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एमएसपी की गारंटी तक जारी रहेगी लड़ाई
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बहराइच। तीनों कृषि कानून वापस लेने के प्रधानमंत्री के एलान के बाद भले ही किसानों में एक जीत उत्साह उभर कर सामने आ गया हो, लेकिन अब भी मृत किसानों के परिजनों की लड़ाई जारी रहेगी। मृत किसानों के परिजन बिल वापस लेने के एलान के बाद खुश है, लेकिन एमएसपी की गारंटी की मांग पर वे अभी डटे हैं। परिजनों का कहना है कि जिस वजह से बेटे ने शहादत दी है जब तक वह मांग भी पूरी नहीं हो जाएगी तब तक शांति नहीं मिलेगी।
तीनों कानून वापस लेने की मांग को लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में अलग-अलग समय पर किसान प्रदर्शन करते रहे। बीते दिनों लखीमपुर में बिल के विरोध में प्रदर्शन के दौरान पांच लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें दो किसान बहराइच के शामिल रहे। जिले के किसानों की मौत के बाद काफी हंगामा हुआ। राकेश टिकैत के आने के बाद किसान के शव का अंतिम संस्कार किया गया। शुक्रवार को गुरुनानक जयंती पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कानूनों को वापस लेने का एलान किया तो हर तरफ खुशी का माहौल छा गया। किसान अपनी जीत का जश्न मनाने लगे, लेकिन जिले के मृत किसानों के परिजनों ने इस जीत को अभी आधा बताया है।
मटेरा थाना क्षेत्र के मोहरनिया गांव निवासी गुरसेवक के छोटे भाई गुरविंदर सिंह की बीते तीन अक्तूबर को लखीमपुर खीरी के तिकोनिया में प्रदर्शन के दौरान मौत हो गई थी। शुक्रवार को पीएम की घोषणा के बाद मृत किसान के भाई ने कहा कि चुनाव नजदीक है तो प्रधानमंत्री ने कानून वापस लेने का फैसला ले लिया है, लेकिन इस फैसले से अभी आधी जीत हुई है। एमएसपी की गारंटी पीएम द्वारा नहीं दी गई है। जब किसानों की मांगों को सरकार पूरी कर देगी तब शहीद भाई के आत्मा को शांति मिलेगी। प्रधानमंत्री के फैसले की सराहना करता हूं, लेकिन मांग पूरी होने तक लड़ाई जारी रहेगी।
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लखीमपुर खीरी के तिकोनिया गांव में प्रदर्शन के दौरान हुई नानपारा के बंजारनटाड़ा किसान दलजीत सिंह की मौत के बाद परिवार केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र के इस्तीफा का मांग कर रहा है। मृत किसान के भाई जगजीत सिंह ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री समय से कानून वापस ले लेते तो किसानों को प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं पड़ती। किसान शहीद न होते। उनकी कमी को हम कभी नहीं पूरा कर सकते। हम लोग पूरी खुशी तभी मनाएंगे जब इस घटना के जिम्मेदार गृह राज्यमंत्री का इस्तीफा हो जाएगा।
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तीनों कानून वापस लेने की मांग को लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में अलग-अलग समय पर किसान प्रदर्शन करते रहे। बीते दिनों लखीमपुर में बिल के विरोध में प्रदर्शन के दौरान पांच लोगों की मौत हो गई थी, जिसमें दो किसान बहराइच के शामिल रहे। जिले के किसानों की मौत के बाद काफी हंगामा हुआ। राकेश टिकैत के आने के बाद किसान के शव का अंतिम संस्कार किया गया। शुक्रवार को गुरुनानक जयंती पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कानूनों को वापस लेने का एलान किया तो हर तरफ खुशी का माहौल छा गया। किसान अपनी जीत का जश्न मनाने लगे, लेकिन जिले के मृत किसानों के परिजनों ने इस जीत को अभी आधा बताया है।
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मटेरा थाना क्षेत्र के मोहरनिया गांव निवासी गुरसेवक के छोटे भाई गुरविंदर सिंह की बीते तीन अक्तूबर को लखीमपुर खीरी के तिकोनिया में प्रदर्शन के दौरान मौत हो गई थी। शुक्रवार को पीएम की घोषणा के बाद मृत किसान के भाई ने कहा कि चुनाव नजदीक है तो प्रधानमंत्री ने कानून वापस लेने का फैसला ले लिया है, लेकिन इस फैसले से अभी आधी जीत हुई है। एमएसपी की गारंटी पीएम द्वारा नहीं दी गई है। जब किसानों की मांगों को सरकार पूरी कर देगी तब शहीद भाई के आत्मा को शांति मिलेगी। प्रधानमंत्री के फैसले की सराहना करता हूं, लेकिन मांग पूरी होने तक लड़ाई जारी रहेगी।
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लखीमपुर खीरी के तिकोनिया गांव में प्रदर्शन के दौरान हुई नानपारा के बंजारनटाड़ा किसान दलजीत सिंह की मौत के बाद परिवार केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र के इस्तीफा का मांग कर रहा है। मृत किसान के भाई जगजीत सिंह ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री समय से कानून वापस ले लेते तो किसानों को प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं पड़ती। किसान शहीद न होते। उनकी कमी को हम कभी नहीं पूरा कर सकते। हम लोग पूरी खुशी तभी मनाएंगे जब इस घटना के जिम्मेदार गृह राज्यमंत्री का इस्तीफा हो जाएगा।