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Bahraich News: सरकारी पटल पर प्राइवेट व्यक्ति की तैनाती, जांच के आदेश
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मिहींपुरवा। मिहींपुरवा तहसील कार्यालय में विभिन्न पटलों पर प्राइवेट व्यक्तियों से काम कराने के आरोपों को लेकर की गई शिकायत अब उच्च स्तर तक पहुंच गई है। आईजीआरएस पर शिकायत के निस्तारण से असंतुष्ट शिकायतकर्ता द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र भेजे जाने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। पूरे प्रकरण की जांच जिलाधिकारी को सौंपी गई है।
मिहींपुरवा नगर पंचायत निवासी अशोक कुमार उर्फ गुड्डू लोधी ने समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कराई थी कि तहसील कार्यालय के अधिकांश पटलों पर अधिकारी अपने-अपने प्राइवेट व्यक्तियों से कार्य करवा रहे हैं। शिकायत में संदीप जायसवाल का नाम भी प्रमुखता से दर्ज कराया गया था। इस पर एसडीएम मिहींपुरवा द्वारा दी गई आख्या में कहा गया कि जिन व्यक्तियों के नाम शिकायत में हैं, वे तहसील कार्यालय में कार्यरत नहीं हैं।
आख्या से असंतुष्ट होकर शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजते हुए आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक एसडीएम कार्यालय में बैठकर मुकदमे से जुड़े कार्य करता है। उन्होंने साक्ष्य के रूप में मोबाइल नंबर की लोकेशन के आधार पर जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
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मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा शिकायत को गंभीर मानते हुए जांच जिलाधिकारी को सौंप दी गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि गलत आख्या लगाकर मामला निस्तारित कर दिया गया था, लेकिन अब मुख्यमंत्री स्तर से जांच के आदेश मिलने के बाद उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है।
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मिहींपुरवा नगर पंचायत निवासी अशोक कुमार उर्फ गुड्डू लोधी ने समाधान दिवस में शिकायत दर्ज कराई थी कि तहसील कार्यालय के अधिकांश पटलों पर अधिकारी अपने-अपने प्राइवेट व्यक्तियों से कार्य करवा रहे हैं। शिकायत में संदीप जायसवाल का नाम भी प्रमुखता से दर्ज कराया गया था। इस पर एसडीएम मिहींपुरवा द्वारा दी गई आख्या में कहा गया कि जिन व्यक्तियों के नाम शिकायत में हैं, वे तहसील कार्यालय में कार्यरत नहीं हैं।
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आख्या से असंतुष्ट होकर शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजते हुए आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक एसडीएम कार्यालय में बैठकर मुकदमे से जुड़े कार्य करता है। उन्होंने साक्ष्य के रूप में मोबाइल नंबर की लोकेशन के आधार पर जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
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मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा शिकायत को गंभीर मानते हुए जांच जिलाधिकारी को सौंप दी गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि गलत आख्या लगाकर मामला निस्तारित कर दिया गया था, लेकिन अब मुख्यमंत्री स्तर से जांच के आदेश मिलने के बाद उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है।