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सिंहपुर गांव के आनंद को यूपीएससी में 206वीं रैंक
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बहराइच। करत-करत अभ्यास ते, जड़मति होत सुजान, रसरी आवत जात ते, सिल पर परत निशान। हुजूरपुर ब्लॉक के सिंहपुर गांव निवासी किसान के बेटे आनंद सिंह ने इन पंक्तियों को चरितार्थ कर दिया। लगातार कठिन परिश्रम के दम पर आखिरकार यूपीएसएसी में 206वीं रैंक हासिल की। आनंद की सफलता से उनके गांव सिंहपुर में खुशी का माहौल है। गांव में सभी एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दे रहे हैं।
हुजूरपुर ब्लॉक के सिंहपुर निवासी आनंद सिंह पुत्र मधुरेश सिंह ने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली है। आनंद को 206वीं रैंक मिली है। बेटे की इस सफलता से गदगद पिता मधुरेश ने बताया कि आनंद का शुरू से ही आईएएस अधिकारी बनने का सपना था।
उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा हुजूरपुर ब्लॉक स्थित ज्ञान विद्या मंदिर से पूरी की। यहां से हाईस्कूल तक की पढ़ाई करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए लखनऊ चले गये। इंटरमीडिएट की परीक्षा इन्होंने लखनऊ के नेशनल इंटर कॉलेज से पास की। इसके बाद आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और स्नातक की पढ़ाई पूरी की। 2017 में दिल्ली गये और यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। पहली सफलता उन्हें 2019 में मिली और उन्होंने यूपीपीसीएस की परीक्षा पास कर ली। इसके बाद 2020 में वह आईआरएस अधिकारी बने, लेकिन उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी। आखिरकार इस बार यूपीएससी की परीक्षा में 206 वीं रैंक हासिलकर जिले का मान बढ़ाया।
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आनंद घर में सबसे छोटे हैं। उनसे बड़े अनुज सिंह हैं। भाई को अधिकारी बनाने के लिए अनुज ने खुद सरकारी नौकरी का ख्वाब छोड़ दिया। उन्होंने प्राइवेट नौकरी कर आनंद की पढ़ाई का पूरा खर्च वहन किया। अनुज सिंह ने बताया कि इस सफलता ने आनंद के साथ ही उनका सपना भी पूरा किया है।
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हुजूरपुर ब्लॉक के सिंहपुर निवासी आनंद सिंह पुत्र मधुरेश सिंह ने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली है। आनंद को 206वीं रैंक मिली है। बेटे की इस सफलता से गदगद पिता मधुरेश ने बताया कि आनंद का शुरू से ही आईएएस अधिकारी बनने का सपना था।
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उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा हुजूरपुर ब्लॉक स्थित ज्ञान विद्या मंदिर से पूरी की। यहां से हाईस्कूल तक की पढ़ाई करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए लखनऊ चले गये। इंटरमीडिएट की परीक्षा इन्होंने लखनऊ के नेशनल इंटर कॉलेज से पास की। इसके बाद आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में दाखिला लिया और स्नातक की पढ़ाई पूरी की। 2017 में दिल्ली गये और यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। पहली सफलता उन्हें 2019 में मिली और उन्होंने यूपीपीसीएस की परीक्षा पास कर ली। इसके बाद 2020 में वह आईआरएस अधिकारी बने, लेकिन उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी। आखिरकार इस बार यूपीएससी की परीक्षा में 206 वीं रैंक हासिलकर जिले का मान बढ़ाया।
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आनंद घर में सबसे छोटे हैं। उनसे बड़े अनुज सिंह हैं। भाई को अधिकारी बनाने के लिए अनुज ने खुद सरकारी नौकरी का ख्वाब छोड़ दिया। उन्होंने प्राइवेट नौकरी कर आनंद की पढ़ाई का पूरा खर्च वहन किया। अनुज सिंह ने बताया कि इस सफलता ने आनंद के साथ ही उनका सपना भी पूरा किया है।