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Bahraich: मां की चिता को मुखाग्नि देते ही बह निकले बेटी के आंसू, नम हो गईं सैकड़ों आंखें, बिलख पड़ी श्रीयांशी

Tue, 11 Aug 2026 07:44 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, जरवलरोड (बहराइच)
अमर उजाला नेटवर्क, जरवलरोड (बहराइच) Published by: Ishwar Ashish Bhartiya Updated Tue, 11 Aug 2026 07:44 PM IST
सार

19 साल की श्रीयांशी ने जैसे ही मां की चिता को मुखाग्नि दी वहां मौजूद लोग अपनी भावनाएं नहीं रोक सके। बेटी के दर्द को देखकर उनकी आंखें नम हो गईं। वहीं, मां हमेशा के लिए चली गई... ये एहसास होते ही श्रीयांशी खुद को नहीं संभाल सकी और बिलख पड़ी।

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Bahraich: Daughter bursts into tears upon lighting her mother's funeral pyre
अपनी मां की चिता को मुखाग्नि देती श्रीयांशी। - फोटो : amar ujala

विस्तार

मां की अर्थी के पीछे चल रही 19 वर्षीय श्रीयांशी की आंखों में मंगलवार को ऐसा दर्द था, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल था। पैतृक गांव करमुल्लापुर में मां अर्चना सिंह की चिता को मुखाग्नि देने की रस्म पूरी करते ही श्रीयांशी के आंसू बह निकले। वह मां को याद कर बिलख पड़ी। बेटी का यह दर्द देखकर अंतिम संस्कार में मौजूद सैकड़ों लोगों की आंखें भी नम हो गईं। जिस मां ने सात साल तक अकेले बेटी को संभाला, उसी मां को बेटी ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।

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करमुल्लापुर निवासी कन्हैया सिंह की बेटी अर्चना सिंह की जिंदगी पिछले कई वर्षों से संघर्षों से भरी रही। करीब सात वर्ष पहले पति अजय सिंह से तलाक के बाद उन्होंने अपनी इकलौती बेटी श्रीयांशी की जिम्मेदारी खुद संभाली। भाई न होने के कारण मायके की जिम्मेदारियां भी उनके कंधों पर थीं। परिवार और बेटी की जिम्मेदारी के बीच उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।
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अर्चना नौकरी के साथ बेटी के भविष्य को संवारने में जुटी रहीं। वह बलरामपुर स्थित सिविल जज जूनियर डिविजन एफटीसी/सीएडब्ल्यू फास्ट ट्रैक कोर्ट में पेशकार के पद पर तैनात थीं। नौकरी के साथ बेटी की परवरिश और मायके की जिम्मेदारियां निभाते हुए उन्होंने जीवन का अधिकांश समय परिवार के लिए समर्पित कर दिया।

मौत की खबर सामने आते ही मच गया कोहराम

Bahraich: Daughter bursts into tears upon lighting her mother's funeral pyre
अंतिम संस्कार के समय मौजूद परिजन। - फोटो : amar ujala

सोमवार सुबह बलरामपुर स्थित किराये के मकान में उनकी मौत की खबर सामने आई तो परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पैतृक गांव पहुंची तो हर कोई स्तब्ध रह गया। मंगलवार को अर्चना का पार्थिव शरीर करमुल्लापुर पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए ग्रामीणों और परिचितों की भीड़ उमड़ पड़ी।

अंतिम संस्कार की रस्म शुरू हुई तो श्रीयांशी मां के पार्थिव शरीर के पास खड़ी रही। चिता को मुखाग्नि देने के बाद जैसे ही उसे मां के हमेशा के लिए चले जाने का अहसास हुआ, उसकी आंखों से आंसू बह निकले। वह बिलखकर रोने लगी। आसपास मौजूद लोगों ने उसे संभालने की कोशिश की, लेकिन मां को खोने का दर्द उसकी आंखों से लगातार छलकता रहा। सांत्वना देने वाले लोगों की आंखे भी नम हो गईं।

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