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ढाई लाख की आबादी फिर भी सीवर लाइन नदारद
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बहराइच। शहरी क्षेत्र की आबादी ढाई लाख से अधिक हो जाने के बावजूद सीवर लाइन विहीन है। आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के बाद भी शहरी इलाके में रहने वाले सीवर लाइन जैसी जरूरी मूलभूत सुविधा से भी वंचित बने हैं। सीवर लाइन की नियोजित व्यवस्था न हो पाने से सीवर का गंदा पानी नालों के माध्यम से भूमिगत जल को भी प्रदूषित कर शहर के बाहरी इलाकों को भी गंदा बना रहा है।
शासन स्तर से नगर निकाय क्षेत्र की आबादी एक लाख से अधिक होने पर अनिवार्य तौर पर सीवर लाइन की स्वीकृति कर इस बिछाने का कार्य होता है। इसके बावजूद शहरी क्षेत्र की आबादी दो लाख से अधिक हो जाने के बावजूद पालिका प्रशासन अंग्रेजों के शासनकाल में बिछी सीवर लाइन के सहारे ही काम चलाने को मजबूर बना है। आजादी के बाद पूरी तरह अस्तित्व में आया जिले का नगर पालिका सदर आज भी अंग्रेजों के समय बनाई गई सीवर व्यवस्था के भरोसे ही चल रहा है। तेजी से विस्तारित होते शहरी इलाके के बावजूद यहां के निवासियों को सीवर लाइन जैसी मूलभूत सुविधा तक मुहैया नहीं है। अंग्रेजी हुकूमत में शहर के मुख्य बाजार में करीब तीन किलोमीटर की परिधि में बिछाई गई एक मात्र सीवर लाइन भी वर्तमान में पूरी तरह बदहाल व जर्जर अवस्था में है। इस सीवर लाइन का कोई नजरी नक्शा तक पालिका प्रशासन के पास नहीं है।
नगर पालिका क्षेत्र की साठ फीसदी तक की आबादी भी घरों में टैंक बनवाने की व्यवस्था के भरोसे घरों में शौचालय बनवाए है। जबकि कुछ इलाकों में नागरिक स्वयं से पाइप लाइन डालकर सीवर का गंदा पानी नालों के माध्यम से निकाल रहे हैं। सीवर लाइन की व्यवस्था न होने से प्रदूषित हो रहा भूमिगत जल भी पेयजल की पाइप लाइन के सहारे लोगों के घरों में पहुंचकर परेशानी को बढ़ा रहा है। पालिका प्रशासन की माने तो शहर में सीवर लाइन बिछाने का प्रस्ताव शासन तक भेजने का उनके पास कोई अधिकार नहीं है।
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शहर में कहीं भी पालिका प्रशासन की ओर से सीवर लाइन का निर्माण नहीं कराया गया है। इसके लिए न कभी कोई प्रस्ताव बना और न ही इसके लिए शासन की ओर से कोई धन आवंटित हुआ। सीवर लाइन का प्रस्ताव शासन तक भेजने का पालिका प्रशासन के पास कोई अधिकार नहीं हैं।
बालमुकुंद मिश्रा, ईओ, नगर पालिका परिषद
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शासन स्तर से नगर निकाय क्षेत्र की आबादी एक लाख से अधिक होने पर अनिवार्य तौर पर सीवर लाइन की स्वीकृति कर इस बिछाने का कार्य होता है। इसके बावजूद शहरी क्षेत्र की आबादी दो लाख से अधिक हो जाने के बावजूद पालिका प्रशासन अंग्रेजों के शासनकाल में बिछी सीवर लाइन के सहारे ही काम चलाने को मजबूर बना है। आजादी के बाद पूरी तरह अस्तित्व में आया जिले का नगर पालिका सदर आज भी अंग्रेजों के समय बनाई गई सीवर व्यवस्था के भरोसे ही चल रहा है। तेजी से विस्तारित होते शहरी इलाके के बावजूद यहां के निवासियों को सीवर लाइन जैसी मूलभूत सुविधा तक मुहैया नहीं है। अंग्रेजी हुकूमत में शहर के मुख्य बाजार में करीब तीन किलोमीटर की परिधि में बिछाई गई एक मात्र सीवर लाइन भी वर्तमान में पूरी तरह बदहाल व जर्जर अवस्था में है। इस सीवर लाइन का कोई नजरी नक्शा तक पालिका प्रशासन के पास नहीं है।
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नगर पालिका क्षेत्र की साठ फीसदी तक की आबादी भी घरों में टैंक बनवाने की व्यवस्था के भरोसे घरों में शौचालय बनवाए है। जबकि कुछ इलाकों में नागरिक स्वयं से पाइप लाइन डालकर सीवर का गंदा पानी नालों के माध्यम से निकाल रहे हैं। सीवर लाइन की व्यवस्था न होने से प्रदूषित हो रहा भूमिगत जल भी पेयजल की पाइप लाइन के सहारे लोगों के घरों में पहुंचकर परेशानी को बढ़ा रहा है। पालिका प्रशासन की माने तो शहर में सीवर लाइन बिछाने का प्रस्ताव शासन तक भेजने का उनके पास कोई अधिकार नहीं है।
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शहर में कहीं भी पालिका प्रशासन की ओर से सीवर लाइन का निर्माण नहीं कराया गया है। इसके लिए न कभी कोई प्रस्ताव बना और न ही इसके लिए शासन की ओर से कोई धन आवंटित हुआ। सीवर लाइन का प्रस्ताव शासन तक भेजने का पालिका प्रशासन के पास कोई अधिकार नहीं हैं।
बालमुकुंद मिश्रा, ईओ, नगर पालिका परिषद