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बहराइच हादसा: 'बेटा कहता था पापा...मैं आपका नाम रोशन करूंगा' लाश के सामने बैठी मां का दर्द; बिखरा परिवार
Wed, 05 Nov 2025 09:28 PM IST
आकाश द्विवेदी
अमर उजाला नेटवर्क, बहराइच
अमर उजाला नेटवर्क, बहराइच
Published by: आकाश द्विवेदी
Updated Wed, 05 Nov 2025 09:28 PM IST
सार
Bahraich road accident: बहराइच में लखनऊ-बहराइच मार्ग पर दर्दनाक हादसा हुआ। इस हादसे में बाइक सवार चार लोगों की मौत हो गई।
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बहराइच हादसा
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विस्तार
बहराइच के दर्दनाक सड़क हादसे ने दो परिवारों से उनकी खुशियां एक झटके में छीन लीं। हादसे में जान गंवाने वाले चंद्र किशोर की पत्नी बबिता पोस्टमार्टम हाउस पर बिलख-बिलख कर रो रही थीं। पति और बेटे की बातों को याद कर वह कभी चीख उठतीं तो कभी बेसुध हो जातीं।
इस गमगीन माहौल में वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार सुबह हुए इस हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इनमें चंद्र किशोर, उनका बहनोई करन सिंह, करन की पत्नी सेनू और छोटा पुत्र विष्णु शामिल थे। हादसे की खबर घर पहुंचते ही कोहराम मच गया।
हादसे में पति चंद्र किशोर को खो चुकीं बबिता ने अपने दर्द को बयां करते हुए बताया, मेरा बेटा कहता था पापा, मैं बड़ा होकर आपका नाम रोशन करूंगा… अब वो सपना कभी पूरा नहीं होगा। इतना कहते ही वह बेसुध हो गईं। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें संभाला और मुंह पर पानी के छींटे मारने लगे।
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इस गमगीन माहौल में वहां मौजूद हर किसी की आंखें नम हो गईं। लखनऊ-बहराइच राष्ट्रीय राजमार्ग पर बुधवार सुबह हुए इस हादसे में चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। इनमें चंद्र किशोर, उनका बहनोई करन सिंह, करन की पत्नी सेनू और छोटा पुत्र विष्णु शामिल थे। हादसे की खबर घर पहुंचते ही कोहराम मच गया।
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हादसे में पति चंद्र किशोर को खो चुकीं बबिता ने अपने दर्द को बयां करते हुए बताया, मेरा बेटा कहता था पापा, मैं बड़ा होकर आपका नाम रोशन करूंगा… अब वो सपना कभी पूरा नहीं होगा। इतना कहते ही वह बेसुध हो गईं। आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें संभाला और मुंह पर पानी के छींटे मारने लगे।
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हादसे के बाद लोगों की लगी भीड़
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
चंद्र किशोर के तीन बेटे सौरभ (15), लकी और निखिल हैं। सौरभ भी अपने पिता को खोने के सदमे से उबर नहीं पा रहा। घर में चंद्र किशोर की बूढ़ी मां की आंखें भी पथरा सी गई हैं। उम्र के अंतिम पड़ाव में बेटे की मौत की खबर ने उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ दिया है।
उधर करन सिंह के घर में भी मातम पसरा है। करन दिहाड़ी मजदूरी करते थे और पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। उनकी पत्नी सेनू और तीन साल का बेटा भी इसी हादसे में चल बसे। बड़ा बेटा विक्की (8) अब अनाथ हो चुका है। परिजन उसे संभालते रहे, पर उसके मासूम सवालों के जवाब किसी के पास नहीं थे।
उधर करन सिंह के घर में भी मातम पसरा है। करन दिहाड़ी मजदूरी करते थे और पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर थे। उनकी पत्नी सेनू और तीन साल का बेटा भी इसी हादसे में चल बसे। बड़ा बेटा विक्की (8) अब अनाथ हो चुका है। परिजन उसे संभालते रहे, पर उसके मासूम सवालों के जवाब किसी के पास नहीं थे।
पुलिस मौके पर मदद के लिए पहुंची थी
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
दिहाड़ी मजदूरी करते थे दोनों
मटेरा। सड़क हादसे में दम तोड़ने वाले करन सिंह और उनके बहनोई चंद्रकिशोर दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। चंद्रकिशोर अपने घर में कमाने वाला अकेला था। उसकी मौत के बाद परिवार बेसहारा हो गया है। गांव के लोगों का कहना है कि पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
रात में ससुराल में रुका था करन
खैरीघाट के ललुही गांव निवासी करन सिंह अपनी पत्नी सेनू और बेटे विष्णु के साथ कोटवाधाम मेले में जाने के लिए मंगलवार शाम को ससुराल भगवानपुर नानपारा पहुंचा था। भोर में 5 बजे वह अपने साले चंद्र किशोर, पत्नी और बेटे के साथ एक ही बाइक पर सवार होकर कोटवा धाम मेले के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में ही हादसा हो गया।
मटेरा। सड़क हादसे में दम तोड़ने वाले करन सिंह और उनके बहनोई चंद्रकिशोर दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। चंद्रकिशोर अपने घर में कमाने वाला अकेला था। उसकी मौत के बाद परिवार बेसहारा हो गया है। गांव के लोगों का कहना है कि पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
रात में ससुराल में रुका था करन
खैरीघाट के ललुही गांव निवासी करन सिंह अपनी पत्नी सेनू और बेटे विष्णु के साथ कोटवाधाम मेले में जाने के लिए मंगलवार शाम को ससुराल भगवानपुर नानपारा पहुंचा था। भोर में 5 बजे वह अपने साले चंद्र किशोर, पत्नी और बेटे के साथ एक ही बाइक पर सवार होकर कोटवा धाम मेले के लिए निकले थे, लेकिन रास्ते में ही हादसा हो गया।