओर प्रवास कर जाते हैं। पानी बढ़ने पर पुन: यह जलीय जीव कतर्निया परिक्षेत्र में आ जाते हैं।
जीपी सिंह, डीएफओ 
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