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Bahraich News: आंगनबाड़ी के आंगन में सुपोषित हो रहा बचपन
Wed, 20 Mar 2024 11:12 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Wed, 20 Mar 2024 11:12 PM IST
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चित्तौरा के रसूलपुर सरैया आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को हाथ धुलने का तरीका बतातीं आंगनबाड़ी कार्
- फोटो : आंगनबाड़ी कार्यकर्ता
बहराइच। बचपन को कैसे गढ़ा जाता है यह देखना है, तो चित्तौरा ब्लॉक के रसूलपुर सरैयां आइए। जिला मुख्यालय से 13 किलोमीटर दूर यहां का आंगनबाड़ी केंद्र किसी प्ले स्कूल से कम नहीं है। यहां ज्यादातर गरीब व श्रमिक परिवारों के बच्चे आते हैं, जहां सेहत, शिक्षा और स्वच्छता के मानक दूसरों की अपेक्षा कमतर होते हैं। लेकिन केंद्र की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रतिमा के प्रयास से न सिर्फ यहां के नौनिहालों की सेहत दुरुस्त है। बल्कि उनके शिक्षा व आचरण में भी बदलाव दिखाई देता है। यहां तोतली भाषा में गुड मॉर्निंग और गुड डे कहते हुए बचपन को देखा जा सकता है।
प्रतिमा बताती हैं कि केंद्र पर वर्तमान में 45 बच्चे पंजीकृत हैं। यहां आने वाले ज्यादातर बच्चों के परिवारीजन पालतू जानवरों की देखभाल करते समय अपशब्दों का इस्तेमाल करते थे। शुरुआत में यही शब्द बच्चों की जुबान पर भी होते थे। इसके सुधार के लिए केंद्र पर बच्चों को आपस में बातचीत का सलीका सिखाया गया। कम वजन के बच्चों के खानपान में आवश्यक सुधार के साथ उन्हें खेल-खेल में पोषक तत्वों से भरपूर फल और सब्जियों की पहचान कराई गई। कविता और दूसरी गतिविधियों के माध्यम से हाथों की स्वच्छता व बाजार की वस्तुओं को न खाने के लिए प्रेरित किया गया, तो बदलाव का असर दिखने लगा। आज केंद्र पर आने वाले सभी बच्चे स्वस्थ हैं और वे आगे चलकर पुलिस, डॉक्टर आदि बनने की बात कहते हैं।
क्या कहते हैं ग्रामीण
रसूलपुर सरैया निवासी महेश पेशे से मजदूर हैं। वे बताते हैं कि उनकी दो माह की बेटी निधि का वजन दो किलोग्राम था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने सबसे पहले मां के खानपान में सुधार कराया, उन्हें घर के बने भोजन में हरी साग, सब्जी शामिल करने के साथ आंगनबाड़ी से मिलने वाले पोषाहार को प्रतिदिन सेवन करने के लिए कहा। बेटी को टीकाकरण और छह माह तक सिर्फ स्तनपान करावाया। उसे मां के सीने से लगाकर केएमसी (कंगारू मदर केयर) दी गई। एक माह बाद उसके वजन में एक किलोग्राम की वृद्धि हुई। छह माह की आयु पूरी होने के बाद निधि को स्तनपान के साथ-साथ घर में बनी हुई मिश्रित दाल, मसला हुआ आलू व आंगनबाड़ी में मिलने वाला पोषक तत्वों से भरपूर फोर्टिफाइड राशन से निर्मित भोजन खिलाया गया। निधि अब 8 माह की है और स्वस्थ है। आंगनबाड़ी दीदी हमेशा समझाती हैं कि बच्चे की सेहत सुधारने के लिए मां के खानपान में सुधार कराना चाहिए।
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आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाली सुविधाएं
अनुपूरक आहार- टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच
स्वास्थ्य व पोषण शिक्षा
3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को विद्यालय पूर्व शिक्षा
बच्चों और उनकी माताओं की देखभाल के लिए जिले में 3472 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। यहां 3 से 6 वर्ष के 233056 बच्चे और 39510 गर्भवती पंजीकृत हैं। शुरुआती देखभाल, सुरक्षित वातावरण, पोषण संबंधी सहायता व समग्र विकास गतिविधियों के संचालन से इस वित्तीय वर्ष में 21666 बच्चे कुपोषण से जीत चुके हैं। -राज कपूर, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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प्रतिमा बताती हैं कि केंद्र पर वर्तमान में 45 बच्चे पंजीकृत हैं। यहां आने वाले ज्यादातर बच्चों के परिवारीजन पालतू जानवरों की देखभाल करते समय अपशब्दों का इस्तेमाल करते थे। शुरुआत में यही शब्द बच्चों की जुबान पर भी होते थे। इसके सुधार के लिए केंद्र पर बच्चों को आपस में बातचीत का सलीका सिखाया गया। कम वजन के बच्चों के खानपान में आवश्यक सुधार के साथ उन्हें खेल-खेल में पोषक तत्वों से भरपूर फल और सब्जियों की पहचान कराई गई। कविता और दूसरी गतिविधियों के माध्यम से हाथों की स्वच्छता व बाजार की वस्तुओं को न खाने के लिए प्रेरित किया गया, तो बदलाव का असर दिखने लगा। आज केंद्र पर आने वाले सभी बच्चे स्वस्थ हैं और वे आगे चलकर पुलिस, डॉक्टर आदि बनने की बात कहते हैं।
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क्या कहते हैं ग्रामीण
रसूलपुर सरैया निवासी महेश पेशे से मजदूर हैं। वे बताते हैं कि उनकी दो माह की बेटी निधि का वजन दो किलोग्राम था। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने सबसे पहले मां के खानपान में सुधार कराया, उन्हें घर के बने भोजन में हरी साग, सब्जी शामिल करने के साथ आंगनबाड़ी से मिलने वाले पोषाहार को प्रतिदिन सेवन करने के लिए कहा। बेटी को टीकाकरण और छह माह तक सिर्फ स्तनपान करावाया। उसे मां के सीने से लगाकर केएमसी (कंगारू मदर केयर) दी गई। एक माह बाद उसके वजन में एक किलोग्राम की वृद्धि हुई। छह माह की आयु पूरी होने के बाद निधि को स्तनपान के साथ-साथ घर में बनी हुई मिश्रित दाल, मसला हुआ आलू व आंगनबाड़ी में मिलने वाला पोषक तत्वों से भरपूर फोर्टिफाइड राशन से निर्मित भोजन खिलाया गया। निधि अब 8 माह की है और स्वस्थ है। आंगनबाड़ी दीदी हमेशा समझाती हैं कि बच्चे की सेहत सुधारने के लिए मां के खानपान में सुधार कराना चाहिए।
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आंगनबाड़ी केंद्र से मिलने वाली सुविधाएं
अनुपूरक आहार- टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच
स्वास्थ्य व पोषण शिक्षा
3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को विद्यालय पूर्व शिक्षा
बच्चों और उनकी माताओं की देखभाल के लिए जिले में 3472 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। यहां 3 से 6 वर्ष के 233056 बच्चे और 39510 गर्भवती पंजीकृत हैं। शुरुआती देखभाल, सुरक्षित वातावरण, पोषण संबंधी सहायता व समग्र विकास गतिविधियों के संचालन से इस वित्तीय वर्ष में 21666 बच्चे कुपोषण से जीत चुके हैं। -राज कपूर, जिला कार्यक्रम अधिकारी