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Bahraich News: मिनी स्टड बना ढाल, कटान से बचा गोलागंज गांव

Tue, 13 Oct 2026 12:27 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 13 Oct 2026 12:27 AM IST
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Mini-stud acts as a shield; Golaganj village saved from erosion.
 महसी में गोलागंज गांव के पास चल रहा कटानरोधी कार्य।
बहराइच। कटान से गोलागंज गांव के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा फिलहाल टल गया है। बाढ़ खंड की ओर से तात्कालिक बचाव के लिए बनाए जा रहे मिनी स्टड का असर दिखने लगा है। नदी की धारा अब गांव की ओर कटान करने के बजाय स्टड से टकराकर विपरीत दिशा में मुड़ रही है। इससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। हालांकि, कटान से स्थायी सुरक्षा के लिए अभी ठोस इंतजाम किए जाने की जरूरत है।
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गांव निवासी राधेश्याम, जीवनलाल और माताप्रसाद ने बताया कि बचाव कार्य शुरू होने में दो दिन की और देरी हो जाती तो गांव को बचाना मुश्किल हो सकता था। समय रहते काम शुरू होने से लोगों को राहत मिली है। ग्रामीणों के मुताबिक, रविवार से नदी की धारा का रुख बदलने के बाद गांव के साथ आसपास के खेतों और बागों में भी कटान थम गया है। हालांकि, तेज बहाव के कारण अस्थायी स्टड के क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में स्थायी बचाव कार्य जरूरी है।
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सरयू ड्रेनेज खंड प्रथम के अधिशासी अभियंता जेपी वर्मा ने बताया कि फिलहाल कटान पर अंकुश लगा है। नदी की धारा गांव के विपरीत दिशा में मुड़ने से आबादी, खेतों और बागों पर खतरा कम हुआ है। गोलागंज से बेलहा-बेहरौली तटबंध के किलोमीटर संख्या 53 तक करीब 500 मीटर के दायरे में मिनी स्टड बनाए जा रहे हैं। इसके बाद कटान रोकने के लिए स्थायी उपायों का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।
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ऐसे कटान रोकते हैं मिनी स्टड
अधिशासी अभियंता जेपी वर्मा के मुताबिक, मिनी स्टड बनाने में बांस के क्रेट, नायलॉन क्रेट और जियो ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता है। गोलागंज में तत्काल बचाव के लिए बांस और नायलॉन के क्रेट लगाए जा रहे हैं। बांस की बल्लियों को सीढ़ीनुमा ढांचे में लगाकर उनके बीच बालू भरी बोरियां रखी जाती हैं। वहीं, नायलॉन की रस्सियों का जाल बनाकर उसमें भी बालू की बोरियां भरी जाती हैं। नदी किनारे बनाई गई इन संरचनाओं से टकराकर धारा का रुख बदलता है। इससे कटान की दिशा आबादी से विपरीत करने में मदद मिलती है।
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