{"_id":"131-87632","slug":"Bahraich-87632-131","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंदगी के बीच करनी होगी सूर्योपासना ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंदगी के बीच करनी होगी सूर्योपासना
Bahraich
Updated Tue, 28 Oct 2014 05:31 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बहराइच। छठ पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। सोमवार को पवित्रीकरण स्नान से भगवान सूर्य की आराधना का क्रम शुरू होगा। जबकि नदी, नाले व तालाब के पूजित तट पर 29 अक्तूबर शाम को भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। लेकिन अभी तक पूजित स्थानों पर साफ सफाई का काम शुरू नहीं हुआ है न ही प्रकाश की व्यवस्था हुई है। जिसके चलते अव्यवस्था के बीच छठ पूजा की परंपरा का निर्वहन करना सभी की मजबूरी होगी।
छठ पूजा के तहत कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को तालाब या नदी के तट पर भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। शहर के सरयू नदी पर स्थित झिंगहाघाट, छोटी बेरिया, उर्रा के सोती नाला, मिहींपुरवा में सरयू नदी के तट पर रुपईडीहा के हनुमंत सरोवर तथा नेपालगंज बांके जिले में स्थित बागेश्वरी माता मंदिर के तालाब, रानी तालाब और राप्ती नदी के तट पर सूर्य देवता की अराधना के लिए दो दिन निरजला व्रत रहकर पूजा की जाती है। वैसे इस व्रत की तैयारियां चार दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। प्रथम दिन माताएं लौकी का पकवान, दूसरे दिन चावल का मीठा पकवान, तीसरे दिन निरजला व्रत, उसी दिन नदी, तालाबों, नहरों के किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य, चौथे दिन उगते सूर्य को प्रात:काल अर्घ्य देकर पुत्र के सलामती की दुआ मांगते हुए अपना व्रत तोड़ती हैं। इस बार भी घरों में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। लेकिन अभी तक नदी और तालाब के पूजित तट पर साफ सफाई नहीं हुई है।
विज्ञापन
छठ पूजा के तहत कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी को तालाब या नदी के तट पर भगवान सूर्य की आराधना की जाती है। शहर के सरयू नदी पर स्थित झिंगहाघाट, छोटी बेरिया, उर्रा के सोती नाला, मिहींपुरवा में सरयू नदी के तट पर रुपईडीहा के हनुमंत सरोवर तथा नेपालगंज बांके जिले में स्थित बागेश्वरी माता मंदिर के तालाब, रानी तालाब और राप्ती नदी के तट पर सूर्य देवता की अराधना के लिए दो दिन निरजला व्रत रहकर पूजा की जाती है। वैसे इस व्रत की तैयारियां चार दिन पहले से ही शुरू हो जाती है। प्रथम दिन माताएं लौकी का पकवान, दूसरे दिन चावल का मीठा पकवान, तीसरे दिन निरजला व्रत, उसी दिन नदी, तालाबों, नहरों के किनारे डूबते सूर्य को अर्घ्य, चौथे दिन उगते सूर्य को प्रात:काल अर्घ्य देकर पुत्र के सलामती की दुआ मांगते हुए अपना व्रत तोड़ती हैं। इस बार भी घरों में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। लेकिन अभी तक नदी और तालाब के पूजित तट पर साफ सफाई नहीं हुई है।
विज्ञापन