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‘बाढ़ से निपटने को तैयार रहें अधिकारी’
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Wed, 15 Jul 2015 10:37 PM IST
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श्रावस्ती। बरसात का मौसम चल रहा है। पहाड़ों पर होने वाली बरसात के कारण राप्ती का जल स्तर भी घट-बढ़ रहा है। इसलिए यदि बाढ़ की स्थिति आती है तो इससे निपटने के लिए तैयार रहना होगा।
इसमें लापरवाही अक्षम्य होगी। संबंधित अफसर जिम्मेदारों पर इसके लिए कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह बातें कैंप कार्यालय सभागार में मंगलवार देर शाम बाढ़ से बचाव के लिए आयोजित साप्ताहिक समीक्षा बैठक में डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने कही।
उन्होंने तहसीलदार को बाढ़ की दैनिक रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप पर प्रतिदिन उपलब्ध कराने, सप्ताह में एक बार तहसील में बाढ़ परामर्शदात्री समिति की बैठक करने, नदी के जलस्तर की सूचनाएं लेते रहने, बाढ़ के पानी से घिरने वाले गांवों का सर्वेक्षण कर सूची तैयार करने, बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर 24 घंटे ड्यूटी लगाने, बाढ़ चौकियों का निरीक्षण कर उसे व्यवस्थित कराने व अधिकारियों को तैनात कराने, नाव, मोटर बोट, यातायात के संसाधनों की व्यवस्था करने, राहत कार्यों व लाभार्थियों का नाम पता राहत डाटा एंट्री की वेबसाईट पर अपलोड करने का निर्देश दिया।
सिंचाई विभाग के अधिकारियों को तटबंधों की कटान व दरार को रोकने के समुचित उपाय करने, नहर नालों से खर पतवार व मलबों को हटाने, लोक निर्माण विभागों को मार्गों में आई दरारों व गड्ढों को भराने, पानी के रासतों के लिए पाईप का प्रयोग करने, किनारों की मरम्मत कराने व पत्थर लगाने, पुल पुलियों के किनारों, तटों की अस्थाई मरम्मत, क्षतिग्रस्त रेलिंग, पुलों, संपर्क मार्गों, पहुंच मार्गों, शरणालय, राहत केंद्र की तत्काल मरम्मत कराने को कहा।
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डीपीआरओ व जल निगम के अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित 165 गांवों में हैंडपंपों का उच्चीकरण करने, जलापूर्ति की व्यवस्था कराने, गांव के आंतरिक संपर्क मार्गों की मरम्मत करने सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का निर्देश दिया। इस मौके पर सभी विभागों के विभागध्यक्ष व उनके प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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इसमें लापरवाही अक्षम्य होगी। संबंधित अफसर जिम्मेदारों पर इसके लिए कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह बातें कैंप कार्यालय सभागार में मंगलवार देर शाम बाढ़ से बचाव के लिए आयोजित साप्ताहिक समीक्षा बैठक में डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह ने कही।
उन्होंने तहसीलदार को बाढ़ की दैनिक रिपोर्ट निर्धारित प्रारूप पर प्रतिदिन उपलब्ध कराने, सप्ताह में एक बार तहसील में बाढ़ परामर्शदात्री समिति की बैठक करने, नदी के जलस्तर की सूचनाएं लेते रहने, बाढ़ के पानी से घिरने वाले गांवों का सर्वेक्षण कर सूची तैयार करने, बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित कर 24 घंटे ड्यूटी लगाने, बाढ़ चौकियों का निरीक्षण कर उसे व्यवस्थित कराने व अधिकारियों को तैनात कराने, नाव, मोटर बोट, यातायात के संसाधनों की व्यवस्था करने, राहत कार्यों व लाभार्थियों का नाम पता राहत डाटा एंट्री की वेबसाईट पर अपलोड करने का निर्देश दिया।
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सिंचाई विभाग के अधिकारियों को तटबंधों की कटान व दरार को रोकने के समुचित उपाय करने, नहर नालों से खर पतवार व मलबों को हटाने, लोक निर्माण विभागों को मार्गों में आई दरारों व गड्ढों को भराने, पानी के रासतों के लिए पाईप का प्रयोग करने, किनारों की मरम्मत कराने व पत्थर लगाने, पुल पुलियों के किनारों, तटों की अस्थाई मरम्मत, क्षतिग्रस्त रेलिंग, पुलों, संपर्क मार्गों, पहुंच मार्गों, शरणालय, राहत केंद्र की तत्काल मरम्मत कराने को कहा।
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डीपीआरओ व जल निगम के अधिकारियों को बाढ़ प्रभावित 165 गांवों में हैंडपंपों का उच्चीकरण करने, जलापूर्ति की व्यवस्था कराने, गांव के आंतरिक संपर्क मार्गों की मरम्मत करने सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं से संबंधित अन्य व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का निर्देश दिया। इस मौके पर सभी विभागों के विभागध्यक्ष व उनके प्रतिनिधि मौजूद रहे।