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प्लास्टिक बेबी को लखनऊ के बजाए घर लेकर चले गए परिवारीजन
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गायघाट (बहराइच)। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गायघाट में गुरुवार को एक महिला ने प्लास्टिक बेबी को जन्म दिया। हालत गंभीर होने पर स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सकों ने नवजात को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने केजीएमयू लखनऊ रेफर कर दिया, लेकिन रुपयों की व्यवस्था न होने से परिवारीजन उसे लखनऊ ले जाने की बजाय घर लेकर चले गए। गांव में जमीन पर नवजात को लिटाकर बाहर का दूध और पानी पिलाया जा रहा है।
विकास खंड बलहा अंतर्गत गायघाट निवासी शमीम की पत्नी माजिदा बेगम ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में गुरुवार को सुबह 6.30 बजे नवजात को जन्म दिाय। लेकिन प्रसव के बाद पता चला कि जन्म लेने वाला नवजात प्लास्टिक बेबी है। इस पर नवजात को देखने के लिए ग्रामीण एकत्रित हो गए। पुलिस की मदद से ग्रामीणों को बाहर किया गया। इसके बाद गायघाट के चिकित्सकों ने नवजात को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला चिकित्सालय में इलाज के बाद भी लाभ नहीं मिला। इस पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा व अन्य चिकित्सकों की देखरेख के बाद नवजात को लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
लेकिन शमीम नवजात को लेकर लखनऊ जाने के बाद बजाय गांव चला गया। गुरुवार की रात अपने घर लेकर आए। परिवार के लोगों ने नवजात को घर के बाहर बरामदे में लिटा दिया। नवजात को लकड़ी के बने झउवा से ढक दिया। इसके बाद पति-पत्नी घर के अंदर सोने चले गए। सुबह उठकर परिवारीजनों ने प्लास्टिक बेबी को दूध और पानी पिलाया।
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इस मामले में शमीम ने बताया कि बहराइच जिला चिकित्सालय से लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था, लेकिन मैं बहुत गरीब हूं। मैं रुपये उधार लेकर बहराइच जिला अस्पताल गया था। रुपयों के अभाव के कारण मैं अपने नवजात बच्चे को लेकर लखनऊ नहीं गया। मैं घर पर इसे दूध पानी देता रहूंगा, कहीं लेकर नहीं जाऊंगा। उधर, प्लास्टिक बेबी की खाल फटने लगी है।
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विकास खंड बलहा अंतर्गत गायघाट निवासी शमीम की पत्नी माजिदा बेगम ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में गुरुवार को सुबह 6.30 बजे नवजात को जन्म दिाय। लेकिन प्रसव के बाद पता चला कि जन्म लेने वाला नवजात प्लास्टिक बेबी है। इस पर नवजात को देखने के लिए ग्रामीण एकत्रित हो गए। पुलिस की मदद से ग्रामीणों को बाहर किया गया। इसके बाद गायघाट के चिकित्सकों ने नवजात को जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला चिकित्सालय में इलाज के बाद भी लाभ नहीं मिला। इस पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा व अन्य चिकित्सकों की देखरेख के बाद नवजात को लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।
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लेकिन शमीम नवजात को लेकर लखनऊ जाने के बाद बजाय गांव चला गया। गुरुवार की रात अपने घर लेकर आए। परिवार के लोगों ने नवजात को घर के बाहर बरामदे में लिटा दिया। नवजात को लकड़ी के बने झउवा से ढक दिया। इसके बाद पति-पत्नी घर के अंदर सोने चले गए। सुबह उठकर परिवारीजनों ने प्लास्टिक बेबी को दूध और पानी पिलाया।
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इस मामले में शमीम ने बताया कि बहराइच जिला चिकित्सालय से लखनऊ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था, लेकिन मैं बहुत गरीब हूं। मैं रुपये उधार लेकर बहराइच जिला अस्पताल गया था। रुपयों के अभाव के कारण मैं अपने नवजात बच्चे को लेकर लखनऊ नहीं गया। मैं घर पर इसे दूध पानी देता रहूंगा, कहीं लेकर नहीं जाऊंगा। उधर, प्लास्टिक बेबी की खाल फटने लगी है।