{"_id":"687158e5fc9b57049f08f1f2","slug":"an-underpass-will-be-constructed-at-the-railway-crossing-at-a-cost-of-rs-621-crore-bahraich-news-c-98-1-slko1011-133464-2025-07-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bahraich News: 6.21 करोड़ से रेलवे क्रॉसिंग पर बनेगा अंडरपास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bahraich News: 6.21 करोड़ से रेलवे क्रॉसिंग पर बनेगा अंडरपास
Sat, 12 Jul 2025 12:03 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Sat, 12 Jul 2025 12:03 AM IST
विज्ञापन
बहराइच-गोंडा रेल लाइन पर स्थित बंद 41सी रेलवे क्रॉसिंग।
बहराइच। चार मोहल्लों के 30 हजार से अधिक आबादी की 11 साल से चली आ रही मांग बहुत जल्द पूरी होने वाली है। रेल प्रशासन से बंद पड़ी रेलवे क्रॉसिंग 41 सी पर अंडरपास बनाने की कार्ययोजना बनाई है। पूर्वोत्तर रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक ने अंडरपास के लिए 6.21 करोड़ की कार्ययोजना मंजूरी के लिए शासन को भेजी है। शासन से अनुमति मिलते ही इसका निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
रेलवे प्रशासन की ओर से साल 2014 में रेलवे क्रॉसिंग 41 सी को बंद कर दिया गया था। इसके चलते बख्शीपुरा नई बस्ती, घोसिन बगिया, चमारनपुरवा व दयालबाग के लगभग 30,000 लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया था। यही नहीं दरगाह क्षेत्र में लगने वाले भीषण जाम से बचने के लिए इस मार्ग से गुजरने वाले 50,000 से अधिक राहगीर भी प्रभावित हुए थे। रेलवे क्रॉसिंग बंद होने के बाद से ही स्थानीय लोग आंदोलन कर रेलवे क्रॉसिंग शुरू करवाने की मांग कर रहे थे। इसके लिए स्थानीय लोगों ने कई बार धरना प्रदर्शन किया और कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला। यही नहीं सांसद डॉ. आनंद गोंड समेत अन्य जनप्रतिनिधियों व रेलवे के उच्चाधिकारियों तक अपनी मांग रखी। साथ ही संघर्ष मोर्चा भी बनाया।
इन सब के बीच लगभग 11 साल बाद अब रेल प्रशासन ने स्थानीय लोगों की पीड़ा को समझते हुए आवागमन के लिए क्रॉसिंग के स्थान पर अंडरपास की कार्ययोजना बनाई है। इसके बाद से स्थानीय लोगोंं में खुशी का माहौल है।
विज्ञापन
क्रॉसिंग बंद होने से पांच किमी की लगानी पड़ रही दौड़
रेलवे क्रॉसिंग 41 सी बंद होने से स्थानीय लोगोंं को लगभग पांच किमी का लंबा सफर तय कर बाजार, अस्पताल, कचहरी आदि का सफर करना पड़ रहा है। यही नहीं जिस दूसरे रास्ते का प्रयोग स्थानीय मोहल्लों के लोग करते हैं, वह खस्ताहाल है और जलभराव की चपेट में है। इसके चलते स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पटरी पार करने के दौरान मां-बेटे सहित कइयों की जा चुकी है जान
रेल प्रशासन द्वारा रेलवे क्रॉसिंग 41 सी बंद किए जाने से जहां बाइक व कार सवार पांच किमी का सफर तय करते हैं तो वहीं पैदल सवार सीधे पटरी पार कर बाजार आदि पहुंचते हैं। इसके चलते कई लोग ट्रेन की चपेट में आने से हादसे का शिकार भी हुए। बीते दिनों मोहल्ला बक्शीपुरा निवासी रोशनी गुप्ता का बेटा दिव्यांश गुप्ता रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन की ओर दौड़ पड़ा था। इस दौरान बेटे को बचाने दौड़ी रोशनी भी ट्रेन की चपेट में आ गई थी और मां-बेटे की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। वहीं बक्शीपुरा की ही रहने वाली निर्मला को रेलवे ट्रैक पार करते समय दहशत में हार्ट अटैक आ गया था और उनकी मौत हो गई। इसके बाद से स्थानीय लोगों में रेलवे के प्रति भारी आक्रोश था।
आरटीआई के जवाब में मिली अंडरपास की जानकारी
मोहल्ले के लोगों की समस्या को देखते हुए बक्शीपुरा निवासी बृजेश कुमार शर्मा ने रेल विभाग से सूचना के अधिकार अधिनियम (आईटीआई) के तहत जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में वरिष्ठ मंडल इंजीनियर द्वितीय पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ ने अंडर पास निर्माण की कार्ययोजना का प्रस्ताव भेजने की जानकारी दी।
