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Bahraich News: बच्चों की सेहत पर भारी पड़ रहा बदलता मौसम
Mon, 04 Nov 2024 02:25 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Mon, 04 Nov 2024 02:25 AM IST
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बहराइच मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग में भर्ती बीमार बच्चे।
बहराइच। जिले में सरकारी व निजी अस्पतालों में सर्दी, जुकाम-बुखार, सीने में जकड़न, गले में खराश-कफ, सांस लेने में परेशानी आदि बीमारियों से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ व मीडिया प्रभारी डॉ.अरविंद शुक्ला का कहना है कि अभिभावक बच्चों की सेहत को लेकर सावधान रहें नहीं तो समस्या जटिल हो सकती है। उन्होंने बताया कि दीपावली में पटाखे दगाने के बाद बच्चों में एलर्जी की समस्या सामने आई। वर्तमान में ओपीडी में 150 से 200 बच्चे प्रतिदिन ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इनमें सर्दी, जुकाम-बुखार, जकड़न से पीड़ित अधिक बच्चे होते हैं।
तराई के मौसम ने करवट ले ली है। सुबह व आधी रात के बाद गुलाबी ठंड का अहसास होने लगा है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों का दूसरों के साथ ज्यादा संपर्क होता है और संक्रमण से लड़ने के लिए उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है। इससे वयस्कों की अपेक्षा वे जल्दी बीमार पड़ जाते हैं।
पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें बच्चे
डॉ.अरविंद शुक्ल ने अभिभावकों को सलाह दिया है कि ठंड शुरू होने वाली है। इसलिए बच्चों का तापमान सामान्य बनाए रखें। इसके लिए ठंडे खाद्य पदार्थों को खाने के लिए न दें। फुल आस्तीन के कपड़े पहनाकर रखें। आस-पास गंदगी न होने दें। बच्चों को उल्टी-दस्त व जकड़न होने पर तुरंत सरकारी डाक्टर के पास लेकर आएं। बच्चे को स्वच्छ पानी ही पिलाएं, जहां तक संभव हो बोतल के बजाय कटोरी और चम्मच से दूध पिलाएं। पानी को उबालने के बाद ठंडा कर पिलाएं। बच्चों को ताजा खाना ही खिलाएं। ठंड बढ़ने पर बंद कमरे में हीटर न जलाएं, इससे कमरे की नमी कम जाएगी और बच्चे की सांस फूलने लगेगी। बच्चा धीरे-धीरे गंभीर बीमारी की चपेट में आ जाएगा। वहीं डॉ.एसके त्रिपाठी के अनुसार अभिभावक छोटे बच्चों को प्रदूषण, बीमार लोगों से बचाएं व भीड़-भाड़ वाली जगहों पर ले जाने से परहेज करें।
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तराई के मौसम ने करवट ले ली है। सुबह व आधी रात के बाद गुलाबी ठंड का अहसास होने लगा है। ऐसे में विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों का दूसरों के साथ ज्यादा संपर्क होता है और संक्रमण से लड़ने के लिए उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है। इससे वयस्कों की अपेक्षा वे जल्दी बीमार पड़ जाते हैं।
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पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें बच्चे
डॉ.अरविंद शुक्ल ने अभिभावकों को सलाह दिया है कि ठंड शुरू होने वाली है। इसलिए बच्चों का तापमान सामान्य बनाए रखें। इसके लिए ठंडे खाद्य पदार्थों को खाने के लिए न दें। फुल आस्तीन के कपड़े पहनाकर रखें। आस-पास गंदगी न होने दें। बच्चों को उल्टी-दस्त व जकड़न होने पर तुरंत सरकारी डाक्टर के पास लेकर आएं। बच्चे को स्वच्छ पानी ही पिलाएं, जहां तक संभव हो बोतल के बजाय कटोरी और चम्मच से दूध पिलाएं। पानी को उबालने के बाद ठंडा कर पिलाएं। बच्चों को ताजा खाना ही खिलाएं। ठंड बढ़ने पर बंद कमरे में हीटर न जलाएं, इससे कमरे की नमी कम जाएगी और बच्चे की सांस फूलने लगेगी। बच्चा धीरे-धीरे गंभीर बीमारी की चपेट में आ जाएगा। वहीं डॉ.एसके त्रिपाठी के अनुसार अभिभावक छोटे बच्चों को प्रदूषण, बीमार लोगों से बचाएं व भीड़-भाड़ वाली जगहों पर ले जाने से परहेज करें।
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