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Bahraich News: 450 होर्डिगों का जाल, एक की भी अनुमति नहीं, सिर्फ 15 यूनीपोल वैध
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शहर के केडीसी रोड तिराहे पर लगी होर्डिंग ।
बहराइच। शहर में होर्डिंग का जाल किस कदर फैला है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि नगर पालिका की ओर से प्रचार सामग्री लगाने के लिए महज 15 यूनिपोल की अनुमति है, जबकि शहर में करीब 450 होर्डिंग-बैनर लगे होने का अनुमान है। अस्पताल चौराहा, घंटाघर, छावनी चौराहा, पीपल तिराहा, डीएम चौराहा, केडीसी चौराहा, टिकोरा मोड़ समेत प्रमुख मार्गों और चौराहों पर कदम-कदम पर प्रचार सामग्री नजर आ रही है। इनमें यूनीपोल को छोड़कर सभी प्रचार सामग्री अनधिकृत हैं।
खास बात यह है कि नगर पालिका ने शहर में अधिकृत होर्डिंग लगाने के लिए अलग से कोई स्थल निर्धारित नहीं किया है। 15 यूनिपोल के माध्यम से प्रचार सामग्री प्रदर्शित करने की अनुमति दी गई है। इसका ठेका वर्ष 2019 में लखनऊ की कंपनी ओसीन आउटडोर सॉल्यूशन को 10 साल के लिए दिया गया था। ठेके के तहत प्रति यूनीपोल 10 हजार रुपये किराया प्रतिमाह निर्धारित है। इसके बावजूद सड़कों के किनारे, चौराहों, फुटपाथ, विद्युत पोल, पेड़ों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में होर्डिंग लगाए गए हैं। इससे न केवल शहर की सूरत बिगड़ रही है, बल्कि हादसे का खतरा भी बना रहता है।
यह है 15 यूनीपोल साइटों की सूची-- -
1- गोंडा रोड दोनक्का
2- पुलिस लाइन तिराहा
3- चुंगी नाका
4- डिगिहा तिराहा
5- बेरिया मंदिर मोड़
6- मालगोदाम रोड तिराहा
7- अस्पताल चौराहा
8- पानी टंकी चौराहा
9- कलेक्ट्रेट चौराहा
10- जेलरोड तिराहा
11- केडीसी रोड तिराहा
12- बाईपासरोड तिराहा
13- झिंगहाघाट पुल
14- गोलवाघाट
15- टिकोरामोड़ तिराहा
एक ओर हटते हैं दूसरी ओर लग जाते हैं होर्डिंग
केस-1 : केडीसी रोड
शहर के केडीसी रोड पर नगरपालिका प्रशासन ने बीते दिनों अभियान चलाकर अवैध होर्डिंग्स हटवाए थे, लेकिन सप्ताह भर के भीतर ही जगह-जगह फिर होर्डिंग्स नजर आने लगे हैं।
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केस-2 : रोडवेज रोड
रोडवेज रोड पर भी होर्डिंग्स और प्रचार सामग्री सड़क किनारे व आसपास के स्थानों पर लगी दिखाई दे रही हैं, जिससे अभियान की निरंतरता पर सवाल उठ रहे हैं।
केस-3 : छावनी बाजार
छावनी बाजार में भी होर्डिंग्स लगाने का सिलसिला जारी है। हटाने की कार्रवाई के बाद दोबारा होर्डिंग्स लगने से बाजार क्षेत्र में इनकी भरमार दिखाई दे रही है।
पिछले सप्ताह हटाए 150 होर्डिंग, फिर फैला जाल
नगर पालिका की टीम ने पिछले सप्ताह अभियान चलाकर करीब 150 अवैध होर्डिंग-बैनर कलेक्ट्रेट से केडीसी तक हटवाए। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में नवरात्र और दुर्गापूजा के होर्डिंग्स व प्रचार सामग्री दोबारा नजर आ रही है। इससे कार्रवाई की निरंतरता और निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
रात के अंधेरे में लगा देते हैं होर्डिंग
नगर पालिका की ईओ प्रमिता सिंह ने बताया कि लोग अक्सर रात के अंधेरे में मनमाने तरीके से होर्डिंग लगा देते हैं। जानकारी मिलने पर उन्हें जब्त किया जाता है। उन्होंने बताया कि होर्डिंग लगाने वाले का नाम-पता नहीं मिल पाता, इसलिए नोटिस जारी करना संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि अगर कोई अपने होर्डिंग्स पर दावा करे तो उससे जुर्माना वसूलने का प्रावधान है, लेकिन होर्डिंग उतरवाने के बाद कोई भी आज तक दावा करने आया ही नहीं। शहर में अवैध होर्डिंग के खिलाफ अभियान लगातार चलवाकर उसे हटवाया जाता है।
शहर में लगे सभी होर्डिंग अवैध नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी प्रमिता सिंह ने बताया कि शहर में सिर्फ यूनीपोल की ही मंजूरी है। यूनीपोल का किराया प्रतिमाह 10 हजार है। होर्डिंग का कोई स्थान न तो निर्धारित है न ही चिह्नित है। ऐसे में सभी होर्डिंग अवैध है, उन्हें हटाया जाएगा।
