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तराई का तापमान समय से पहले खोल सकता है नन्हे घड़ियालों की आंखें

Mon, 05 Jun 2017 06:31 PM IST
Updated Mon, 05 Jun 2017 06:31 PM IST
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तराई का तापमान समय से पहले खोल सकता है नन्हे घड़ियालों की आंखें
बढ़ा पारा समय से पहले खोल सकता है नन्हें घड़ियालों की आंखें
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बहराइच। तराई का अधिक तापमान घड़ियालों की नई जिंदगी में समस्या बन रहा है। इस बार सामान्य से अधिक तापमान के कारण निर्धारित समय से सप्ताह भर पूर्व घड़ियालों के अंडे खुल सकते हैं। इसके लिए निगरानी टीम गठित की गई है। यह टीम कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी में घड़ियालों के 27 घोसलों में अंडों की सुरक्षा में लगी है। वनाधिकारी व जलीय जीव विशेषज्ञ निरंतर घोसलों की निगरानी कर रहे हैं। 27 घोसलों से 1900 नए मेहमानों के कतर्निया में दस्तक देने की उम्मीद जताई जा रही है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी घड़ियालों के कुनबों को बढ़ाने में मददगार मानी जाती है। इस समय अनुमान के मुताबिक नदी में लगभग 300 वयस्क घड़ियाल मौजूद हैं। प्रति वर्ष मार्च के अंत में घड़ियाल नदी के टॉपू वाले स्थानों पर अंडे देकर उन्हें बालुओं में सहेज कर घोसला बना देते हैं। एक घोसले में 45 से 50 अंडे होते हैं। बालुओं में ढकने के बाद मादा घड़ियाल अंडों के प्रति निश्चिंत हो जाती है। 15 जून का समय अंडों से बच्चों के निकलने का होता है। लेकिन इस बार तराई का मौसम अधिक सख्त है। सूरज की तपिश से गेरुआ नदी के टॉपुओं पर भी सामान्य से ज्यादा गर्मी है। जिसके चलते समय से सप्ताह भर पूर्व अंडों से बच्चे निकलने की संभावना विशेषज्ञ जता रहे हैं। वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह का कहना है कि चार वन रक्षकों की टीम गठित की गई है, जो मोटरबोट व नाव के सहारे गेरुआ नदी में टॉपुओं पर बने घड़ियालों के घोसलों पर नजर रख रही हैं। विश्व प्रकृति निधि भारत (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के परियोजनाधिकारी दबीर हसन ने बताया कि अंडों की प्रतिदिन सुबह-शाम निगरानी हो रही है। बालू हटाकर अंडों की स्थिति जांची जा रही है। जैसे ही बच्चों के निकलने की शुरुआत होगी, उन्हें सुरक्षित नदी में छोड़ा जाएगा। डीएफओ ने बताया कि कतर्नियाघाट रेंज में भवानीपुर घाट और आंबा घाट में दो किलोमीटर के दायरे में टॉपुओं पर बालू में अंडे सुरक्षित हैं।
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इंसेट
होना चाहिए 42 डिग्री तापमान
कतर्नियाघाट के रेंजर आरकेपी सिंह ने बताया कि अंडों से बच्चों के निकलने के लिए नदी क्षेत्र का तापमान 42 डिग्र्री होना चाहिए। इस बार तापमान कुछ इसी अंदाज में चढ़-उतर रहा है। ऐसे में गर्मी अधिक होने से आगामी सप्ताह में नन्हे मेहमान आंखें खोल सकते हैं।
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इंसेट
नर घड़ियाल होंगे अधिक
प्रभागीय वनाधिकारी जीपी सिंह ने बताया कि अधिक गर्मी पड़ने पर अंडों से निकलने वाले बच्चों में नर अधिक होते हैं। सामान्य मौसम होने पर नर और मादा की संख्या लगभग बराबर होती है। डीएफओ ने बताया कि टॉपू पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
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