रास्ता बंद होने के बाद शुरू होने लगा था पलायन
रेलवे क्रासिंग संख्या 40 व 41 सी के बंद हो जाने के बाद से इलाके के कई लोगों ने पलायन की तैयारी भी कर ली थी। सबसे ज्यादा परेशानी डीजल पॉवर हाउस के निकट रहने वाले लोगों को थी। क्रॉसिंग बंद होने के बाद जो दूसरा रास्ता था वह जलभराव का शिकार था ऐसे में उन्हें बाजार, अस्पताल या किसी रिश्तेदार के यहां जाने के लिए कई बार सोचना पड़ता था। ऐसे में कुछ मोहल्लेवासियों ने रेलवे पटरी के उस पार घर बनवाना शुरू कर दिया था।
विज्ञापन
रेलवे प्रशासन की ओर से साल 2014 में रेलवे क्रॉसिंग 41 सी को बंद कर दिया गया था। इसके चलते बख्शीपुरा नई बस्ती, घोसिन बगिया, चमारनपुरवा व दयालबाग के लगभग 30,000 लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया था। यही नहीं दरगाह क्षेत्र में लगने वाले भीषण जाम से बचने के लिए इस मार्ग से गुजरने वाले 50,000 से अधिक राहगीर भी प्रभावित हुए थे। रेलवे क्रॉसिंग बंद होने के बाद से ही स्थानीय लोग आंदोलन कर रेलवे क्रॉसिंग शुरू करवाने की मांग कर रहे थे। इसके लिए स्थानीय लोगों ने कई बार धरना प्रदर्शन किया और कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला। यही नहीं सांसद डॉ. आनंद गोंड समेत अन्य जनप्रतिनिधियों व रेलवे के उच्चाधिकारियों तक अपनी मांग रखी। साथ ही संघर्ष मोर्चा भी बनाया।
विज्ञापन
इन सब के बीच लगभग 11 साल बाद अब रेल प्रशासन ने स्थानीय लोगों की पीड़ा को समझते हुए आवागमन के लिए क्रॉसिंग के स्थान पर अंडरपास की कार्ययोजना बनाई है। इसके बाद से स्थानीय लोगोंं में खुशी का माहौल है।
विज्ञापन
क्रॉसिंग बंद होने से पांच किमी की लगानी पड़ रही दौड़
रेलवे क्रॉसिंग 41 सी बंद होने से स्थानीय लोगोंं को लगभग पांच किमी का लंबा सफर तय कर बाजार, अस्पताल, कचहरी आदि का सफर करना पड़ रहा है। यही नहीं जिस दूसरे रास्ते का प्रयोग स्थानीय मोहल्लों के लोग करते हैं, वह खस्ताहाल है और जलभराव की चपेट में है। इसके चलते स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पटरी पार करने के दौरान मां-बेटे सहित कइयों की जा चुकी है जान
रेल प्रशासन द्वारा रेलवे क्रॉसिंग 41 सी बंद किए जाने से जहां बाइक व कार सवार पांच किमी का सफर तय करते हैं तो वहीं पैदल सवार सीधे पटरी पार कर बाजार आदि पहुंचते हैं। इसके चलते कई लोग ट्रेन की चपेट में आने से हादसे का शिकार भी हुए। बीते दिनों मोहल्ला बक्शीपुरा निवासी रोशनी गुप्ता का बेटा दिव्यांश गुप्ता रेलवे ट्रैक पार करते समय ट्रेन की ओर दौड़ पड़ा था। इस दौरान बेटे को बचाने दौड़ी रोशनी भी ट्रेन की चपेट में आ गई थी और मां-बेटे की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। वहीं बक्शीपुरा की ही रहने वाली निर्मला को रेलवे ट्रैक पार करते समय दहशत में हार्ट अटैक आ गया था और उनकी मौत हो गई। इसके बाद से स्थानीय लोगों में रेलवे के प्रति भारी आक्रोश था।
आरटीआई के जवाब में मिली अंडरपास की जानकारी
मोहल्ले के लोगों की समस्या को देखते हुए बक्शीपुरा निवासी बृजेश कुमार शर्मा ने रेल विभाग से सूचना के अधिकार अधिनियम (आईटीआई) के तहत जानकारी मांगी थी। इसके जवाब में वरिष्ठ मंडल इंजीनियर द्वितीय पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ ने अंडर पास निर्माण की कार्ययोजना का प्रस्ताव भेजने की जानकारी दी।
रास्ता बंद होने के बाद शुरू होने लगा था पलायन
रेलवे क्रासिंग संख्या 40 व 41 सी के बंद हो जाने के बाद से इलाके के कई लोगों ने पलायन की तैयारी भी कर ली थी। सबसे ज्यादा परेशानी डीजल पॉवर हाउस के निकट रहने वाले लोगों को थी। क्रॉसिंग बंद होने के बाद जो दूसरा रास्ता था वह जलभराव का शिकार था ऐसे में उन्हें बाजार, अस्पताल या किसी रिश्तेदार के यहां जाने के लिए कई बार सोचना पड़ता था। ऐसे में कुछ मोहल्लेवासियों ने रेलवे पटरी के उस पार घर बनवाना शुरू कर दिया था।