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Bahraich News: सीडब्ल्यूसी की पीठ ने नवजात को बाल शिशु गृह भेजने का दिया आदेश
Tue, 25 Jun 2024 03:30 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Tue, 25 Jun 2024 03:30 AM IST
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बहराइच। सामूहिक दुष्कर्म की पीड़िता द्वारा जन्मे शिशु के मामले में पीड़िता किशोरी ने बच्ची की परवरिश करने में असमर्थता जताई थी। किशोरी के माता-पिता ने सोमवार को सीडब्ल्यूसी पीठ को प्रार्थना देकर न्याय की गुहार लगाई थी। जिसपर सीडब्ल्यूसी की न्यायपीठ ने नवाजात बच्ची को उचित देखभाल व संरक्षण के लिए राजकीय शिशु ग्रह में भेजने का आदेश दिया है।
थाना पयागपुर क्षेत्र की एक 15 वर्षीय बालिका के साथ आठ माह पूर्व सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया था। बालिका की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे महिला अस्पताल में 20 जून को भर्ती कराया गया था, जहां पीड़ित बालिका ने एक शिशु को जन्म दिया था। बच्ची को जन्म देने के बाद किशोरी पर असमय ही एक नवजात शिशु के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आन पड़ी। इससे वह बिलख उठी और उसने व उसके माता-पिता ने सोमवार को नवजात शिशु का उत्तरदायित्व संभालने में असमर्थता जताते हुए न्यायपीठ बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई। प्रार्थना पत्र मिलने के बाद बाल कल्याण समिति के न्यायपीठ के अध्यक्ष सतीश कुमार श्रीवास्तव, सदस्य दीपमाला प्रधान, अर्चना पांडेय व नवनीत मिश्रा की टीम ने मामले को गंभीरता से लिया।
पीड़िता व उनके परिवार के प्रत्यर्पण प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर नवजात शिशु की उचित देखभाल व संरक्षण के लिए राजकीय शिशु ग्रह लखनऊ भेजने का आदेश पारित किया। पीठ ने अपने आदेश में इस बात का उल्लेख किया कि 15 वर्षीय बालिका जो स्वयं अभी मासूम है, उसके ऊपर परिस्थितियां वश एक शिशु का उत्तरदायित्व आन पड़ा है। उसे वह संभाल पाने में असमर्थ है। ऐसी स्थिति में यदि वह अपने नवजात शिशु का प्रत्यर्पण करना चाहती है, तो उसका प्रार्थनापत्र स्वीकार करने योग्य है। लेकिन इन परिस्थितियों में इस निर्दोष शिशु की उचित देखरेख व संरक्षण की व्यवस्था किया जाना भी सीडब्ल्यूसी पीठ का नैतिक उत्तरदायित्व है।
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ऐसी स्थित में शिशु को पूरी सुरक्षा के साथ राजकीय शिशु गृह में संरक्षित कराया जाना चाहिए। पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा कि अगर इस दौरान बच्ची का कोई उत्तराधिकारी नहीं आता है, तो उसे दत्तक ग्रहण के लिए लीगल फ्री घोषित किया जा सकता है।
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थाना पयागपुर क्षेत्र की एक 15 वर्षीय बालिका के साथ आठ माह पूर्व सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया था। बालिका की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे महिला अस्पताल में 20 जून को भर्ती कराया गया था, जहां पीड़ित बालिका ने एक शिशु को जन्म दिया था। बच्ची को जन्म देने के बाद किशोरी पर असमय ही एक नवजात शिशु के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आन पड़ी। इससे वह बिलख उठी और उसने व उसके माता-पिता ने सोमवार को नवजात शिशु का उत्तरदायित्व संभालने में असमर्थता जताते हुए न्यायपीठ बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई। प्रार्थना पत्र मिलने के बाद बाल कल्याण समिति के न्यायपीठ के अध्यक्ष सतीश कुमार श्रीवास्तव, सदस्य दीपमाला प्रधान, अर्चना पांडेय व नवनीत मिश्रा की टीम ने मामले को गंभीरता से लिया।
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पीड़िता व उनके परिवार के प्रत्यर्पण प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर नवजात शिशु की उचित देखभाल व संरक्षण के लिए राजकीय शिशु ग्रह लखनऊ भेजने का आदेश पारित किया। पीठ ने अपने आदेश में इस बात का उल्लेख किया कि 15 वर्षीय बालिका जो स्वयं अभी मासूम है, उसके ऊपर परिस्थितियां वश एक शिशु का उत्तरदायित्व आन पड़ा है। उसे वह संभाल पाने में असमर्थ है। ऐसी स्थिति में यदि वह अपने नवजात शिशु का प्रत्यर्पण करना चाहती है, तो उसका प्रार्थनापत्र स्वीकार करने योग्य है। लेकिन इन परिस्थितियों में इस निर्दोष शिशु की उचित देखरेख व संरक्षण की व्यवस्था किया जाना भी सीडब्ल्यूसी पीठ का नैतिक उत्तरदायित्व है।
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ऐसी स्थित में शिशु को पूरी सुरक्षा के साथ राजकीय शिशु गृह में संरक्षित कराया जाना चाहिए। पीठ ने अपने आदेश में यह भी कहा कि अगर इस दौरान बच्ची का कोई उत्तराधिकारी नहीं आता है, तो उसे दत्तक ग्रहण के लिए लीगल फ्री घोषित किया जा सकता है।