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Bahraich News: सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष बोले, घर जाकर दर्ज करें नाबालिग पीड़िताओं के बयान
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पुलिस लाइन में बैठक को संबोधित करते सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष।
बहराइच। नाबालिग पीड़िताओं के बयान थाने में पुलिस की वर्दी में दर्ज न किए जाएं। उनके घर या बताए गए इच्छित स्थान पर सादे कपड़ों में महिला उपनिरीक्षक अथवा महिला आरक्षी से बयान दर्ज कराया जाए। यह निर्देश बाल कल्याण समिति न्यायपीठ के अध्यक्ष सतीश कुमार श्रीवास्तव ने बुधवार को पुलिस लाइन सभागार में विशेष किशोर पुलिस इकाई एवं एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग समन्वय समिति की बैठक में दिए।
सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष ने कहा कि अपहरण के मामलों में बरामद होने वाली अधिकांश नाबालिग बालिकाएं पॉक्सो पीड़िता होती हैं। ऐसे मामलों में बयान दर्ज करते समय विशेष संवेदनशीलता बरतना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिली है कि कुछ थानों में नाबालिग पीड़िताओं के बयान पुलिस की वर्दी में दर्ज किए जा रहे हैं।
उन्होंने रिसिया थाने की एक पीड़िता का उदाहरण देते हुए बताया कि काउंसलिंग के दौरान पुलिसकर्मियों की वर्दी देखकर बालिका भयभीत हो गई थी। इस कारण वह सही तरीके से बयान नहीं दे सकी। बाद में महिला न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष उसने सहजता से अपना बयान दर्ज कराया।
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अध्यक्ष ने कहा कि समन्वय समिति की बैठकों में पहले भी इस संबंध में निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन कुछ थानों में अनुपालन नहीं हो रहा है। लापरवाही मिलने पर संबंधित पुलिस बाल कल्याण अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
बैठक में सीओ पुलिस लाइन, मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, श्रम परिवर्तन अधिकारी, संरक्षण अधिकारी शिविका मौर्या, देहात व प्रथम संस्था के प्रतिनिधि और विभिन्न थानों के पुलिस बाल कल्याण अधिकारी मौजूद रहे।
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सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष ने कहा कि अपहरण के मामलों में बरामद होने वाली अधिकांश नाबालिग बालिकाएं पॉक्सो पीड़िता होती हैं। ऐसे मामलों में बयान दर्ज करते समय विशेष संवेदनशीलता बरतना जरूरी है। उन्होंने कहा कि शिकायत मिली है कि कुछ थानों में नाबालिग पीड़िताओं के बयान पुलिस की वर्दी में दर्ज किए जा रहे हैं।
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उन्होंने रिसिया थाने की एक पीड़िता का उदाहरण देते हुए बताया कि काउंसलिंग के दौरान पुलिसकर्मियों की वर्दी देखकर बालिका भयभीत हो गई थी। इस कारण वह सही तरीके से बयान नहीं दे सकी। बाद में महिला न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष उसने सहजता से अपना बयान दर्ज कराया।
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अध्यक्ष ने कहा कि समन्वय समिति की बैठकों में पहले भी इस संबंध में निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन कुछ थानों में अनुपालन नहीं हो रहा है। लापरवाही मिलने पर संबंधित पुलिस बाल कल्याण अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
बैठक में सीओ पुलिस लाइन, मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, श्रम परिवर्तन अधिकारी, संरक्षण अधिकारी शिविका मौर्या, देहात व प्रथम संस्था के प्रतिनिधि और विभिन्न थानों के पुलिस बाल कल्याण अधिकारी मौजूद रहे।