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हादसों के लिहाज से बहराइच-गोंडा मार्ग सबसे खतरनाक
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बहराइच। मोतीपुर थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात हुए खतरनाक सड़क हादसे में सात श्रद्धालुओं की जान जाने के बाद अब आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। सड़क हादसों के बाद विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमों को गौर किया जाए तो सर्वाधिक हादसे गोंडा-बहराइच मार्ग पर सामने आते हैं। अन्य मार्गों पर भी दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन इनका औसत कम है।
इस साल नौ फरवरी से 12 मई के बीच पयागपुर थाने में 14 मुकदमे दर्ज हुए हैं। विशेश्वरगंज थाने में 15 जनवरी से 12 मई के बीच मार्ग दुर्घटनाओं के छह मामले दर्ज हुए हैं। थाना कोतवाली देहात में नौ जनवरी से 30 अप्रैल के बीच 18 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। ये हादसे गोंड़ा-बहराइच मार्ग के हैं। लखनऊ मार्ग पर गौर किया जाए तो फखरपुर थाने में एक तो कैसरगंज थाने में 12 मामले दर्ज हुए हैं। लखनऊ रोड पर स्थित जरवल रोड थाने में भी 17 जनवरी से 20 मई के बीच 14 मुकदमे दर्ज हुए हैं।
मार्ग दुर्घटनाओं के सात मुकदमे बौंडी थाने में भी दर्ज हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर वाले रुपईडीहा मार्ग की बात की जाए तो नानपारा थाने में जनवरी से अब तक 17 मामले दर्ज हुए हैं। रिसिया थाने में सात और रुपईडीहा थाने में मार्ग दुर्घटना के 10 मामले दर्ज हुए हैं। करनैलगंज से जुड़ने वाली हुजूरपुर रोड पर हादसों के पांच मामले इस साल दर्ज हुए हैं। सीतापुर मार्ग पर भी दुर्घटनाएं कम नहीं हुई हैं।
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जनवरी से लेकर मई के बीच रामगांव थाने में अब तक नौ मामले मार्ग दुर्घटना के दर्ज हो चुके हैं। सुजौली, मोतीपुर आदि थानों में पांच से कम मामले हैं। थानावार आंकड़ों पर गौर किया जाए तो बहराइच-गोंडा मार्ग बहुत खतरनाक है। विश्व बैंक की फंडिंग से इस मार्ग के चौड़ीकरण का प्रस्ताव पास हुआ है, लेकिन चौड़ीकरण से दुर्घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। जानकारों के मुताबिक, अब इस मार्ग का फोरलेन होना बेहद जरूरी है।
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इस साल नौ फरवरी से 12 मई के बीच पयागपुर थाने में 14 मुकदमे दर्ज हुए हैं। विशेश्वरगंज थाने में 15 जनवरी से 12 मई के बीच मार्ग दुर्घटनाओं के छह मामले दर्ज हुए हैं। थाना कोतवाली देहात में नौ जनवरी से 30 अप्रैल के बीच 18 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। ये हादसे गोंड़ा-बहराइच मार्ग के हैं। लखनऊ मार्ग पर गौर किया जाए तो फखरपुर थाने में एक तो कैसरगंज थाने में 12 मामले दर्ज हुए हैं। लखनऊ रोड पर स्थित जरवल रोड थाने में भी 17 जनवरी से 20 मई के बीच 14 मुकदमे दर्ज हुए हैं।
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मार्ग दुर्घटनाओं के सात मुकदमे बौंडी थाने में भी दर्ज हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर वाले रुपईडीहा मार्ग की बात की जाए तो नानपारा थाने में जनवरी से अब तक 17 मामले दर्ज हुए हैं। रिसिया थाने में सात और रुपईडीहा थाने में मार्ग दुर्घटना के 10 मामले दर्ज हुए हैं। करनैलगंज से जुड़ने वाली हुजूरपुर रोड पर हादसों के पांच मामले इस साल दर्ज हुए हैं। सीतापुर मार्ग पर भी दुर्घटनाएं कम नहीं हुई हैं।
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जनवरी से लेकर मई के बीच रामगांव थाने में अब तक नौ मामले मार्ग दुर्घटना के दर्ज हो चुके हैं। सुजौली, मोतीपुर आदि थानों में पांच से कम मामले हैं। थानावार आंकड़ों पर गौर किया जाए तो बहराइच-गोंडा मार्ग बहुत खतरनाक है। विश्व बैंक की फंडिंग से इस मार्ग के चौड़ीकरण का प्रस्ताव पास हुआ है, लेकिन चौड़ीकरण से दुर्घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। जानकारों के मुताबिक, अब इस मार्ग का फोरलेन होना बेहद जरूरी है।