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2000 नए मेहमान अगले सप्ताह दे सकते हैं दस्तक
Bahraich
Updated Sun, 25 May 2014 05:31 AM IST
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अतुल अवस्थी
बहराइच। जून के पहले सप्ताह में घड़ियालों का कुनबा बढ़ सकता है। तराई के बढ़ते तापमान के कारण इस बार समय से 15 दिन पहले ही 2000 नए मेहमानों की आंखें खुलने की संभावना है। इसके लिए निगरानी टीम गठित की गई है। यह टीम कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी में घड़ियालों के 40 घोंसलों में अंडों की सुरक्षा में लगी हुई है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी घड़ियालों के कुनबों को बढ़ाने में मददगार मानी जाती है। इस समय अनुमान के मुताबिक नदी में लगभग 300 वयस्क घड़ियाल मौजूद हैं। प्रति वर्ष मार्च के अंत में घड़ियाल नदी के टापू वाले स्थानों पर अंडे देकर उन्हें बालुओं में सहेज कर घोंसला बना देते हैं। एक घोंसले में 45 से 50 अंडे होते हैं। बालुओं में ढकने के बाद मादा घड़ियाल अंडों के प्रति निश्चिंत हो जाती है। अंडों से बच्चों के निकलने का समय 15 जून होता है लेकिन इस बार तराई में पड़ रही भीषण गर्मी इनके जल्द जन्म होने का कारण बन सकती है। जून के पहले सप्ताह में अंडों से बच्चे निकलने की संभावना विशेषज्ञ जता रहे हैं। प्रभारी प्रभागीय वनाधिकारी सुभाष चंद्रा का कहना है कि चार वन रक्षकों की टीम गठित की गई है, जो मोटरबोट व नाव के सहारे टापुओं पर बने घड़ियालों के घोंसलों पर नजर रख रहे हैं। विश्व प्रकृति निधि भारत (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि अंडों की प्रतिदिन सुबह-शाम निगरानी हो रही है। बालू हटाकर अंडों की स्थिति जांची जा रही है। जैसे ही बच्चों के निकलने की शुरुआत होगी, उन्हें नदी में छोड़ा जाएगा।
बहराइच। जून के पहले सप्ताह में घड़ियालों का कुनबा बढ़ सकता है। तराई के बढ़ते तापमान के कारण इस बार समय से 15 दिन पहले ही 2000 नए मेहमानों की आंखें खुलने की संभावना है। इसके लिए निगरानी टीम गठित की गई है। यह टीम कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी में घड़ियालों के 40 घोंसलों में अंडों की सुरक्षा में लगी हुई है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से होकर बहने वाली नेपाल की गेरुआ नदी घड़ियालों के कुनबों को बढ़ाने में मददगार मानी जाती है। इस समय अनुमान के मुताबिक नदी में लगभग 300 वयस्क घड़ियाल मौजूद हैं। प्रति वर्ष मार्च के अंत में घड़ियाल नदी के टापू वाले स्थानों पर अंडे देकर उन्हें बालुओं में सहेज कर घोंसला बना देते हैं। एक घोंसले में 45 से 50 अंडे होते हैं। बालुओं में ढकने के बाद मादा घड़ियाल अंडों के प्रति निश्चिंत हो जाती है। अंडों से बच्चों के निकलने का समय 15 जून होता है लेकिन इस बार तराई में पड़ रही भीषण गर्मी इनके जल्द जन्म होने का कारण बन सकती है। जून के पहले सप्ताह में अंडों से बच्चे निकलने की संभावना विशेषज्ञ जता रहे हैं। प्रभारी प्रभागीय वनाधिकारी सुभाष चंद्रा का कहना है कि चार वन रक्षकों की टीम गठित की गई है, जो मोटरबोट व नाव के सहारे टापुओं पर बने घड़ियालों के घोंसलों पर नजर रख रहे हैं। विश्व प्रकृति निधि भारत (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) के परियोजना अधिकारी दबीर हसन ने बताया कि अंडों की प्रतिदिन सुबह-शाम निगरानी हो रही है। बालू हटाकर अंडों की स्थिति जांची जा रही है। जैसे ही बच्चों के निकलने की शुरुआत होगी, उन्हें नदी में छोड़ा जाएगा।
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