होर्डिंग के लिए नहीं हो सका टेंडर
ईओ प्रमिता सिंह ने बताया कि 2020-21 में जिले के आधा दर्जन स्थानों को चिह्नित कर शहर में होर्डिंग्स के स्थलों के नीलामी का प्रयास किया गया था, लेकिन कोई भी ठेकेदार सामने नहीं आया। इसके चलते टेंडर की कार्रवाई नहीं हो सकी।
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खास बात यह है कि नगर पालिका ने शहर में अधिकृत होर्डिंग लगाने के लिए अलग से कोई स्थल निर्धारित नहीं किया है। 15 यूनिपोल के माध्यम से प्रचार सामग्री प्रदर्शित करने की अनुमति दी गई है। इसका ठेका वर्ष 2019 में लखनऊ की कंपनी ओसीन आउटडोर सॉल्यूशन को 10 साल के लिए दिया गया था। ठेके के तहत प्रति यूनीपोल 10 हजार रुपये किराया प्रतिमाह निर्धारित है। इसके बावजूद सड़कों के किनारे, चौराहों, फुटपाथ, विद्युत पोल, पेड़ों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में होर्डिंग लगाए गए हैं। इससे न केवल शहर की सूरत बिगड़ रही है, बल्कि हादसे का खतरा भी बना रहता है।
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यह है 15 यूनीपोल साइटों की सूची
1- गोंडा रोड दोनक्का
2- पुलिस लाइन तिराहा
3- चुंगी नाका
4- डिगिहा तिराहा
5- बेरिया मंदिर मोड़
6- मालगोदाम रोड तिराहा
7- अस्पताल चौराहा
8- पानी टंकी चौराहा
9- कलेक्ट्रेट चौराहा
10- जेलरोड तिराहा
11- केडीसी रोड तिराहा
12- बाईपासरोड तिराहा
13- झिंगहाघाट पुल
14- गोलवाघाट
15- टिकोरामोड़ तिराहा
एक ओर हटते हैं दूसरी ओर लग जाते हैं होर्डिंग
केस-1 : केडीसी रोड
शहर के केडीसी रोड पर नगरपालिका प्रशासन ने बीते दिनों अभियान चलाकर अवैध होर्डिंग्स हटवाए थे, लेकिन सप्ताह भर के भीतर ही जगह-जगह फिर होर्डिंग्स नजर आने लगे हैं।
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केस-2 : रोडवेज रोड
रोडवेज रोड पर भी होर्डिंग्स और प्रचार सामग्री सड़क किनारे व आसपास के स्थानों पर लगी दिखाई दे रही हैं, जिससे अभियान की निरंतरता पर सवाल उठ रहे हैं।
केस-3 : छावनी बाजार
छावनी बाजार में भी होर्डिंग्स लगाने का सिलसिला जारी है। हटाने की कार्रवाई के बाद दोबारा होर्डिंग्स लगने से बाजार क्षेत्र में इनकी भरमार दिखाई दे रही है।
पिछले सप्ताह हटाए 150 होर्डिंग, फिर फैला जाल
नगर पालिका की टीम ने पिछले सप्ताह अभियान चलाकर करीब 150 अवैध होर्डिंग-बैनर कलेक्ट्रेट से केडीसी तक हटवाए। इसके बावजूद शहर के कई हिस्सों में नवरात्र और दुर्गापूजा के होर्डिंग्स व प्रचार सामग्री दोबारा नजर आ रही है। इससे कार्रवाई की निरंतरता और निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
रात के अंधेरे में लगा देते हैं होर्डिंग
नगर पालिका की ईओ प्रमिता सिंह ने बताया कि लोग अक्सर रात के अंधेरे में मनमाने तरीके से होर्डिंग लगा देते हैं। जानकारी मिलने पर उन्हें जब्त किया जाता है। उन्होंने बताया कि होर्डिंग लगाने वाले का नाम-पता नहीं मिल पाता, इसलिए नोटिस जारी करना संभव नहीं होता। उन्होंने कहा कि अगर कोई अपने होर्डिंग्स पर दावा करे तो उससे जुर्माना वसूलने का प्रावधान है, लेकिन होर्डिंग उतरवाने के बाद कोई भी आज तक दावा करने आया ही नहीं। शहर में अवैध होर्डिंग के खिलाफ अभियान लगातार चलवाकर उसे हटवाया जाता है।
शहर में लगे सभी होर्डिंग अवैध नगर पालिका की अधिशासी अधिकारी प्रमिता सिंह ने बताया कि शहर में सिर्फ यूनीपोल की ही मंजूरी है। यूनीपोल का किराया प्रतिमाह 10 हजार है। होर्डिंग का कोई स्थान न तो निर्धारित है न ही चिह्नित है। ऐसे में सभी होर्डिंग अवैध है, उन्हें हटाया जाएगा।
होर्डिंग के लिए नहीं हो सका टेंडर
ईओ प्रमिता सिंह ने बताया कि 2020-21 में जिले के आधा दर्जन स्थानों को चिह्नित कर शहर में होर्डिंग्स के स्थलों के नीलामी का प्रयास किया गया था, लेकिन कोई भी ठेकेदार सामने नहीं आया। इसके चलते टेंडर की कार्रवाई नहीं हो सकी।