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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bahraich News ›   trafficking of indian compost to nepal

धड़ल्ले से नेपाल भेजी जा रही खाद

Tue, 11 Aug 2015 10:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच Updated Tue, 11 Aug 2015 10:24 PM IST
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बहराइच। धान की फसल में टॉप ड्रेसिंग की सख्त जरूरत है, मौसम भी मेहरबान है लेकिन जिले की सहकारी संस्थाएं खाद से ड्राई हो चुकी हैं। किसान खाद की किल्लत से जूझ रहे हैं।
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जानकारों की मानें तो भारी मात्रा में भारतीय खाद सीमावर्ती इलाकों के जरिए नेपाल को तस्करी कर दी गई है। डीएम अभय कुमार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसबी व क्षेत्र के थानाध्यक्षों को पत्र लिखकर तस्करी पर रोकथाम व तस्करों पर कठोर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
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अब प्रशासन भले ही तेजी दिखाए लेकिन इसे विडंबना कहिए या विभागीय लापरवाही, खाद के कारण तराई में खेती लड़खड़ा रही है वहीं भारतीय खाद से नेपाली में फसलें लहलहा रही हैं।
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बहराइच में नेपाल-भारत की 110 किमी की खुली सीमा है। खाद की तस्करी व अवैध बिक्री को रोकने के लिए सीमावर्ती इलाकों में दस किमी परिधि में खाद लाइसेंस जारी करने पर रोक है।

इसके अलावा सीमा की सुरक्षा व अवैध गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के लिए एसएसबी की छठी व सातवीं बटालियन के अलावा कस्टम कार्यालय स्थापित हैं।

इसके बावजूद खाद की आवाजाही पर विराम नहीं लग सका है। दरअसल खुली सीमा यहां की भौगोलिक स्थिति व स्थानीय लोगों में तस्करों की पैठ सीमा पर तैनात एसएसबी के दायित्व निर्वहन की राह में बड़ा रोड़ा साबित हो रहा है।

सूत्रों की माने तो सीमाई क्षेत्रों में तस्करों का संगठित नेटवर्क सक्रिय है। सीमा पर एसएसबी जवानों की सख्ती बढ़ने के साथ ही तस्करों ने भी अपना तरीका बदल लिया है।

अब वे खाद की खेप पार कराने की जगह एक-एक कर सामान सीमा पार कराते हैं। इस काम को अंजाम देने के लिए स्थानीय महिलाओं और बच्चों को लगाया जाता है।

गरीबी और बदहाली से जूझते ये लोग तस्करों को अपना अन्नदाता समझते है। तस्कर भी समय-समय पर जवानों का मनोबल तोड़ने के लिए साजिश के तहत भोले-भाले ग्रामीणों का इस्तेमाल एसएसबी के खिलाफ हथियार के रूप में करते है।


प्रबुद्धजनों का मानना है कि सीमाई क्षेत्रों में विकास को गति देकर एवं रोजगार के अवसर पैदा कर ही तस्करी पर रोक लगाई जा सकती है। इसके लिए केवल जवानों की मुस्तैदी ही काफी नहीं है।

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