{"_id":"6259b0ae6f434d38127ab12f","slug":"bahraich-bahraich-news-lko626282369","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंडी के दाम से परवान नहीं चढ़ पा रही सरकारी खरीद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंडी के दाम से परवान नहीं चढ़ पा रही सरकारी खरीद
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बहराइच। गेहूं खरीद के लिए जिले में बनाए गए 160 क्रय केंद्रों पर अब भी सन्नाटे की स्थिति देखने को मिल रही है जबकि प्राइवेट खरीदारों की दुकानें गुलजार हैं। आलम यह है कि एक अप्रैल से शुरू हुई गेहूं खरीद के 15 दिन बीत जाने के बाद भी मात्र दो क्रय केंद्रों की बोहनी हुई। शेष 158 क्रय केंद्रों पर तैनात केंद्र प्रभारी अभी किसानों के आने का इंतजार कर रहे हैं। सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटे का कारण मंडी भाव ज्यादा होना बताया जा रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध का असर जिले की गेहूं खरीद पर देखने को मिल रहा है। युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की मांग बढ़ी, जिससे मंडी में गेहूं का भाव ऊपर है। इसका सीधा असर गेहूं खरीद के लिए बनाए गए सरकारी क्रय केंद्रों पर दिख रहा है। किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने से कतरा रहे हैं और सीधे मंडी में गेहूं बेच रहे हैं। बताते चलें कि गेहूं खरीद के लिए जिले में खाद्य एवं रसद विभाग के 15, पीसीएफ के 86, पीसीयू के 37, यूपीएसएस के 20 व भारतीय खाद्य निगम के दो समेत 160 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं।
यहां बीते एक अप्रैल से खरीद शुरू हो गयी है, लेकिन मंडी भाव ज्यादा होने से किसान क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं। जिले के मात्र दो क्रय केंद्रों मंडी में स्थापित खाद्य विभाग व एफसीआई के एक क्रय केंद्र पर ही अभी गेहूं खरीद हुई है। इसमें मंडी में स्थापित खाद्य विभाग के एक क्रय केंद्र पर 1195 क्विंटल व एफसीआई के एक क्रय केंद्र पर 95 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई। शेष बचे 158 क्रय केंद्रों के प्रभारी अब भी किसानों के आने व बोहनी होने का इंतजार कर रहे हैं।
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गेहूं खरीद के लिए जारी न्यूनतम समर्थन मूल्य में सरकार ने इस बार 40 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 2015 घोषित किया है, लेकिन 2014 के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि गेहूं खरीद शुरू होने के बाद से ही गेहूं का मंडी भाव सरकारी भाव से अधिक है। बीच में बस एक-दो दिन ही सरकारी रेट से मंडी रेट कम नजर आया है। गुरुवार को जहां मंडी में गेहूं का रेट 1980 था तो वहीं शुक्रवार को यह बढ़कर फिर 2020 रुपये हो गया।
मंडी रेट ज्यादा होने से किसान क्रय केंद्रों का रुख नहीं कर रहे हैं। अभी गेहूं कटाई भी कम है। किसानों से अपील है कि सरकारी रेट से अधिक भाव मिलने पर भी अपनी फसल बाहर बेंचे अन्यथा सरकारी क्रय केंद्रों पर उपज लाकर एमएसपी का लाभ उठाएं।
- संजीव सिंह, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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रूस-यूक्रेन युद्ध का असर जिले की गेहूं खरीद पर देखने को मिल रहा है। युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं की मांग बढ़ी, जिससे मंडी में गेहूं का भाव ऊपर है। इसका सीधा असर गेहूं खरीद के लिए बनाए गए सरकारी क्रय केंद्रों पर दिख रहा है। किसान सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं बेचने से कतरा रहे हैं और सीधे मंडी में गेहूं बेच रहे हैं। बताते चलें कि गेहूं खरीद के लिए जिले में खाद्य एवं रसद विभाग के 15, पीसीएफ के 86, पीसीयू के 37, यूपीएसएस के 20 व भारतीय खाद्य निगम के दो समेत 160 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं।
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यहां बीते एक अप्रैल से खरीद शुरू हो गयी है, लेकिन मंडी भाव ज्यादा होने से किसान क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे हैं। जिले के मात्र दो क्रय केंद्रों मंडी में स्थापित खाद्य विभाग व एफसीआई के एक क्रय केंद्र पर ही अभी गेहूं खरीद हुई है। इसमें मंडी में स्थापित खाद्य विभाग के एक क्रय केंद्र पर 1195 क्विंटल व एफसीआई के एक क्रय केंद्र पर 95 क्विंटल गेहूं की खरीद हुई। शेष बचे 158 क्रय केंद्रों के प्रभारी अब भी किसानों के आने व बोहनी होने का इंतजार कर रहे हैं।
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गेहूं खरीद के लिए जारी न्यूनतम समर्थन मूल्य में सरकार ने इस बार 40 रुपये की बढ़ोतरी कर इसे 2015 घोषित किया है, लेकिन 2014 के बाद पहली बार ऐसा हुआ कि गेहूं खरीद शुरू होने के बाद से ही गेहूं का मंडी भाव सरकारी भाव से अधिक है। बीच में बस एक-दो दिन ही सरकारी रेट से मंडी रेट कम नजर आया है। गुरुवार को जहां मंडी में गेहूं का रेट 1980 था तो वहीं शुक्रवार को यह बढ़कर फिर 2020 रुपये हो गया।
मंडी रेट ज्यादा होने से किसान क्रय केंद्रों का रुख नहीं कर रहे हैं। अभी गेहूं कटाई भी कम है। किसानों से अपील है कि सरकारी रेट से अधिक भाव मिलने पर भी अपनी फसल बाहर बेंचे अन्यथा सरकारी क्रय केंद्रों पर उपज लाकर एमएसपी का लाभ उठाएं।
- संजीव सिंह, जिला खाद्य विपणन अधिकारी