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लोहड़ी की बधाई देकर काटा था फोन...आ गई शहीद होने की खबर
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बहराइच। 13 जनवरी की दोपहर लगभग दो बजे माता-पिता व अन्य परिजनों को सीमा पर तैनात जवान ने लोहड़ी की बधाई देने के लिए फोन किया। हंसी-खुशी परिवारवालों से बात हुई तभी बेटे ने मां को लोहड़ी की बधाई देते हुए फोन रखने की बात कही। इस पर मां ने कहा था कि बेटा आज तूने क्या खाया है और शाम को कुछ अच्छा खा लेना। बेटे ने कहा था कि मां तीन बजे से ड्यूटी है, अब जा रहा हूं। आकर खाने के बारे में बात करता हूं। मां को इंतजार था कि बेटा शाम को फोन करेगा... लेकिन शायद यह किस्मत को मंजूर नहीं था। शाम को बेटे के शहीद होने की सूचना मिली।
रिसिया थानाक्षेत्र के सिखनपुरवा गांव निवासी 24 वर्षीय सर्वजीत सिंह के घर में अब आंखों से निकल रहे आंसू, सिसकियां और सांत्वना देने वालों की कतार ही दिख रही है। मात्र दो दिन पहले इसी घर में लोहड़ी की खुशियों से घर गुलजार था और सेना में तैनात बेटे सर्वजीत का फोन आने पर खुशियों में चार चांद लग गए थे। आंखों में आंसू समेटे मां कहती हैं कि मेरे लाल ने दोपहर में फोन कर लोहड़ी की बधाई दी थी। मैंने अपने लाल को अच्छा खाना खाने के लिए कहा था तो उसने कहा कि मां आज मेरी तीन बजे से ड्यूटी है। अभी फोन रख रहा हूं। ड्यूटी से लौटकर आते ही फोन करूंगा और खाना खाने से लेकर तेरे सारे सवालों का जवाब दूंगा। बेटे ने मुझे लोहड़ी की बधाई दी और फोन काट दिया था। हम लोग त्योहार मनाने में लगे रहे... यह कहते हुए मां की आंखों से आंसुओं की धार फूट पड़ी।
इसके बाद वह धीरे से बोलीं, फोन बजा और बेटे के शहीद होने की खबर आई। दुनिया से मेरे लाल के विदा होने की खबर सुनते ही घर में लोहड़ी की सारी खुशियां काफूर हो गईं। शनिवार को जवान के घर लोगों का सुबह से ही तांता लगा रहा। हर कोई पार्थिव शरीर आने के इंतजार में रहा। माता-पिता व अन्य परिजनों की आंखें हमेशा के लिए सो चुके बेटे को देखने के लिए पथरा चुकी हैं। मां रो-रोकर बेहोश हो रही हैं। लोग सांत्वना देकर मां को समझाते रहे।
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रिश्तेदारों के बीच बैठी शहीद जवान की मां यह कहकर चीखती-चिल्लाती रहीं कि मैं अपने लाल को एक बार जिंदा देखना चाहती हूं। एक बार उसको गले लगाना चाहती हूं। मेरी चिंता करने वाला मेरा लाल मुझको छोड़कर कैसे चला गया। कोई तो मेरे लाल को जिंदा लाकर मेरे सामने खड़ा कर दो। हर कोई मां को सांत्वना देता रहा।
हर कोई सर्वजीत के घर की ओर भागता रहा। घरों में लोगों का तांता लगा रहा। रिश्तेदारों के आते ही रोना-पीटना और तेज हो जाता। सर्वजीत के पिता सुरेंद्र सिंह सबको समझाते रहे। आंखों से आंसू न गिरें, इसके लिए वह किसी से आंख न मिलाकर लोगों को गले लगाकर समझाते रहे। पिता अपने दर्द को छिपाकर लोगों को समझाते रहे।
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रिसिया थानाक्षेत्र के सिखनपुरवा गांव निवासी 24 वर्षीय सर्वजीत सिंह के घर में अब आंखों से निकल रहे आंसू, सिसकियां और सांत्वना देने वालों की कतार ही दिख रही है। मात्र दो दिन पहले इसी घर में लोहड़ी की खुशियों से घर गुलजार था और सेना में तैनात बेटे सर्वजीत का फोन आने पर खुशियों में चार चांद लग गए थे। आंखों में आंसू समेटे मां कहती हैं कि मेरे लाल ने दोपहर में फोन कर लोहड़ी की बधाई दी थी। मैंने अपने लाल को अच्छा खाना खाने के लिए कहा था तो उसने कहा कि मां आज मेरी तीन बजे से ड्यूटी है। अभी फोन रख रहा हूं। ड्यूटी से लौटकर आते ही फोन करूंगा और खाना खाने से लेकर तेरे सारे सवालों का जवाब दूंगा। बेटे ने मुझे लोहड़ी की बधाई दी और फोन काट दिया था। हम लोग त्योहार मनाने में लगे रहे... यह कहते हुए मां की आंखों से आंसुओं की धार फूट पड़ी।
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इसके बाद वह धीरे से बोलीं, फोन बजा और बेटे के शहीद होने की खबर आई। दुनिया से मेरे लाल के विदा होने की खबर सुनते ही घर में लोहड़ी की सारी खुशियां काफूर हो गईं। शनिवार को जवान के घर लोगों का सुबह से ही तांता लगा रहा। हर कोई पार्थिव शरीर आने के इंतजार में रहा। माता-पिता व अन्य परिजनों की आंखें हमेशा के लिए सो चुके बेटे को देखने के लिए पथरा चुकी हैं। मां रो-रोकर बेहोश हो रही हैं। लोग सांत्वना देकर मां को समझाते रहे।
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रिश्तेदारों के बीच बैठी शहीद जवान की मां यह कहकर चीखती-चिल्लाती रहीं कि मैं अपने लाल को एक बार जिंदा देखना चाहती हूं। एक बार उसको गले लगाना चाहती हूं। मेरी चिंता करने वाला मेरा लाल मुझको छोड़कर कैसे चला गया। कोई तो मेरे लाल को जिंदा लाकर मेरे सामने खड़ा कर दो। हर कोई मां को सांत्वना देता रहा।
हर कोई सर्वजीत के घर की ओर भागता रहा। घरों में लोगों का तांता लगा रहा। रिश्तेदारों के आते ही रोना-पीटना और तेज हो जाता। सर्वजीत के पिता सुरेंद्र सिंह सबको समझाते रहे। आंखों से आंसू न गिरें, इसके लिए वह किसी से आंख न मिलाकर लोगों को गले लगाकर समझाते रहे। पिता अपने दर्द को छिपाकर लोगों को समझाते रहे।