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हाथियों का उत्पात
Updated Sun, 19 Nov 2017 09:30 PM IST
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बिछिया/कतर्नियाघाट। कौड़ियाला नदी से सटे गांवों में शनिवार रात हाथियों ने जमकर उत्पात मचाया। 25 से 30 की संख्या में नेपाली हाथियों के झुंड ने चार गांवों में ग्रामीणों की करीब 230 बीघा फसल को रौंद दिया। केला, धान और गन्ने की फसल को सबसे अधिक नुकसान हुआ है। एक लाख से अधिक के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। पूरी रात गांव के लोग मशाल जलाकर हांका लगाते हुए ढोल पीटते रहे। इस पर उत्पाती हाथी तड़के तीन बजे के आसपास नेपाल सीमा की ओर चले गए। सूचना रेंज कार्यालय को दी गई है। लेकिन अब तक कोई भी वनकर्मी मौके पर नहीं पहुंचा है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर नेपाल की गेरुआ और कौड़ियाला नदियां गुजरती हैं। गेरुआ और कौड़ियाला नदी के उस पार घना जंगल है। यह जंगल खाता कारीडोर के माध्यम से नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क से जुड़ा हुआ है। जिसके चलते आए दिन नेपाल के हाथियों का झुंड कतर्नियाघाट पहुंच जाता है। शनिवार रात 25 से 30 की संख्या में नेपाली हाथियों का झुंड नदी के उस पार जंगल में पहुंचा। इसके बाद कौड़ियाला नदी पार कर हाथियों का समूह नदी के तट के निकट स्थित मझरा, भरथापुर, खैरनिया, नयापुरवा और बाबूपुरवा गांव पहुंच गया। यहां चिंघाड़ते हुए हाथी ने केला, गन्ना और धान की फसल को रौंद दिया। बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। लगभग 230 बीघा फसल के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। रात में गांव के लोगों ने हाथियों की चिंघाड़ सुनी तो घरों में सो रहे ग्रामीण हांका लगाते हुए निकले। हाथियों ने गांव निवासी छोटे, बीरबल समेत 13 ग्रामीणों की फसल को तहस-नहस कर दिया। गांव के लोग मशाल जलाते हुए ढोल पीटकर रह-रहकर हांका लगाते रहे। लेकिन नेपाली हाथी चार घंटे तक उत्पात मचाने के बाद सुबह तीन बजे के आसपास घने जंगल की ओर चले गए। रात में ही हाथियों के उत्पात की सूचना रेंज कार्यालय को दी गई थी। लेकिन अब तक कोई भी रेंज कर्मी मौके पर नहीं पहुंचा है। जिसके चलते गांव के लोग दहशत मे हैं। इस मामले में वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह का कहना है कि गेरुआ और कौड़ियाला पार का जंगल हाथियों का शरण स्थल है। इसमें वन विभाग कुछ नहीं कर सकता। ग्रामीणों को स्वयं सजग रहना होगा।
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कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर नेपाल की गेरुआ और कौड़ियाला नदियां गुजरती हैं। गेरुआ और कौड़ियाला नदी के उस पार घना जंगल है। यह जंगल खाता कारीडोर के माध्यम से नेपाल के रायल बर्दिया नेशनल पार्क से जुड़ा हुआ है। जिसके चलते आए दिन नेपाल के हाथियों का झुंड कतर्नियाघाट पहुंच जाता है। शनिवार रात 25 से 30 की संख्या में नेपाली हाथियों का झुंड नदी के उस पार जंगल में पहुंचा। इसके बाद कौड़ियाला नदी पार कर हाथियों का समूह नदी के तट के निकट स्थित मझरा, भरथापुर, खैरनिया, नयापुरवा और बाबूपुरवा गांव पहुंच गया। यहां चिंघाड़ते हुए हाथी ने केला, गन्ना और धान की फसल को रौंद दिया। बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। लगभग 230 बीघा फसल के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। रात में गांव के लोगों ने हाथियों की चिंघाड़ सुनी तो घरों में सो रहे ग्रामीण हांका लगाते हुए निकले। हाथियों ने गांव निवासी छोटे, बीरबल समेत 13 ग्रामीणों की फसल को तहस-नहस कर दिया। गांव के लोग मशाल जलाते हुए ढोल पीटकर रह-रहकर हांका लगाते रहे। लेकिन नेपाली हाथी चार घंटे तक उत्पात मचाने के बाद सुबह तीन बजे के आसपास घने जंगल की ओर चले गए। रात में ही हाथियों के उत्पात की सूचना रेंज कार्यालय को दी गई थी। लेकिन अब तक कोई भी रेंज कर्मी मौके पर नहीं पहुंचा है। जिसके चलते गांव के लोग दहशत मे हैं। इस मामले में वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह का कहना है कि गेरुआ और कौड़ियाला पार का जंगल हाथियों का शरण स्थल है। इसमें वन विभाग कुछ नहीं कर सकता। ग्रामीणों को स्वयं सजग रहना होगा।
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