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Bahraich News: हिंसा आरोपियों के घर गिराने पर रोक लगाने की मानवाधिकार आयोग से मांग
Mon, 21 Oct 2024 02:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Mon, 21 Oct 2024 02:48 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील ने दर्ज कराई शिकायत
संवाद न्यूज एजेंसी
बहराइच। हिंसा के आरोपियों के घरों को अतिक्रमण के नाम पर गिराने का नोटिस लगने के बाद मामला राष्ट्रीय व राज्य मानवाधिकार आयोग पहुंच गया है। मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने आयोग में दर्ज कराया है।
हिंसा के मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद के अलावा महसी क्षेत्र के 22 और घरों पर नोटिस शुक्रवार की शाम चस्पा किया गया है। इसके बाद शनिवार की सुबह लोगों ने खुद से ही अपना घर खाली करना शुरू कर दिया है। उक्त मामले पर अधिवक्ता ने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि इस तरह यदि अतिक्रमण हटाने की ही कार्रवाई की जानी है तो पूरे कस्बे में की जानी चाहिए। क्योंकि दुर्घटना कहीं भी हो सकती है। केवल आरोपियों के घरों से ही दुर्घटना की संभावना नहीं है। इसके अलावा उक्त क्षेत्र के तहसीलदार, एसडीएम तथा जिलाधिकारी सहित उन सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए जिनकी लापरवाही की वजह से अतिक्रमण कर यह मकान बनाए गए हैं। इस तरह की कार्रवाई करना आरोपियों को संविधान में मिले मौलिक अधिकारों व मानवाधिकारों का हनन है क्योंकि बिना सुनवाई या जांच कर किसी को दंगाई या अपराधी मानकर कार्रवाई करना सीधा-सीधा मानवाधिकारों पर चोट है व नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। अधिवक्ता ने आगे मांग की है कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर उक्त कार्रवाई को रोका जाए व अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया के सभी नियमों को ध्यान में रखकर ही कार्रवाई की जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहराइच। हिंसा के आरोपियों के घरों को अतिक्रमण के नाम पर गिराने का नोटिस लगने के बाद मामला राष्ट्रीय व राज्य मानवाधिकार आयोग पहुंच गया है। मामले को इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील डॉ. गजेंद्र सिंह यादव ने आयोग में दर्ज कराया है।
हिंसा के मुख्य आरोपी अब्दुल हमीद के अलावा महसी क्षेत्र के 22 और घरों पर नोटिस शुक्रवार की शाम चस्पा किया गया है। इसके बाद शनिवार की सुबह लोगों ने खुद से ही अपना घर खाली करना शुरू कर दिया है। उक्त मामले पर अधिवक्ता ने शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि इस तरह यदि अतिक्रमण हटाने की ही कार्रवाई की जानी है तो पूरे कस्बे में की जानी चाहिए। क्योंकि दुर्घटना कहीं भी हो सकती है। केवल आरोपियों के घरों से ही दुर्घटना की संभावना नहीं है। इसके अलावा उक्त क्षेत्र के तहसीलदार, एसडीएम तथा जिलाधिकारी सहित उन सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए जिनकी लापरवाही की वजह से अतिक्रमण कर यह मकान बनाए गए हैं। इस तरह की कार्रवाई करना आरोपियों को संविधान में मिले मौलिक अधिकारों व मानवाधिकारों का हनन है क्योंकि बिना सुनवाई या जांच कर किसी को दंगाई या अपराधी मानकर कार्रवाई करना सीधा-सीधा मानवाधिकारों पर चोट है व नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। अधिवक्ता ने आगे मांग की है कि मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर उक्त कार्रवाई को रोका जाए व अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया के सभी नियमों को ध्यान में रखकर ही कार्रवाई की जाए।
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